Satya Darshan

भारत से आगे निकल अफ्रीका भी अंगडाईयां लेने लगा

विश्व दर्शन | अप्रैल 19, 2019

इस वक्त दुनिया में सबसे तेज आर्थिक विकास करने वाला देश कौन सा है? इस सवाल का जवाब अफ्रीकी महाद्वीप में छुपा है. वहां एक नहीं, बल्कि कई देश फर्राटा भर रहे हैं.

आर्थिक विकास के मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय मंच में सुर्खियां बटोरने वाले चीन और भारत जैसे ताकतवर देशों को एक अफ्रीकी देश ने पीछे छोड़  दिया है. घाना की अर्थव्यवस्था दमक रही है. विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के मुताबिक 2019 में घाना दुनिया में सबसे तेज आर्थिक विकास वाला देश होगा. आईएमएफ के वर्ल्ड इकोनोमिक आउटलुक के मुताबिक घाना की जीडीपी 8.8 फीसदी की रफ्तार से आगे बढ़ेगी. 2018 में विकास दर 5.6 फीसदी थी. लेकिन अचानक ऐसा क्या हुआ कि घाना ने तेजी से दौड़ना शुरू कर दिया?

घाना यूनिवर्सिटी के अदू ओवुशु सारकोडी के मुताबिक, इसकी मुख्य वजह तेल उद्योग है, "हम नए ऑयल फील्ड्स खोज चुके हैं. कंपनियां काम काज शुरू कर चुकी हैं, वे बड़ी शिद्दत से काम कर रही हैं." घाना के ठीक पीछे उसी का पड़ोसी देश आइवरी कोस्ट खड़ा है. आइवरी कोस्ट की जीडीपी 7.5 फीसदी की दर से बढ़ रही है. वहीं अफ्रीकी महाद्वीप के एक और देश इथियोपिया की अर्थव्यवस्था 7.7 फीसदी की दर से कुलांचे भर रही है. आइवरी कोस्ट और इथियोपिया की विकास दर स्थिर बनी हुई है, यानि ये दोनों देश करीबन इसी रफ्तार से विकास करते रहेंगे. घाना की दौड़ 2020 के बाद थोड़ी सुस्त पड़ सकती है.

आईएमएफ के अफ्रीकी विभाग के रिजनल स्ट्डीज डिविजन के हेड पापा नदियाये कहते हैं, "हमें नहीं लगता कि 8.8 फीसदी की विकास दर लंबे वक्त तक बरकरार रखी जा सकती है. अगर आप प्रति व्यक्ति आय को देखें और पुराने दौर के चीन से उसकी तुलना करें तो यह अब भी काफी कम है." नदियाये का अनुमान है कि 2020 के बाद घाना की विकास दर 4.5 से 5 फीसदी के बीच आ जाएगी.

घाना का इंजन

सिर्फ तेल उद्योग ही घाना की अर्थव्यवस्था में जान नहीं फूंक रहा है. सारकोडी कहते हैं, "गैर तेल उद्योग, जैसे कृषि, मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर भी तेजी पकड़ रहे हैं. अब ये सारे सकारात्मक ढंग से विकास कर रहे हैं."

बीते दो साल में कृषि क्षेत्र को जबरदस्त ढंग से बढ़ावा दिया गया. खाद्यान्न और रोजगार के मामले में ठोस नीतियां बनाई गईं. इसका सीधा फायदा कृषि क्षेत्र को मिला. उदाहरण के लिए, 2.88 करोड़ की आबादी वाले देश घाना ने अपने दो लाख किसानों को बेहतर खाद और बीज मुहैया कराए. अब कृषि क्षेत्र अर्थव्यवस्था की अहम रीढ़ बन गया है. कृषि मंत्री ओवुशु अफ्रीयी अकोतो के मुताबिक इस योजना से देश भर में शानदार फसल हुई, "इस बार भी हम बंपर फसल की उम्मीद कर रहे हैं. यह भले ही शुरुआत हो लेकिन इस ग्रेट प्रोग्राम का कृषि पर जबरदस्त असर हुआ है."

किसकी हार जीत

जिस जगह विजेता होंगे, वहां पराजित होने वाले भी होंगे. अफ्रीकी देश अंगोला आर्थिक विकास की सूची में सबसे नीचे खिसक चुका है. आर्थिक विकास दर 0.4 फीसदी है. बीते साल 1.7 फीसदी गिरावट देखी गई. दक्षिण अफ्रीकी अर्थव्यवस्था भी 1.2 फीसदी की रफ्तार से रेंग रही है. विशाल तेल भंडार वाला नाइजीरिया भी हांफ कर 2.1 फीसदी की विकास दर पर पहुंच गया है.

नदियाये इस सुस्ती की वजह बताते हुए कहते हैं, "वस्तुओं के दामों में आई भारी गिरावट ने इन देशों पर करारी चोट की है. अगर आप 1970 के दशक को देखेंगे तो ऐसा ही नजारा मिलेगा. ये देश धीमे धीमे इससे उबर रहे हैं लेकिन इसमें वक्त लगेगा. देशों को सुधारों को लागू करने की भी जरूरत है, अर्थव्यवस्था में विविधता लाने और निजी क्षेत्र की गतिविधियों को बढ़ावा देने की भी आवश्यकता है. विकास को चुनौती देने वाली बाधाएं हटानी होंगी, साथ ही अच्छा कारोबारी माहौल भी बहाल करना होगा."

विकास का फायदा नागरिकों को मिले

घाना चॉकलेट बनाने वाले बीज कोकोआ का दूसरा बड़ा उत्पादक है. लेकिन कृषि क्षेत्र के उलट, कोकोआ उत्पादन में जुटे ज्यादातर नागरिक विदेशी कंपनियों पर निर्भर रहते हैं. वे कच्चा माल ही बेच पाते हैं. कुछ ऐसी ही तस्वीर खनन और तेल उद्योग की भी है. वे भी विदेशी निवेशकों के इशारों पर चलते हैं. सारकोडी के मुताबिक विदेशी निवेश का दीर्घकालीन फायदा जरूर होता है, लेकिन स्थानीय समुदाय अगर लाभ से दूर रहे तो समस्याएं आती हैं.

घाना यूनिवर्सिटी के अदू ओवुशु सारकोडी कहते हैं, "मेरी मुख्य चिंता विकास के स्रोत को लेकर है. जीडीपी एक डोमेस्टिक प्रोडक्ट है, इससे फर्क नहीं पड़ता कि उत्पादन कौन कर रहा है, विदेशी या घाना के नागरिक. लेकिन हम जानते हैं कि घाना में हमारी ज्यादातर कंपनियां विदेशी स्वामित्व वाली हैं. घाना के लोगों की जिंदगी में उनका असर बहुत ही कम है."

(रिपोर्ट: सिल्जा फ्रोएलिष/ओएसजे)

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