Satya Darshan

प्राथमिक चिकित्सा एवं आपातकाल विषयक त्री दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का म.ग. काशी विद्यापीठ मे हुआ विधिवत उद्घाटन

वाराणसी | अप्रैल 18, 2019

युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, नई दिल्ली के निर्देशन में योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा केन्द्र, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी और राष्ट्रीय सेवा योजना, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी के संयुक्त तत्वावधान में प्राथमिक चिकित्सा एवं आपातकाल विषयक तीन दिवसीय (18-20,अप्रैल 2019) राष्ट्रीय कार्यशाला का उद्घघाटन गांधी अध्ययन पीठ सभागार में किया गया।

मुख्य अतिथि अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय बिलासपुर, छत्तीसगढ़ के कुलपति प्रो जी.डी.शर्मा ने कहा कि मनुष्य की अधिक जीने की इच्छा चिकित्सा के क्षेत्र में नई चिकित्सा पद्धति को खोजने में  बड़ी सहायता की है। भारत की परंपरागत उपचार पध्दति वैज्ञानिक है। हमारी परंपरागत उपचार पध्दति भारतीय चिकित्सा का मूल आधार है। जिसे हमें  बढ़ावा देने की आवश्यकता है। भारतीय दर्शन आंतरिक विकास की बात करता है जो पूर्णतः मानवता पर आधारित है। दान, दया और सेवा की भावना विकसित कर हम  प्राथमिक   चिकित्सा को जन-जन में प्रचारित-प्रसारित कर सकते है।

मुख्य वक्ता इण्टर यूनिवर्सिटी टीचर एजुकेशन सेंटर, मानव संसाधन विकास मंत्रालय के निदेशक डॉक्टर बी.के .त्रिपाठी ने कहा कि प्राथमिक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा का  इतिहास काफी पुराना है। भारत अपने मूल्य परक चिकित्सा के कारण लोकतांत्रिक व्यवस्था में विश्व का सबसे मजबूत देश है। इसलिए युवाओं में चिकित्सा ज्ञान के साथ कौशल का होना भी आवश्यक है। इसलिए हमारी युवा पीढ़ी को चिकित्सकीय कौशल पर विशेष ध्यान देना चाहिए और हमें निरंतर नए शोध करते रहना चाहिए। किसी भी देश के विकास का प्रमुख आधार उत्तम चिकित्सा पद्धति एवं गुणवत्ता शोध होता है। 

विशिष्ट अतिथि एम.जे.रेड्डी ने  कहा कि भारत  चिकित्सा पद्धति के  मामले में प्राचीन काल से ही  विश्व में सबसे आगे रहा है।  हम  परंपरागत  प्राणिक हीलिंग के द्वारा भी लोगों को प्राथमिक उपचार देकर जान बचा सकते हैं। इसलिए  आज आवश्यकता है कि  हम अपने परंपरागत  चिकित्सक  ज्ञान का  प्रचार- प्रसार  प्रमुखता के साथ करें और अपने युवाओं को इस पद्धति से अवगत कराएं। भारतीय चिकित्सा पद्धति  पूर्णतः योग पर आधारित थी। यह योग आधारित चिकित्सा पद्धति हमेशा समाज के लिए  लाभप्रद रही है। 

महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ  कुलपति  प्रोफेसर टी. एन.सिंह ने  कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए कहा कि भारत की सबसे बड़ी समस्या जनसंख्या है। इसका निदान हम अपनी संस्कृति और  परंपरा को छोड़ कर  नहीं कर सकते। भारतीय जनमानस आपस में सहयोग कर एक- दूसरे की समस्याओं का समाधान कर सकते हैं। हम आपस में अपने दुखों को अभिव्यक्त कर उसका निराकरण कर सकते हैं। समाज में  सेवा का संस्कार  विकसित करना अति आवश्यक है। हम युवाओं में यदि सेवा का भाव विकसित कर दें तो हर तरह की  समस्याओं से मुक्ति पा सकते हैं। भारतीय चिकित्सा तो मूलतः सेवा पर ही आधारित है। 

डॉ  एस.के.सिंह ने कहा कि आधुनिक और परंपरागत चिकित्सा पध्दति के जानकार को एक साथ मिलकर कार्य करने की आवश्यकता है। यदि हम आपस में सामंजस्य स्थापित कर  चिकित्सा के क्षेत्र में कार्य करते हैं, तो वह दिन दूर नहीं जब हम स्वस्थ भारत की कल्पना को साकार करेंगे। राष्ट्रीय कार्यशाला के निदेशक प्रोफेसर सुशील कुमार गौतम ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि प्राथमिक चिकित्सा मूलतः जन सहयोग पर आधारित है इसलिए जनसेवा की भावना हमें युवाओं के साथ ही समाज में भी विकसित करने की आवश्यकता है। इसलिए स्वास्थ्य से सम्बंधित समस्याओं को दूर करने के लिए समाज के सभी लोगों का सहयोग आवश्यक है। 

राष्ट्रीय कार्यशाला के उद्घघाटन सत्र का प्रारम्भ दीप प्रज्वलित कर किया गया। उद्घघाटन सत्र का संचालन डॉक्टर हरेराम पांडेय ने किया एवं धन्यवाद प्रोफेसर चतुर्भुज नाथ तिवारी ने किया। 

राष्ट्रीय कार्यशाला में प्रोफेसर रेखा,डॉ बालरूप यादव, प्रोफ़ेसर अरविंद पांडेय, डॉक्टर अनीता , डॉक्टर वीरेंद्र, डॉ. अर्चना गोस्वामी  , डॉक्टर सुमन कुमार ओझा, डॉक्टर अमरेन्द्र सिंह,डॉक्टर रमेश यादव, डॉक्टर भूपेन्द्र यादव, डॉक्टर सुनील ,डॉक्टर चन्द्रमणि, जगदीश, विवेक डॉक्टर मनोहर लाल सहित कई संस्थाओं से आए चिकित्सक, अध्यापक, शोध छात्र एवं छात्र उपस्थित थे।

उद्घघाटन सत्र के बाद गांधी अध्ययनपीठ सभागार एवं भगवान दास केंद्रीय पुस्तकालय स्थित समिति कक्ष में दो समानांतर सत्र चला।दोनों सत्रों में लगभग 700 प्रतिभागियों ने सहभागिता की।
 

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