Satya Darshan

लगता है हमारे आदेश के बाद जाग गया चुनाव आयोग : सुप्रीम कोर्ट

चुनाव आयोग की कार्रवाई से सुप्रीम कोर्ट संतुष्ट, लाख टके का सवाल- क्या पीएम के विवादित बोलों पर भी होगी कार्रवाई?

जेपी सिंह | अप्रैल 16, 2019

लोकसभा चुनाव में विवादित बयान या भाषण पर चुनाव आयोग की कार्रवाई से उच्चतम न्यायालय संतुष्ट है. उच्चतम न्यायालय ने आयोग की कार्रवाई पर संतोष जताते हुए कहा कि फिलहाल कोई नए आदेश देने की जरूरत नहीं है. यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ, सपा नेता आजम खां, बसपा प्रमुख मायावती और भाजपा नेता मेनका गांधी के प्रचार पर प्रतिबन्ध के बाद उच्चतम न्यायालय ने कहा कि लगता है कि चुनाव आयोग हमारे आदेश के बाद जाग गया है और उसने कई नेताओं को चुनाव प्रचार से कुछ घंटों के लिए प्रतिबन्ध लगा दिया. 

वहीं दूसरी ओर उच्चतम न्यायालय ने मायावती की उस याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया, जिसमें उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान घृणा फैलाने वाले बयानों को ले कर चुनाव आयोग के प्रतिबंध को चुनौती दी थी.लेकिन लाख टके का सवाल है कि चुनाव आयोग प्रधानमन्त्री के विवादित बयानों पर कोई कार्रवाई करेगा या नहीं यदि करेगा तो कब करेगा?

उच्चतम न्यायालय ने चुनाव प्रचार के दौरान बसपा प्रमुख मायावती और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कथित रूप से विद्वेष फैलाने वाले भाषणों के मामले में उनके खिलाफ चुनाव आयोग की कार्रवाई पर सोमवार को अप्रसन्नता व्यक्त की. इसके साथ ही न्यायालय ने कहा था कि वह आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन के मामले में आयोग के अधिकारों के दायरे पर विचार किया जायेगा. 

मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ ने चुनाव प्रचार के दौरान उप्र के इन दो प्रमुख नेताओं के कथित रूप से विद्वेष फैलाने वाले भाषणों का संज्ञान लेते हुये आयोग से जानना चाहा कि उसने अभी तक क्या कार्रवाई की. इससे पहले आयोग ने इस मामले में खुद को ‘दंतविहीन’ बताया था.

पीठ ने कहा था कि आप बतायें कि आप क्या कर रहे हैं. हमें बतायें कि आपने क्या कार्रवाई की है.इसके साथ ही उच्चतम न्यायालय ने आयोग के एक प्रतिनिधि को मंगलवार की सुबह साढ़े दस बजे तलब किया था. पीठ ने आयोग के इस कथन पर गौर करने का निश्चय किया कि उसके पास चुनाव प्रचार के दौरान जाति एवं धर्म को आधार बना कर विद्वेष फैलाने वाले वाले भाषणों से निबटने के लिये सीमित अधिकार है.

उच्चतम न्यायालय के सख्त रूख के चंद घंटों के भीतर ही निर्वाचन आयोग हरकत में आया और उसने दोनों नेताओं की सांप्रदायिक टिप्पणियों के लिये कड़े शब्दों में निन्दा की और उन्हें चुनाव प्रचार से रोक दिया. आयोग ने आदित्यनाथ को 72 घंटे और बसपा सुप्रीमो मायावती को 48 घंटे के लिये चुनाव प्रचार से बाहर कर दिया. साथ ही मेनका गांधी को 48 घंटे और आजम खान को भी 72 घंटे के लिए प्रतिबंधित किया है।

इसके बाद चुनाव आयोग ने केन्द्रीय मंत्री मेनका गांधी और समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान को भी विवादित बयान देने के मामले में मंगलवार से चुनाव प्रचार करने से रोक दिया.

गौरतलब है कि यह पहली बार है जब किसी केन्द्रीय मंत्री को प्रचार अभियान में हिस्सा लेने पर देशव्यापी रोक लगायी गयी है. मेनका गांधी को मंगलवार को सुबह दस बजे से अगले 48 घंटे तक देश में कहीं भी किसी भी प्रकार से चुनाव प्रचार में हिस्सा लेने से रोक दिया है. इसी तरह आजम खान को भी मंगलवार सुबह दस बजे से अगले 72 घंटे तक चुनाव प्रचार करने से रोका गया है.

मायावती के वकील दुष्यंत दवे ने कहा की चुनाव आयोग ने बिना बीएसपी प्रमुख को अपना पक्ष रखने का मौका दिए एकतरफा कार्रवाई की। आयोग ने दूसरा पक्ष सुने बिना ही उनके चुनाव प्रचार पर 48 घंटे की रोक लगा दी है। इस आदेश को रद्द किया जाना चाहिए। मुख्य न्यायाधीश ने इस पर कहा कि हमें नहीं लगता कि इसमें कोई आदेश दिया जाना चाहिए।

दरअसल मुसलमानों से महागठबंधन के पक्ष में एकमुश्त वोट करने की अपील बीएसपी सुप्रीमो ने की थी। इस बयान पर दर्ज हुए शिकायत की सुनवाई करते हुए आयोग ने बीएसपी प्रमुख के प्रचार पर 48 घंटे तक के लिए बैन लगाया। मायावती ने उच्चतम न्यायालय से उन पर चुनाव आयोग द्वारा लगाया गए प्रतिबंध हटाने की मांग की थी।

पीएम के लातूर वाले भाषण की जांच

इस बीच कहा जा रहा कि चुनाव आयोग प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी के लातूर वाले भाषण की जांच कर रहा है। महाराष्ट्र के लातूर में भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार के पक्ष में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए पाकिस्तान में एयर स्ट्राइक करने वाले भारतीय जवानों और पुलवामा आतंकी हमले में शहीद सैनिकों के नाम पर लोगों से मतदान करने की अपील कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुश्किल में फंस सकते हैं। महाराष्ट्र में स्थानीय चुनाव अधिकारियों ने पहली नजर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की टिप्पणी को आयोग के आदेशों का उल्लंघन माना है।

महाराष्ट्र में स्थानीय चुनाव अधिकारियों ने चुनाव आयोग को बताया है कि पहली बार मतदान करने जा रहे मतदाताओं से बालाकोट एयर स्ट्राइक के नाम पर अपना वोट डालने की अपील वाली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की टिप्पणी प्रथम दृष्टया इसके उन आदेशों का उल्लंघन है जिसमें उसने अपने प्रचार अभियान में राजनीतिक दलों से सशस्त्र बलों के नाम का इस्तेमाल नहीं करने को कहा था।

प्रधानमंत्री मोदी ने पहली बार मतदान करने वाले मतदाताओं से 9 अप्रैल को लातूर में कहा था कि मैं पहली बार मतदान करने वाले युवाओं से कहना चाहता हूं कि क्या आपका पहला वोट पाकिस्तान के बालाकोट में एयर स्ट्राइक करने वाले वीर जवानों के नाम समर्पित हो सकता है? क्या आपका पहला वोट पुलवामा में शहीद हुए हमारे वीर जवानों के नाम समर्पित हो सकता है? अब यहाँ विचारणीय प्रश्न यह है कि 9 अप्रैल के बाद के चार मामलों में चुनाव आयग ने कार्रवाई तो कर दी है लेकिन प्रधानमन्त्री के बारे में कर्रवाई को लेकर चुप्पी साध रखी है।

चुनाव आयोग पर मायावती का आरोप

मंगलवार को आगरा में होने वाली चुनावी सभा पर रोक से पहले मायावती ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि चुनाव आयोग नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह पर किसी भी तरह की रोक नहीं लगा रहा है। चुनाव आयोग अगर हमारे ऊपर भड़काऊ भाषण का आरोप सही मानते हुए रोक लगा सकता है तो नरेंद्र मोदी पर क्यों नहीं?मायावती ने चुनाव आयोग पर गलत और असंवैधानिक तरीके से रोक लगाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को भी पता है कि दूसरे चरण का चुनाव जिन लोकसभा सीटों पर होना है वहां पर हम मजबूत स्थिति में हैं। यही कारण है कि बीजेपी के इशारे पर चुनाव आयोग ने ये फैसला लिया है, जिससे मैं आगरा में चुनावी सभा न कर सकूं।


(इलाहाबाद के वरिष्ठ पत्रकार और कानूनी मामलों के जानकार जेपी सिंह की रिपोर्ट)

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