Satya Darshan

नाथ ने अब खोली तीसरी आंख, व्यापमं से भी बड़े ई टेंडर घोटाले पर दर्ज हुई एफआईआर

दीपक राय | अप्रैल 11, 2019

भोपाल : मध्य प्रदेश में इन दिनों राजनीतिक गैंगवार शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री कमल नाथ को निशाना बनाकर तीन दिन पहले मारे गए आयकर छापे के बाद अब ईं-टेंडरिंग घोटाले की फाइल खुल गई है। आयकर टीम को भले ही मुख्यमंत्री के करीबियों से कुछ भी नहीं मिला हो, लेकिन अब नाथ सरकार भी एक्शन के मूड में आ गई है। अब नाथ सरकार ने पूर्ववर्ती सरकार में हुए घोटालों की जांच से पर्दा हटाना शुरू कर दिया है...

पूर्ववर्ती भाजपा के शिवराज सरकार में सामने आए 3 हजार करोड़ के ई-टेंडरिंग घोटाले की जांच तेज हो गई है। बुधवार को राज्य के आपराधिक अनुसंधान ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) ने इस मामले में 5 एफआईआर दर्ज की हैं। ईओडब्ल्यू के एडीजी केएन तिवारी ने ईएमएस को बताया कि पांच विभागों, सात कंपनियों, अज्ञात अफसरों और नेताओं पर एफआईआर दर्ज की गई है। 

सूत्रों का कहना है कि यह संख्या और बढ़ सकती है। भोपाल में दर्ज कराई गई एफआईआर में लिखा गया है कि 'अज्ञात नौकरशाह और राजनेता के खिलाफ हैं आरोप'। एफआईआर के बाद कई अफसरों और भाजपा नेताओं की धड़कनें तेज हो गई हैं। आज की इस कार्रवाई को हाल ही में सीएम के करीबियों पर पड़े आयकर के छापों का एमपी सरकार की तरफ से दिया गया जवाब समझा जा रहा है।

किन पर हुई एफआईआर

5 विभागों के अधिकारियों और तत्कालीन जि़म्मेदार नेताओं के खिलाफ भोपाल में एफ आई आर दर्ज करा दी गयी है। विभागों में जल निगम, लोक निर्माण विभाग, पीआईयू, रोड डेवलेपमेंट और जल संसाधन विभाग पर टेंडर में गड़बड़ी के आरोप लगे हैं। इन मामलों में 7 कंपनियों पर फर्जीवाड़ा कर टेंडर लेने का आरोप हैं।

इन घोटालों पर नाथ खोलेंगे तीसरी आंख

सूत्रों का कहना है कि शिवराज सरकार में डंपर कांड, व्यापमं कांड, ई-टेंडरिंग, जैसे कई घोटाले सामने आए थे, इन पर पर्दा डाल दिया गया। लेकिन अब कांग्रेस सरकार सभी घोटालों की फाइलें दोबारा खुलवाने जा रही है। माखनलाल यूनिवर्सिटी में गड़बड़ी, फर्जी वेबसाइट्स, सांसद निधि, जनजातीय कार्य विभाग, वन्या प्रकाशन सहित अन्य योजनाओं में घपलों के दस्तावेजों को भी खंगाला जा रहा है।

क्या है घोटाला

ई-टेंडर घोटाला करीब तीन हजार करोड़ का है। इसमें पीएचई, पीडब्ल्यूडी में टेंडर खऱीदने में गड़बड़़ी की गई। कहने को तो टेंडर कि यह प्रक्रिया ऑनलाइन थी लेकिन इसमें बोली लगाने वाली कंपनियों को पहले ही सबसे कम बोली का पता चल जाता था।

ऐसे हुआ था खुलासा

ई-टेंडरिंग में बड़े पैमाने पर घोटाले का खुलासा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) में हुआ था। यहां ई-प्रोक्योंरमेंट पोर्टल में टेम्परिंग कर करोड़ों रुपए मूल्य के 3 टेंडरों के रेट बदल दिए गए थे। यानी ई-पोर्टल में टेंपरिंग से दरें संशोधित कर टेंडर प्रक्रिया में बाहर होने वाली कंपनियों को टेंडर दिलवा दिया गया। इसकी भनक लगते ही तीनों टेंडर निरस्त कर दिए। 

इसी तरह अलग-अलग विभागों के 1500 करोड़ रुपए से ज्यादा के टेंडरों में गड़बड़ी पकड़ी गई थी। जो विभाग निशाने पर रहे वे थे - लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, जल निगम, महिला बाल विकास, लोक निर्माण, नगरीय विकास एवं आवास विभाग, मध्य प्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (एमपीआरडीसी), नर्मदा घाटी विकास जल संसाधन।

2014 से ई-टेंडरिंग

राज्य सरकार ने अलग-अलग विभागों के ठेकों में भ्रष्टाचार खत्म करने के लिए 2014 में ई-टेंडर की व्यवस्था लागू की थी, जिसके लिए बेंगलुरू की निजी कंपनी से ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल बनवाया गया। तब से मध्यप्रदेश में हर विभाग इसके माध्यम से ई-टेंडर करता है। इसके बाद तकरीबन तीन लाख करोड़ रुपये के टेंडर दिए जा चुके हैं। इसमें कब से घोटाला हो रहा था, घोटालेबाज ही जानें।

घोटाले का पर्दाफाश करने वाले अफसर का तबादला

23 जून 2018 को राजगढ़ के बांध से हज़ार गांवों में पेयजल सप्लाई करने की योजना का शिलान्यास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था, लेकिन उससे पहले यह बात पकड़ में आई कि ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल में छेड़छाड़ करके लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी यानी पीएचई विभाग के 3000 करोड़ रुपये के तीन टेंडरों के रेट बदले गए हैं। 

मामला सामने आते ही, मध्यप्रदेश स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के उस वक्त के एमडी मनीष रस्तोगी ने पीएचई के प्रमुख सचिव प्रमोद अग्रवाल को खत लिखा और तीनों टेंडर कैंसिल कर दिए गए। 

अब 2014 से अब तक करीब तीन लाख करोड़ रुपये के ई-टेंडर संदेह के दायरे में आ गए हैं। उन्होंने विभागीय जांच की और राजगढ़ और सतना जिलों की ग्रामीण जल आपूर्ति योजनाओं के टेंडर रद्द कर दिए। इसके बाद शिवराज सरकार ने उनका तबादला कर दिया था।

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