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कांंग्रेस जीती तो सुप्रीम कोर्ट बनेगा संविधान पीठ : शानदार वादे ने जगायी न्यायिक सुधारों की आस

जेपी सिंह | अप्रैल 10, 2019

कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र में महत्वपूर्ण न्यायिक सुधारों का प्रस्ताव किया है। कांग्रेस ने कहा है कि संविधान की व्याख्या करने तथा राष्ट्रीय तथा कानूनी महत्व के अन्य मामलों की सुनवाई करने के लिए उच्चतम न्यायालय को संवैधानिक न्यायालय बनाने के लिए संविधान संशोधन किया जायेगा और बहुत समय से चली आ रही मांग के अनुरूप कोर्ट ऑफ़ अपील्स का गठन किया जायेगा। कांग्रेस ने न्यायिक सुधार का दूरगामी प्रभाव वाला एजेंडा सेट कर दिया है।

कांग्रेस ने कहा है कि उच्च न्यायालयों और आदेशों की अपील सुनने के लिए छह अलगअलग स्थानों मे उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय के बीच, कोर्ट ऑफ अपील की स्थापना करने के लिए संविधान में संशोधन किया जायेगा। कोर्ट ऑफ अपील में 3 न्यायाधीशों की अनेक पीठें अपील का निपटारा किया करेंगी।

यही नहीं कांग्रेस ने वादा किया है कि न्यायपालिका के लिए आवश्यक बुनियादी ढ़ांचा प्रदान करने के लिए प्रतिवर्ष पर्याप्त धन आंवटित करेगी। वर्तमान में, न्यायपालिका के लिए बजट का आवंटन गंभीर चिंता का विषय है। 2017 के लिए वित्तीय बजट ने न्यायपालिका के लिए 1,174.13 करोड़ रुपये का प्रावधान था। यह कुल बजट का मात्र 0.4 प्रतिशत था। कांग्रेस ने घोषणापत्र में कहा है कि वह न्यायपालिका के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा प्रदान करने के लिए प्रतिवर्ष पर्याप्त धन आवंटित करेगी।

कांग्रेस ने कहा है कि हम महिलाओं, एस.सी.-एस.टी., ओ.बी.सी., अल्पसंख्यकां तथा समाज के अन्य वर्गां जिनका न्यायपालिका में प्रतिनिधित्व कम है, के प्रतिनिधित्व को सभी स्तरों में बढ़ाने का वायदा करते हैं। कांग्रेस उच्च न्यायालयों और उच्चतम् न्यायलयों के न्यायाधीशों की सेवानिवृति आयु को 65 वर्ष करने का वादा करती है। विभिन्न आयोगों ओर न्यायाधिकरणों में न्यायिक सदस्यों की सेवानिवृति की आयु भी 65 वर्ष ही होगी। इससे जहाँ एक तरफ न्यायाधीशों को सेवानिवृति के पश्चात काम करने से रोका जायेगा, वहीं दूसरी तरफ योग्य व्यक्तियों को न्यायाधीश न्यायिक सदस्य के रूप में सेवा करने का और अधिक अवसर मिलेगा।

कांग्रेस न्यायपालिका के सहयोग से न्यायाधीशों के प्रशासन में सुधार तथा रोस्टर प्रबंधन के लिए तकनीक के साथ-साथ पेशेवरों की नियुक्ति करगी। कांग्रेस मुकदमों पर नजर रखने और मामलों की सुनवाई तथा निर्णयों में तेजी लाने के लिए न्यायपालिका के हर स्तर पर तकनीकी उपकरणों के इस्तेमाल को प्रोत्साहित करेगी।

कांग्रेस ने कहा है कि विद्वानों, ईमानदार एवं स्वतंत्र न्यायधीश न्यायपालिका की आत्मा हैं। कांग्रेस राष्ट्रीय न्यायायिक आयोग (एन.जे.सी.) को स्थापित करने का वायदा करती है। एन.जे.सी. में न्यायधीश, न्यायविद्ध और सांसद सदस्य के तौर पर होगे तथा इनकी सदस्यता के लिए एक पूर्णकालिक सचिवालय होगा। राष्ट्रीय न्यायायिक आयोग का कार्य उच्च और उच्चतम न्यायालयों में न्यायाधीशों नियुक्ति करना है। सभी उम्मीवारों के नाम तथा चयन की प्रक्रिया तथा चयन के कारण को सार्वजनिक पटल पर रखा जायेगा ताकि चयन की प्रक्रिया में पारदर्शिता बरकरार रहे। 

इस व्यवस्था के बनने के दो महीने पश्चात उच्च एवं उच्चतम् न्यायलयों से रिक्त पद भरने के प्रयास किये जायेंगे। कांग्रेस कानून बनाकर एक स्वतंत्र न्यायिक शिकायत आयोग की स्थापना करेगी जो यायाधीशों के खिलाफ कदाचार की शिकायते देकर उपयुक्त कार्यवाही के लिए संसद को परामर्श देंगे।

कानून नियम और विनियमो की समीक्षा

कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र में कहा है कि नागरिक स्वतंत्रता हमारेलोकतांत्रिक गणंराज्य की प्रमुख पहचान है। कानूनों का उद्देश्य स्वतंत्रता को मजबूती देना है, कानून सिर्फ और सिर्फ हमार संवैधानिक मुल्यों को दर्शाने के लिए होने चाहिए। कांग्रेस का मानना है कि हम एक अति विधायी और अतिविनियमित देश बन गये है, कई कानूनों नियमों और अधिनियमों ने नागरिक स्वतंत्रता को प्रतिबंधित कर दिया है। नतीजतन नवाचार, जिसकी वजह से उद्यमशीलता में नये प्रयोगों औद्योगिकी के नये प्रयासों पर एक तरह के प्रतिबंध लग गये हैं, जिसका सीधा असर हमारी अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है।

कांग्रेस सभी नियमों, विनियमों और कानून की व्यापक समीक्षा करगी और आज के संदर्भों के हिसाब से पुराने और बेकार हो चुके कानूनों को खत्म करगी, जो बेवजह नागरिकों की स्वतंत्रता पर अड़चन डालतें हैं।उन सभी साधनों और प्रक्रिया में संशोधन करके उन्हें संवैधानिक मुल्यों के अनुरूप बनायेंगे। नागरिकों द्वारा रोजमर्रा के जीवन में पालन किये जाने वालेनियमों, कानूनों और विनियमों की संख्या को कम करेगी।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार और कानूनी मामलों के जानकार हैं)

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