Satya Darshan

पुलिस बना फेसबुक, वेरिफिकेशन को घर घर पंहुच मांग रहा आधार कार्ड और अन्य डीटेल्स

अप्रैल 8, 2019

सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म Facebook (फेसबुक) भारत में यूजर्स का वेरिफिकेशन करा रहा है। लोकसभा चुनावों को देखते हुए मार्क जकरबर्ग के मालिकाना हक वाली सोशल मीडिया कंपनी अपने प्लैटफॉर्म्स पर ट्रोल्स को रोकने के लिए भारत में यूजर वेरिफिकेशन के अलग-अलग तरीके अपना रही है। फेसबुक ने भारत में हाल में यूजर वेरिफिकेशन का जो तरीका अपनाया, वह इससे पहले किसी दूसरे देश में देखने को नहीं मिला था।

भारतीय यूजर के घर फेसबुक ने भेजा रिप्रेजेंटेटिव

बताया जा रहा है कि फेसबुक ने एक भारतीय यूजर के घर अपने एक रिप्रेजेंटेटिव को भेजकर यह वेरिफाइ करने की कोशिश की है कि उनके अकाउंट से किया गया पोस्ट उसी के द्वारा लिखा गया है या नहीं। नई दिल्ली के एक यूजर द्वारा लिखे गए पोस्ट में कुछ पॉलिटिकल कॉन्टेंट मौजूद थे। यूजर ने बताया कि उन्हें यह देखकर काफी हैरानी हुई कि फेसबुक द्वारा भेजा गया एक व्यक्ति उनके दरवाजे पर आकर ना सिर्फ उनका आधार कार्ड मांग रहा है कि बल्कि उनकी आइडेंटिटी से जुड़े और डॉक्युमेंट्स को चेक करने की बात कह रहा है।

फेसबुक की हरकत, यूजर्स की प्रिवेसी का उल्लंघन

इनफर्मेशन टेक्नॉलजी ऐक्ट, 2000 के आधार पर लीगल एक्सपर्ट्स का कहना है कि फेसबुक की यह हरकत सीधे तौर पर यूजर्स की प्रिवेसी का उल्लंघन है। इस प्रकार का वेरिफिकेशन कराना केवल सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है। फेसबुक ज्यादा से ज्यादा यूजर का पेज या ग्रुप डिस्कंटिन्यू करने के अलावा वह यूजर द्वारा किए गए पोस्ट को डिलीट कर सकता है। अगर इसके बाद भी फेसबुक को लगता है कि यूजर्स के पोस्ट के लिए सजा कम है, तो वह उस यूजर को अपने प्लैटफॉर्म से हटा सकता है। फेसबुक ऐसा पहले कर भी चुका है।

फेसबुक पर हो सकता है कोर्ट की अवमानना का केस

इतना ही नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल सितंबर में साफ कर दिया था कि प्राइवेट सेक्टर की कंपनियों को आधार डीटेल्स को चेक करने का कोई अधिकार नहीं है। इसके बाद से फेसबुक द्वारा किए गए इस वेरिफिकेशन को भारतीय कानून का उल्लंघन भी माना जा रहा है और इसके लिए फेसबुक पर कोर्ट की अवमानना का भी केस हो सकता है। बता दें कि कंपनी फिजिकल वेरिफिकेशन केवल ऐडवर्टाइजर के अड्रेस का करा सकती है जिसने फेसबुक पर किसी पॉलिटिकल ऐड को पोस्ट किया है।

सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म जैसे ट्विटर और फेसबुक पर ट्रोलिंग को रोकने के लिए केंद्र सभी यूजर्स के लिए मोबाइल नंबर या किसी अन्य आइडेंटिटी प्रूफ को सोशल मीडिया अकाउंट से लिंक करना अनिवार्य करने के बारे में सोच रही है। सरकार का मानना है कि ऐसा करने से ट्रोलिंग और फेक न्यूज पर लगाम कसी जा सकेगी। यूजर्स की प्रिवेसी को मेनटेन रखने के लिए सभी डेटा को कंपनियों को अपने पास सुरक्षित रखना होगा और यह केवल साइबर क्राइम और हैरसमेंट की स्थिति में सरकारी जांच एजेंसियों के साथ शेयर की जाएंगी।

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