Satya Darshan

देश मे गढ़ी जा रही राष्ट्रवाद की नयी परिभाषा, लोगों से भेदभाव करने वालो को बताया जा रहा देशभक्त

नयी दिल्ली | अप्रैल 6, 2019

सोनिया गांधी ने कहा कि मोदी सरकार में देशभक्ति की परिभाषा बदल गई है। लोगों से जाति, धर्म और विचारधारा के आधार पर भेदभाव किया जा रहा है और उसे उचित भी ठहराया जा रहा है। मोदी-सरकार असहमति का सम्मान करने को बिल्कुल राजी नहीं है।

यूपीए की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने आज दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में 'पीपुल्स एजेंडा जन सरोकार-2019' कार्यक्रम शामिल हुईं। सोनिया गांधी ने इस कार्यक्रम को संबोधित करत हुए पीएम मोदी और उनके सरकार की नीतियों पर जमकर बरसीं। उन्होंने मोदी सरकार पर जाति, धर्म और विचारधारा के आधार पर नागरिकों के साथ भेदभाव करने के आरोप लगाए। सोनिया गांधी ने कहा कि पिछले कुछ वक्त से हमारी देश की मूल आत्मा को एक सोची समझी साजिश के तहत जिस तरह कुचला जा रहा है, वह हम सभी के लिए बेहद चिंताजनक है।

सोनिया गांधी ने कहा कि मोदी सरकार संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर कर रही है। उन्होंने कहा कि जिन संस्थाओं ने हमें बुलंदियों तक पहुंचाया, उन्हें खत्म करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि कई संस्थाओं को तो जानबूझकर करीब-करीब खत्म कर दिया गया है। सोनिया गांधी ने आगे कहा कि जनकल्याण के बुनियादी ढांचे और सर्व समावेशी ताने-बाने को 65 साल की कड़ी मेहनत से तैया गया था, लेकिन मोदी सरकार इसे पूरी तरह से नष्ट में लगी हुई है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार में देशभक्ति की परिभाषा बदल गई है। लोगों से जाति, धर्म और विचारधारा के आधार पर भेदभाव किया जा रहा है और उसे उचित भी ठहराया जा रहा है।

सोनिया गांधी ने कहा, “हमसे उम्मीद की जा रही है कि खान-पान, पहनावे, भाषा और अभिव्यक्ति की आज़ादी के मामले में कुछ लोगों की मन-मानी हम बर्दाश्त करें। मोदी-सरकार असहमति का सम्मान करने को बिल्कुल राजी नहीं है। जब अपनी आस्थाओं पर टिके रहने की वजह से, लोगों पर हमले होते हैं, तो सरकार अपना मुंह फेर लेती है। कानून का राज लागू करने का अपना बुनियादी फर्ज पूरा करने को यह सरकार तैयार नहीं है। मौजूदा सरकार, करोड़ों देशवासियों से तो उनकी ज़िंदगी बेहतर बनाने की संभावनाएं छीन रही है और ऐसी नीतियां बनाने में लगी है जिनसे उसके चहेते उद्योगपति और बड़े कारोबारी फलते-फूलते जाएं।“

सोनिया गांधी ने कहा, हमें पूरी हिम्मत के साथ इसका विरोध करना होगा। भारत को एक ऐसी सरकार की ज़रूरत है जो देश के सभी नागरिकों के प्रति उत्तरदायी हो। जो अपने संकल्पों के प्रति गंभीर और अपने काम-काज में निष्पक्ष हो। हमें अपने संविधान की समावेशी, Secular और उदार भावना को फिर से बहाल करना है। संविधान में, जिस बुनियादी स्वतंत्रता और अधिकारों की गारंटी है उन्हें फिर से स्थापित करना होगा। एक-एक व्यक्ति की सुरक्षा और गरिमा फिर से सुनिश्चित करनी होगी। हमें उन संवैधानिक मूल्यों को फिर से कायम करना होगा जो हर देशवासी को अपनी राय रखने की आजादी देते हैं, हर भारतीय को बराबरी का हक देते हैं और संसाधनों पर सभी को समान अधिकार देते हैं। आज हम किसी को यह हक छीनने की इजाजत नहीं दे सकते हैं। मैं यहां कंधे-से-कंधा मिलाकर आपके साथ इसलिए खड़ी हूं कि हम सबके मन में भारत की एक जैसी सोच है। मैं यहां इसलिए आई हूं कि हमारे-आपके बीच एक ख़ास रिश्ता है।“

उन्होंने आगे कहा, “आज के इस महत्वपूर्ण अवसर पर मुझे पंडित जवाहरलाल नेहरू की कही वह बात याद आती है, जिसमें उन्होंने यह भावना व्यक्त की थी, कि भविष्य का निर्माण करते हुए सुविधा या आराम के लिए कोई जगह नहीं होती है, बल्कि अपने संकल्पों को पूरा करने के लिए, बिना थके मेहनत करनी होती है। इसलिए मैं आपसे कहती हूं कि आज जिस संकल्प को अपने मन में लेकर हम यहां इकट्ठा हैं, उसे सचाई में तब्दील करने के लिए हमें भी संघर्ष में पीछे नहीं रहना है।“

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