Satya Darshan

थिरुनेल्ली मंदिर और पापनाशनी नदी से है राहुल का गहरा नाता

🔅28 साल बाद एक बार फिर पापनाशिनी नदी और थिरुनेल्ली मंदिर के शहर वायनाड पहुंचे राहुल.
🔅राहुल गांधी ने जिस वायनाड से नामांकन दाखिल किया है, उस शहर से उनका संवेदनात्मक रिश्ता है.
नई दिल्ली (एसडी)

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को केरल के वायनाड से पर्चा भरा. जब राहुल जिला निर्वाचन अधिकारी को अपना नामांकन को सौंप रहे थे, उस वक्त उनके चेहरे पर एक गंभीर मुस्कान तो थी, साथ ही वायनाड के साथ उनके परिवार के रिश्ते की विरासत को सहेजने का भाव भी झलक रहा था. 

नामांकन फॉर्म जमा करने के बाद उन्होंने रोड शो भी किया. रोड शो में उनकी बहन और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा भी शामिल हुईं. प्रियंका ने कहा कि ”मेरी नजर में राहुल सबसे साहसी हैं”. दरअसल वायनाड से गांधी परिवार का राजनीतिक ही नहीं, भावनात्क संबंध भी है. इस जगह पर राहुल के पिता पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी की अस्थियों को विसर्जित किया गया था.

गौरतलब है कि राजीव गांधी की 1991 में हत्या कर दी गई थी. उनकी हत्या के बाद केरल के पूर्व मुख्यमंत्री के. करुणाकरन ने वायनाड के ‘पापनाशिनी’ नदी में राजीव गांधी की अस्थियों को विसर्जित किया था. खास बात यह है कि उस वक्त अपने पिता की अस्थियों का विसर्जन करने राहुल खुद वायनाड ‘पापनाशिनी’ नदी आए थे. वे पूर्व रक्षा मंत्री एके एंटनी के साथ वायनाड पहुंचे थे.

अस्थियों के विसर्जन से पूर्व मंदिर गए थे

थिरुनेल्ली मंदिर में पूजा की थी राहुल ने

(बताया जाता है पिता राजीव गांधी की अस्थियों के विसर्जन से पूर्व राहुल ने इसी थिरुनेल्ली मंदिर में पूजा की थी)

पिता की अस्थियों को पापनाशिनी नदी में विसर्जित करने से पूर्व राहुल ने थिरुनेल्ली मंदिर में पूरे विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की. इसके बाद वे करुणाकरन के साथ नदी किनारे पहुंचे.

थिरुनेली देश का मंदिर एक अत्यंत प्राचीन मंदिर है. यह केरल राज्य की सीमा के पास, केरल में ब्रह्मगिरि पहाड़ी के किनारे भगवान विष्णु को समर्पित है, मंदिर चारो ओर से पहाड़ से घिरा है, सुंदर वन और घाटियां इसकी सुंदरता को और भी बढ़ाते हैं. यह समुद्र तल से लगभग 900 मीटर की ऊँचाई पर है. इसमें देश ही नहीं दुनिया के कोने-कोने से श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचते हैं.

तभी से कांग्रेस यहां मजबूत हुई…

राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक 1991 में कांग्रेसी नेता के. करुणाकरन ने राजीव गांधी की अस्थियों के जरिए केरल में कांग्रेस के जनाधार को मजबूत किया. इसका पॉलिटिकल माइलेज भी मिला और 1991 के लोकसभा और विधानसभा चुनाव में कम्यूनिस्ट पार्टियों के नेतृत्व वाले एलडीएफ का प्रदेश से पूरी तरह सफाया हो गया. इसके बाद से केरल में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ की वापसी हुई.

View More

Search

Search by Date

जनमत

वाराणसी से पीएम मोदी लोस चुनाव 2019 जीतेंगे?

Navigation

Follow us

Mailing list

Copyright 2018. All right reserved