Satya Darshan

वाराणसी के किसान हुए छुट्टा पशुओं के आतंक से हलकान, कहा आत्महत्या पर मजबूर न करे सरकार

चोलापुर.वाराणसी | अप्रैल 2, 2019

क्षेत्र के ग्रामीण इलाके मे छुट्टा पशुओ के आतंक से किसान परेशान है अपनी फ़सल को बचाने को लेकर दिन भर अपने खेतो कि रखवाली करते है और रात्रि जागरण भी करते है उसके बाद भी तैयार गेहूं कि फ़सल को छुट्टा पशु खा तो रहे ही फसलों को रौद भी दे रहे है सब्जिओ को तो पूछने कि हाल ही नहीं लागत निकलना मुश्किल हो गया है। 

फसलों के लिए किसी बीमारी या आपदा से कम नहीं इन  छुट्टा पशुओ  से आहत  क्षेत्र के किसान अजय कुमार के अनुसार खरीफ कि फ़सल को छुट्टा पशु चट कर गये अब रबी कि फ़सल कि बारी अब कैसे अगली फ़सल कि हो पायेगी बुआई?

क्षेत्र के किसान शिवशंकर, जटाशंकर, फौजदार, सूबेदार, सोनू, इंद्रजीत, पवन,पप्पू, गुड्डू आदि किसान सरकार का ध्यानाकर्षण कराकर इस समस्या से निजात पाना चाहते है।

इन लोगो का कहना है कि लागत निकलना तो दूर अब अपने खाने के लिए अन्न व हरि सब्जिया पैदा करना दिन मे तारे दिखाई पड़ना चरितार्थ हो गया है।

किसानों के क्षोभ और आक्रोश का आलम यह है कि अगर ऐसे ही छुट्टा पशुओ कि संख्या बढ़ती गयी तो वह दिन दूर नहीं कि किसान खेती बंद कर आत्म हत्या करना न शुरू कर दे। क्षेत्र के किसानो ने बेहद हताशा और निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि जब पीएम के संसदीय क्षेत्र का यह हाल है तो देशभर के किसानों की क्या दशा होगी? मोदी जी और योगी जी आप लोग बतायें क्या इन परिस्थितियों को अब हम अपनी नियति मान लें?

किसानो व ग्रामीणों के अनुसार पहले नील गाय व घडरोज से वैसे ही परेशान थे तब तक इन छुट्टा पशु तो आग मे घी का काम कर रहे है जिससे किसान आजीज व तंग आ चुके है अब इनके समझ मे नहीं आ रहा है आखिर करें तो क्या करें?

इन दुष्कर हालात का जल्द निराकरण न हुआ तो वह दिन दूर नहीं कि ये ही आवारा पशु कहीं बीजेपी के चुनावी खेत न चर जायें। वैसे भी गांवो और किसानों के मध्य भाजपा की छवि कुछ बेहतर नहीं है।

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