Satya Darshan

पीएम मोदी से काशी के पत्रकार के चंद सवाल एवं विनम्र निवेदन

काशी सांसद एवं पीएम मोदी जी,

बेहद लोकप्रिय और काशी के सांसद व दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश भारत के प्रधानमंत्री मोदी जी आपसे विन्रम निवेदन कि विश्व की प्रथम नगरीय संस्कृति और महादेव की भांति अजन्मी काशी जिसे वाराणसी के नाम से भी जाना जाता है आज वह क्योटो मे तब्दील की जा रही है। आप निस्संदेह बेहद शक्तिशाली हैं और किसी भी शहर के नक्शे को चुटकियों मे बदल सकते है।

वहीं कुछ सवाल जो मेरे जेहन में उमड़ रहे है उसे मै आपसे शेयर करने से खुद को रोक नहीं पा रहा हूं। पूरे सम्मान और एक बेहद आम जीवित इंसान व अदना से पत्रकार की हैसियत से आपसे पूछने की थोड़ी बहुत हिम्मत जुटा पाया हूं आशा है आप मुझे माफ कर देगें।

सवाल यह कि जब पतित पावनी मॉ गंगा की तट पर साधु संतों की टोली और बनारसीपन के साथ सूर्य की पहली किरणें पानी से होकर  अपनी अदभुत छटा के साथ जीवन के सुख आनंद का पल जिसमें मानव भाव विभोर होकर काशी का जीना जीवन का सफल होना मानता है उसकी धड़कन और काशी के गरिमामयी इतिहास को आघात कर बदलाव लाना काशी वासियों और कण कण में विराजमान बाबा भोले का अपमान नहीं ?

गलियो का शहर बनारस जिसकी अखंडता और एकता दुनिया के लिए मिसाल है, मूलभूत आवश्यकता जिनकी जरूरत मानव के लिए जूझती जिंदगी को सहूलियत से जीना आसान होता उसमें कितना बदलाव आया?

रोटी कपडा और मकान के साथ स्कूल कॉलेज अस्पताल  और सड़के यदि जरूरत के मुताबिक उपलब्ध हो तो सफल जीवन यापन हो सकता है! बढ़ती जनसंख्या के मुताबिक प्रति व्यक्ति संसाधन नाम मात्र का है क्या इन सभी जिम्मेदार संसाधनों के संख्या में इजाफा नही होना चाहिए था ?

माननीय सांसद व प्रधानमंत्री जी वरूणा व अस्सी जिसके मिलने से वाराणसी बना आज वो अपने अस्तित्व को रो रही है, आपके द्वारा दिए गए मां गंगा की स्वच्छता के लिए चलाए गए अभियान का क्या हुआ? क्या इसकी निगरानी पर आपकी एक नजर होना जरूरी नहीं है?  

बेशक आप बेहतर और सुनहरे भविष्य हेतु हम देशवासियों के लिए अठ्ठारह अठ्ठारह घंटे खट रहे हैं लेकिन आपके द्वारा किए असंख्य वादो मे से कुछ मौलिक व मूलभूत से जुड़े चंद वादे काशी वासियों को आज भी भलीभांति याद है हांलाकि आपके वर्तमान कार्यकाल के चंद माह ही शेष हैं फिर भी काशी वासी अभी भी आशान्वित है कि काश मां गंगा स्वच्छ और सुंदर हो पाएं!

माननीय सांसद जी काशी में पेयजल समस्या धीरे धीरे कर विकराल रूप लेती जा रही है लेगी, जिसका अबतक कोई स्थायी समाधान नहीं हो पाया है !

सबसे बड़ा आघात पत्रकारिता पर किया जा रहा है काशी के एक विद्वान ने कहा था कि,

"अखबारों की पन्ने में वृद्धि तो हो रही है लेकिन पत्रकारिता की साख गिर रही है जिसको बचाने के लिए कोई भी सुलभ और सामाजिक बदलाव की गति में प्रयास नहीं किया जा रहा है, यदि समाज की गतिविधियों का दर्पण ही धुंधला हो जाएगा तो किसी चेहरे का सच दर्पण में कैसे दिखेगा"?

मोदी जी हमारी काशी के सांसद के नाते आप से साग्रह है कि चौथा स्तंभ अपना वजूद खोता जा रहा है यहां तक कि पत्रकारिता कभी निष्पक्ष सजग प्रहरी का पर्याय थी आज उसका सम्मानजनक अस्तित्व अपनी आखिरी सांसे ले रहा है।

क्या इन विकट परिस्थितियों के जिम्मेदार तत्वों से रक्षा करना आपका नैतिक कर्तव्य नहीं ?  

आपसे करबद्ध है कि इस संदर्भ में आप जरूर कोई ना कोई पहल करें नहीं तो जब पत्रकार भी असहाय और लाचार होगा तो उसकी पत्रकारिता बहुत ही सस्ती और बिकाऊ होगी जो चंद सिक्कों की खनक से अपना वजूद खो देगी !!

काशी की पुरानी संस्कृति जिसमें गायकी की और वादन के क्षेत्र में देश का इतिहास बनने का कार्य किया वह भी कहीं न कहीं संसाधनों की कमी के कारण लुप्त होती नजर आ रही है !

सवाल तो बहुत हैं मेरे मन मस्तिष्क में प्रिय व जनप्रिय सांसद महोदय लेकिन आज मैं बतौर पत्रकार कृष्णा पंडित इन्हीं सवालों के साथ आपसे आग्रह और विनम्र निवेदन करता हूं कि इन विषयों पर आप जरूर एक बार सोचें और जनहित में सुलभ संसाधन हेतु पहल करें !!

आपका आभारी

कृष्णा पंडित

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