Satya Darshan

बड़ी संख्या में ब्राह्मण उम्मीदवारों को दरकिनार कर भाजपा ने अपने ब्राह्मण विरोधी होने का सबूत पेश किया

मार्च 29, 2019

लोकसभा चुनाव का दौर चल रहा है और ऐसे में तमाम पार्टियों अपने प्रत्याशियों को किसी भी तरह जिताने में तल्लीन है लेकिन ऐसे में जातिगत विश्लेषण करने पर यह पता चलता है भारतीय जनता पार्टी ने ब्राह्मण उम्मीदवारों को दरकिनार किया है। 

ऐसे में ब्राह्मण समुदायों को इस बात का आभास होने लगा है कि भारतीय जनता पार्टी के केंद्र में अब ब्राह्मणों का कोई खास जनाधार नहीं रह गया है। भारतीय जनता पार्टी ने सीट समझौते के नाम पर या एंटी इन्कंबैंसी के नाम पर जिन सांसदों की टिकट काटी है उनका जातिवार विश्लेषण बहुत दिलचस्प है। यह हैरान करने वाला है कि ऐसे नेताओं में ज्यादातर ब्राह्मण हैं। 

बिहार से लेकर झारखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और कर्नाटक तक भाजपा के ऐसे ब्राह्मण नेताओं की लंबी सूची है, जिनकी टिकट इस बार भाजपा ने काट दी। इसमें कुछ बहुत पुराने और मंजे हुए नेता हैं तो कुछ साधारण बैकग्राउंड के भी ब्राह्मण नेता हैं, जिनको टिकट नही दी गई है।

बिहार में भाजपा ने जदयू से समझौता किया तो वाल्मिकीनगर की अपनी जीती हुई सीट उसके लिए छोड़ी, जहां से सतीश दूबे सांसद थे। भाजपा ने औरंगाबाद की सीट भी जदयू के लिए छोड़ी थी पर दिल्ली के मजबूत ठाकुर नेताओं के दबाव में वह सीट फिर भाजपा ने ले ली, जहां से सुशील कुमार सिंह चुनाव लड़ रहे हैं।

इसी तरह झारखंड में भाजपा ने पहली बार ऑल झारखंड स्टूडेंट यूनियन यानी आजसू के लिए लोकसभा की सीट छोड़ तो उसके लिए गिरिडीह सीट को चुना गया, जहां से रविंद्र पांडेय पांच बार से चुनाव जीत रहे थे। यह भी तथ्य है कि आजसू की पहली पसंद हजारीबाग सीट थी, जहां से जयंत सिन्हा सांसद हैं, जिनके पिता यशवंत सिन्हा लगातार भाजपा नेतृत्व की आलोचना करते रहे हैं।

ऐसे ही उम्र के आधार पर जिन नेताओं की टिकट काटी गई उनमें शांता कुमार, मुरली मनोहर जोशी, कलराज मिश्र और भुवन चंद्र खंडूरी भी हैं। ये चारों बड़े ब्राह्मण नेता हैं। इनके परिवार से भी किसी को टिकट नहीं दी गई। हालांकि हुकुमदेव नारायण यादव की टिकट कटी तो उनकी जगह से उनके बेटे अशोक यादव को टिकट दे दी गई।

इसी तरह बेंगलुरू दक्षिण से सांसद रहे दिवंगत अनंत कुमार की पत्नी तेजस्विनी अनंत कुमार को भी टिकट नहीं मिली है। वे दक्षिण भारत में भाजपा की राजनीति का सबसे बड़ा ब्राह्मण चेहरा थे। मध्य प्रदेश से कई बार लोकसभा सांसद रहे और अटल बिहारी वाजपेयी के भांजे अनूप मिश्र की भी टिकट इस बार भाजपा ने काट दी है। इंदौर से आठ बार सांसद रहीं सुमित्रा महाजन की टिकट भी खतरे में है।

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