Satya Darshan

ग्रामीण डाक जीवन बीमा दिवस : 24 मार्च, एक संक्षिप्त परिचय

मार्च 24, 2019

हमारे देश की सबसे पुरानी लाइफ इंशोरेंस सेवा है जिसको सन् 1884 में शुरू किया गया था, जब हमारे देश पर ब्रिटिश आधिपत्‍य था। उस समय की तत्‍कालीन रानी, रानी विक्‍टोरिया ने 1 फरवरी 1884 में डाक जीवन बीमा की शुरुआत की। आरंभिक दिनों में अधिकतम बीमा राशि 4000 रूपये था, लेकिन वर्तमान समय में यह राशि बढ़कर 50 लाख रूपये हो गया है। 

डाक जीवन बीमा बहुत ही सुविधाजनक और काफी कम प्रिमियम में ज्‍यादा लाभ प्रदान करने वाली बीमा पालिसी है। इसको शुरू करने का मुख्‍य उद्देश्‍य यही था कि लोगों को ज्‍यादा से ज्‍यादा लाभ प्रदान किया जा सके जिससे वे अपने भविष्‍य की चिंता को छोड़ वर्तमान में अपने जीवन को खुलकर जी सके। यह पालिसी भारत सरकार द्वारा प्रदान की जाती है जिसमें एक बहुत ही बड़े स्‍तर पर कर्मचारियों को जीवन बीमा प्रदान किया जाता है। 

डाक विभाग पत्रों के वितरण के साथ-साथ जीवन बीमा के क्षेत्र में भी एक लम्बे समय से कार्यरत है। डाक विभाग अपने विस्तृत नेटवर्क के माध्यम से सुदूर क्षेत्र में रह रहे लोगों को भी बीमित करने के लिए कृत संकल्पित है। ग्रामीण लोगों की जरूरतों के अनुसार 24 मार्च 1995 को ‘ग्रामीण डाक जीवन बीमा’ आरम्भ किया गया।

ग्रामीण डाक जीवन बीमा

ग्रामीण डाक जीवन बीमा की शुरुआत बीमा क्षेत्र में सुधार के लिये सरकार द्वारा सन 1993 में एक कमेटी मल्होत्रा समिति का गठन किया गया। उस समिति ने पाया की बीमा क्षेत्र का घरेलु बचत में केवल 10% ही योगदान हैं और आज़ादी के लगभग 50 वर्ष बाद भी देश की 78% जनसंख्या बीमा से वंचित था। यह प्रतिशत शहरों के मुकाबले गावो में और अधिक था इस को देखते हुए सरकार ने 24/03/1995 को ग्रामीण डाक जीवन बीमा की शुरुआत ग्रामीण क्षेत्र के डाकघरों से की गयी।

सरकार ने भले ही ग्रामीण डाक जीवन बीमा की शुरुआत कर एक मील पत्थर रख दिया हो मगर 24 वर्ष बाद भी ग्रामीण डाक जीवन बीमा लोकप्रिय नहीं पाया क्योंकि आज भी गाव में लोगों को इस बारे में पता नहीं है। लोकप्रिय क्यों नहीं हुई इस के गर्त में कई सवाल हों सकते है मगर वो आम जन आज भी महरूम है, उस फायदे के लिये जो भारत के किसी भी बीमा उत्पाद से सबसे कम प्रीमियम के साथ सबसे अधिक बोनस देता है।

क्या है ग्रामीण डाक जीवन बीमा

ग्रामीण डाक जीवन बीमा एक सामान्य मुत्यु होने की दशा में एक परिवार सहायता प्रदान करता है अर्थात ग्रामीण डाक जीवन बीमा एक तरह से आप के जिन्दगी गारंटी लेता है और आप द्वारा लिया गये बीमाधन के साथ आप बोनस भी देता है।

ग्रामीण डाक जीवन बीमा के प्रकार
   

 1. सम्पूर्ण जीवन बीमा योजना ( ग्राम सुरक्षा )
   
 2. मियादी बीमा योजना ( ग्राम संतोष )
   
 3. परिवर्तनीय सम्पूर्ण जीवन बीमा योजना ( ग्राम सुविधा )
   
 4. प्रत्याशित मियादी बीमा योजना ( ग्राम सुमंगल )
   
 5. ग्राम प्रिया
    
6. बाल बीमा योजना

क्यों बेहतर है डाक जीवन बीमा

ग्रामीण डाक जीवन बीमा बाज़ार में उपलब्ध बीमा में सबसे कम प्रीमियम और सबसे अधिक बोनस देता है।

ग्रामीण डाक जीवन बीमा में मुत्यु होने पर मुत्युदावा में बीमाधन के साथ बोनस का भुगतान किया जाता मगर अन्य बीमा उत्पादों में ऐसा नहीं होता है।

अपने नजदीक के भारत में फैले बड़े नेटवर्क डाकघर में प्रीमियम भरने की सुविधा देता है।

देय प्रीमियम पर आयकर अधिनियम के सेक्शन 88 के तहत आयकर छुट योग्य है।

प्राकृतिक आपदा के प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित व्यक्ति के पॉलिसी धारक से एक वर्ष तक कोई ब्याज नहीं वसूला जाएगा और पॉलिसी भी खत्म नहीं होती है।

पॉलिसी धारक को ऋण सुविधा देय है आप को जरूरत होने पर आप कुछ रुपये ऋण के रूप मे ले सकते है।

ग्रामीण डाक जीवन बीमा की शर्तें

ग्रामीण डाक जीवन बीमा के लिये आप की उम्र 18 वर्ष से 55 वर्ष होनी चाहिये।

ग्रामीण डाक जीवन बीमा के लिये आप पंचायत क्षेत्र मे निवास करने चाहिये।

आप शारीरिक रूप से स्वस्थ होने चाहिये। आप 10000 रुपये से 500000 तक आप बीमा ले सकते है।

ग्रामीण डाक जीवन बीमा ग्रामीण क्षेत्र के लिये एक अच्छा बीमा है जो आप बेहतरीन फायदे के साथ सरकारी विश्वास तो आप ज्यादा सोचने की जरुरत नहीं है और अधिक जानकारी के लिये आप ग्रामीण डाक जीवन बीमा की निम्नलिखित अधिकारिक वेबसाइट से ले सकते है।

https://pli.indiapost.gov.in/CustomerPortal/mHome.action

ग्रामीण क्षेत्र में बीमा अर्जन में भी डाक विभाग नित नये आयाम स्थापित कर रहा है। जीवन बीमा आज के दौर की एक अनिवार्य आवश्यकता है। डाकघरों में ग्रामीण लोगों की आयु और आवश्यकता के हिसाब से जीवन बीमा की तमाम योजनायें हैं।

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