Satya Darshan

विश्व मौसम विज्ञान दिवस 2019 : 23 मार्च, अब 'दामिनी' देगी सुरक्षा

मौसम की जानकारी आज सभी के लिए अति आवश्यक है। कब कहां कौन सा मौसम हो जाए इन सभी की जानकारी मौसम विभाग द्वारा ही हमें प्राप्त होती है। मौसम विभाग प्राकृतिक आपदाओं से भी जागरुक कराता है। मौसम विज्ञान की इन्हीं खूबियों के कारण 23 मार्च 1950 से हर वर्ष विश्व मौसम विज्ञान दिवस मनाया जाता है। इस वर्ष विश्व मौसम विज्ञान दिवस 23 मार्च शनिवार को मनाया जाएगा। वर्ष 1950 में 30 मार्च को विश्व मौसम संगठन की संयुक्त राष्ट्र में एक विभाग की रूप में स्थापना हुई थी। जेनेवा को इसका मुख्यालय बनाया गया था। जिसका उद्देश्य मौसम में हो रहे परिवर्तन एवं खोज को जनता के सामने प्रस्तुत करना था। प्रत्येक वर्ष इस दिन जलवायु परिवर्तन से संबंधित शोध किये जाने पर पुरस्कार भी दिए जाते हैं। इस पुरस्कार में अन्तरराष्ट्रीय मौसम विज्ञान संगठन पुरस्कार, प्रोफेसर डॉ विल्हो वैसैला पुरस्कार एवं द नोरबर्ट गेबियअर मम्म अन्तरराष्ट्रीय पुरस्कार शामिल हैं।

भू विज्ञान पर आधारित मौसम विभाग में कई विषयों पर शोध होता है इस विज्ञान का उपयोग समय समय पर आने वालवी आपदाओं जैसे बाढ़ सूखा भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदा ही नहीं वरन वर्षा की स्थिति चक्रवातों की संभावनाएं एवं हवाई यातायात, समुद्री यातायात आदि को मौसम की सटीक जानकारी प्रदान कर सहायता करना है। मौसम विभाग के संगठन की स्थापना का उद्देश्य मानव की तकलीफों को कम कर उनका विकास करना है। मौसम विभाग का प्रयोग आज के समय में मौसम गुब्बारों, रडारों, कृत्रिम उपग्रहों नाविकों, समुद्री जहाजों और उन लोगों द्वारा भी किया जाता है जो सड़क एवं विमान यातायात का प्रबंधन संभालते हैं। ये सारी बातें मौसम पर्यवेक्षण टावरों, , उच्च क्षमता वाले कंप्यूटरों और भिन्न-भिन्न अंकगणितीय मॉडलों से भी संभव हो पाती है।

मौसम विज्ञान द्वारा दी गई जानकारी के फलस्वरुप ही दूर देशों की यात्रा संभव हो पाती है। किस शहर मे क्या मौसम है। कहां कौन सी आपदा है इन सब बातों की जानकारी मौसम विज्ञान द्वारा ही संभव हो पाई है। प्रतिवर्ष मौसम विभाग संगठन यह दिन किसी ना किसी खास विषय को ध्यान में रखकर मनाता है। साल 2011 में विश्व मौसम विज्ञान दिवस के अवसर पर 'जलवायु हमारे लिए' विषय पर जोर दिया गया। जबकि वर्ष 2013 में इसका विषय था- ‘जीवन और संपत्ति के संरक्षण हेतु मौसम का अवलोकन’ था। साल 2017 में इसका विषय था- ‘उग्र मौसम ने जिंदगियां लील ली और आजीविका को तबाह कर दिया।‘ साल 2018 में विश्व मौसम विभाग दिवस दुनिया के पटल पर "मौसम-तैयार, जलवायु-स्मार्ट" के रूप में मनाने के उद्देश्य के साथ संपन्न हुआ था। 

इस दिवस पर कई तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। मौसम संबंधी विभाग के अधिकार, विशेषज्ञ, समुदाय के नेताओं और आम जनता के लिए सम्मेलन, संगोष्ठी और प्रदर्शनियां आयोजित की जाती है। जिनमें मुख्य रुप से मौसम में घटने वाली विभिन्न घटनाओं पर मंथन किया जाता है। मौसम में हो रहे परिर्वतन और उस पर पड़ रहे प्रभाव का भी विश्लेषण किया जाता है। कई देश विश्व मौसम दिवस मनाने के लिए डाक टिकटों या विशेष डाक टिकट रद्दीकरण अंक जारी करते हैं। ये टिकट घटना या देश की मौसम विज्ञान उपलब्धियों से अवगत कराती है।

इस दिवस को मनाने का मूल उद्देश्य मानव के सभी दुखदर्द को कम करके और उनको होने वाली मौसम सम्बन्धी सभी मुसीबतों से निजात दिलाना हैं। मौसम विज्ञान अध्ययन द्वारा दुनियाभर में जलवायु परिवर्तन की परिघटना को बेहतर समझने के लिए अंतरिक्ष में बड़ी संख्या में उपग्रह लगाए जाते हैं। इससे भारतीय वैज्ञानिक मौसम और जलविज्ञान अध्ययन करते रहते है।

अब 'दामिनी' देगी मौसम की सटीक जानकारी, भारतीय मौसम विभाग का बन चुका है एप

पिछले आठ वर्षों के निरंतर शोध के बाद  देशवासियों को शहर में होने वाली अतिवृष्टी, तीव्र गर्मी की लहर, तूफान व ठंड सहित मौसम से जुड़ी सारी अप-टू-डेट जानकारी उनके मोबाइल पर उपलब्ध हो जायेगी। इसके लिये भारतीय मौसम विभाग ने ‘दामिनी एप’ नामक मोबाइल एप विकसित किया है। मानसून में तेज बारिश, बिजली गिरने आदि की जानकारी भी इस एप द्वारा मिल जायेगी। दामिनी एप का काम अब अंतिम चरण में है। शीघ्र ही एप सभी को उपलब्ध हो जायेगा।

मौसम वैज्ञानिकों ने बताया कि भारतीय उष्णदेशीय मौसम अनुसंधान संस्था (IITM) और मौसम विज्ञान विभाग द्वारा बादलों की गड़गड़ाहट के साथ होने वाली बारिश व गिरने वाली बिजली का अचूक अंदाज लगाने वाले मॉडेल को विकसित किया है। उसके लिये देशभर में 48 स्थानों पर सेंसर्स लगाए गये हैं। इसी के एक भाग के रूप में IITM, पुणे ने दामिनी मोबाइल एप विकसित किया है।

इससे तूफानी बारिश का अचूक अंदाज व्यक्त किया जायेगा। अब नागरिकों को मोबाइल की एक क्लिक पर मौसम से जुड़ी सारी महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध हो जायेगी। वहीं भारतीय मौसम वैज्ञानिकों ने यह भी बताया कि हम किसानों के लिए अलग वेबसाइट और मोबाइल एप बना रहे हैं। आगामी जून 2019 तक दोनों सुविधाएं किसानों को उपलब्ध हो जायेंगी। देशभर में सर्वे और रजिस्ट्रेशन के नेटवर्क का विस्तार किया जा रहा है। जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश व उत्तराखंड हेतु 10 नये वेदर रडार लगाये गये है। जल्द ही अंदमान निकोबार सहित देश के अन्य भागों में भी रडार लगाये जायेंगे।

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