Satya Darshan

11 मार्च : इतिहास मे आज क्या है खास

सोवियक संघ के पहले और अंतिम राष्ट्रपति मिखाएल गोर्बाचेव ने आज ही के दिन 1985 में कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव का पद संभाला।

15 मार्च 1990 को उन्होंने सोवियत संघ के राष्ट्रपति का कार्यभाल अपने जिम्मे लिया था. 1991 तक गोर्बाचेव दोनों पदों पर आसीन थे, लेकिन उनके खिलाफ तख्तापलट के असफल प्रयास के बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया।

गोर्बाचेव को सोवियत संघ में खुलेपन और पुनर्निर्माण की नीति की शुरुआत करने के लिए जाना जाता है. सामाजिक गठन और पारदर्शिता के विचारों के जरिए गोर्बाचेव ने साम्यवाद के ढांचे में बदलाव लाने की कोशिश की।

गोर्बाचेव का जन्म स्टाव्रोपोल क्राई के यूक्रेनी-रूसी परिवार में हुआ था. 1955 में उन्होंने मॉस्को स्टेट यूनिवर्सिटी से कानून की पढ़ाई पूरी की. कॉलेज को दौरान ही गार्बोचेव कम्युनिस्ट पार्टी में शामिल हो गए. 1970 में वह स्टाव्रोपोल क्राई में पार्टी के पहले सचिव नियुक्त हुए. इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा. 1979 में उन्हें पार्टी की प्रबंधक समिति का सदस्य नियुक्त कर लिया गया. सोवियत नेताओं लियोनिड ब्रेजनेव, यूरी आंद्रोपोव और कोंस्टानटिन चेरनेंनको की मृत्यु के तीन साल के अंदर ही 11 मार्च 1985 को गोर्बाचेव को कम्युनिस्ट पार्टी का महासचिव बनाया गया. छोटी ही उम्र में उन्होंने बड़े नेता के रूप में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरीं।

अमेरिका के साथ शीत युद्ध को खत्म करने के प्रयासों और रूसी राजनीति में सकारात्मक भूमिका के लिए उन्हें 1990 में नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया. उन्हीं के कार्यकाल में बर्लिन की दीवार गिरी और पूर्वी और पश्चिमी जर्मनी एक हुए. 1989 में उन्हें ओटो हान शांति पदक और 1992 में हार्वे पुरस्कार के अलावा कई यूनिवर्सिटियों ने डॉक्ट्रेट की पद्वी से सम्मानित किया।

🔖11 मार्च की अन्य महत्वपूर्ण घटनाएं, जन्म, निधन

★11 मार्च, 1399 – दिल्ली सहित उत्तर भारत में मारकाट मचाने के बाद तैमूर लंग ने सिन्धु नदी पार की।

★11 मार्च, 1669 – इटली में एटना ज्वालामुखी फटने से 15 हजार लोगों की मौत हुई।

★11 मार्च, 1689 – औरंगजेब ने शिवाजी के पुत्र संभाजी की हत्या की।

★11 मार्च, 1881 – रामनाथ टैगोर की प्रतिमा कलकत्ता (अब कोलकाता) के टाउन हॉल में स्थापित की गयी। वह पहले भारतीय हैं जिनकी प्रतिमा टाउन हॉल में लगाई गई।

★11 मार्च, 1895 – स्पेन के जहाज रीना रीगेंटा के जिब्राल्टर में डूबने से 400 यात्रियों की मौत हुई।

★11 मार्च, 1904 – माल्टा द्वीप इस्लामी क्षेत्रों में शामिल हो गया।

★11 मार्च, 1915 – क्रिकेट खिलाड़ी विजय हजारे का जन्म हुआ।

★11 मार्च, 1917 – ब्रिटिश फौजों ने बगदाद पर कब्जा किया।

★11 मार्च, 1918 – मास्को रूस की राजधानी बनी।

★11 मार्च, 1925 – हैदराबाद रियासत के साथ संघर्ष करने वाले प्रमुख व्यक्तियों में से एक मदनसिंह मतवाले का जन्म हुआ।

★11 मार्च, 1927 – रेमन मैग्सेसे पुरस्कार विजेता भारतीय महिला चिकित्सक वी. शांता का जन्म हुआ।

★11 मार्च, 1935 – बैंक कनाडा का गठन किया गया।

★11 मार्च, 1942 – पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह का जन्म हुआ।

★11 मार्च, 1948 – देश के पहले आधुनिक पोत जल उषा का विशाखापत्तनम में जलावतरण हुआ।

★11 मार्च, 1963 – सोमालिया ने ब्रिटेन के साथ राजनयिक संबंध तोडे।

★11 मार्च, 1978 – इजरायली शहर तेल अवीव में आतंकवादी हमले में 45 लोगों की मौत हुई।

★11 मार्च, 1980 – प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी और उत्तर प्रदेश के भूतपूर्व मुख्यमंत्री चन्द्रभानु गुप्त का निधन हुआ।

★11 मार्च, 1981 – चिली में संविधान लागू हुआ।

★11 मार्च, 1985 – सोवियक संघ के पहले और अंतिम राष्ट्रपति मिखाएल गोर्बाचेव सोवियत संघ के सर्वोच्च नेता बने।

★11 मार्च, 1990 – लिथुआनिया ने स्वतंत्रता की घोषणा की।

★11 मार्च, 1996 – सैटेनिक वर्सेज के लेखक सलमान रुश्दी के ख़िलाफ़ फ़तवा को ईरान ने वापस लिया।

★11 मार्च, 1999 – इंफोसिस कंपनी पहली भारतीय कंपनी है जो नशदाक (NASDAQ) अंतरराष्ट्रीय स्टॉक एक्सचेंज की सूची में आई।

★11 मार्च, 2001 – पुलेला गोपीचंद बैडमिंटल में विश्व चैंपियन बने।

★11 मार्च, 2004 – स्पेन की राजधानी मेड्रिड में रेल नेटवर्क पर हुए सिलसिलेवार बम विस्फोट में 191 लोगों की मौत हुई।

★11 मार्च, 2006 – यूनानी संसद ने दाह-संस्कार को अनुमति देने वाले कानून को बहुमत से पारित किया।

★11 मार्च, 2007 – सुनिता चक्रवर्ती ने कोलकता से वाघा तक के 2,012 किलोमीटर के सफर को रिवर्स गियर में गाड़ी चलकर सात दिनों में पूरा किया।

★11 मार्च, 2008 – पाकिस्तान के लाहौर में दो आत्मघाती विस्फोटों में 26 लोग मारे गये।

★11 मार्च, 2008 – अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के यान एंडेवर ने अंतरिक्ष स्टेशन की ओर उड़ान भरी।

★11 मार्च, 2011 – जापान में भूकंप और सुनामी से 15850 लोग मारे गए और फुकुशिमा परमाणु संयंत्र हादसा हुआ।

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