Satya Darshan

काव्य दर्शन : खोज़ सत्य की

कविता

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खोज सत्य की
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सत्य की खोज मे

रोज मै निकलता हूँ
सत्य जब नही मिलता
झूठ को निगलता हूँ

जीवन एक भूख है
भूख है शरीर की
तो मस्तिष्क भी भूखा है

जो कुछ भी दिखता है
जो कुछ भी मिलता है
सबका सब झूठा है
सबका सब रूखा है

सत्य को पाने की
भूख को मिटाने की
जीने के लिये बस
दो पल चुराने को
इधर उधर भटकता हूँ

सत्य जब नही….
जीवन है मरीचिका
जीवन है विभीषक

जीवन एक क्रंदन है
जीवन एक मंथन है
मंथन तो विषकर है
जीवन एक विषधर है

विष की कुछ बूंदे ले
अमृत बनाने को
क्रंदन से पीड़ित को
कुछ पल हंसाने को
भरसक प्रयत्न करता हूँ

सत्य जब नही…..

✍️उमेश शर्मा

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