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कांग्रेस ने उठाया काशी के एम्स के रूप मे विख्यात वी.एस.मेहता चेरिटेबल अस्पताल के अधिग्रहण पर सवाल, सच जानने के लिए लगाई आरटीआई

दैनिक दर्शन न्यूज : वाराणसी 5 मार्च

पूर्वांचल का एम्स के रूप मे विख्यात काशी के रामघाट स्थित श्री वल्लभ राम शालिग्राम मेहता चैरिटेबल अस्पताल गैर कांग्रेसी सरकारों के दौर में प्रशासनिक और राजनीतिक दुर्व्यवस्थाओ की बली चढ गया। निशुल्क चिकित्सा देने वाला और उच्चस्तरीय सुविधाओं से लैस यह अस्पताल पिछले लगभग बारह वर्षों से अपनी अंतिम सांसे गिन रहा है। 

पूर्व राष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णन द्वारा उद्घघाटित इस अस्पताल मे श्रीमती इंदिरा गांधी अपने प्रधानमंत्रित्व काल मे वाराणसी प्रवास के दौरान इलाज के लिए आती थी। उस समय के लगभग सभी बडे़ राष्ट्रीय नेता मोरारजी देसाई से लेकर काशी नरेश विभूति नारायण सिंह तक इलाज के लिए यहीं आते रहे। 

काशी की सकरी गलियों में रहने वाले लाखों लोगों को जीवनदान देने वाला ये इकलौता अस्पताल है जो आज खुद वेंटिलेटर पर है कभी पंडित कमलापति त्रिपाठी के मुख्यमंत्रित्व काल मे अपने अर्श पर रहा। 18 हजार स्क्वायर फीट एरिया में फैले 80 बेड वाले इस अस्पताल के रख-रखाव के लिए राज्य सरकार की ओर से सन 1976 से 90 हजार रुपए सालाना मिला करता था जोकि पिछले तीन साल से वो भी मिलना बंद हो गया। जिसके चलते इसकी हालत बद से बदतर हो चुकी है। स्टाफ बतातें है कि ये अस्पताल यूपी के पूर्व सीएम कमलापति त्रिपाठी के सहयोग से काफी सालों तक चलता रहा, लेकिन उनके जाने के बाद अस्पताल के बुरे दिन शुरू हो गए।

इस अस्पताल का शिलान्यास साल 1954 में गवर्नर माणिकलाल कन्हैया लाल मुंशी द्वारा किया गया था और दस साल बाद ये अस्पताल 1964 में बन कर तैयार हुआ। इस अस्पताल में उस जमाने में आईसीयू, स्पाइनल सर्जरी यूनिट के अलावा आधुनिक ओटी एक्सरे और अल्ट्रासाउंड की मशीने मौजूद थीं, जो आज धूल फांक रही है।

इस अस्पताल को वाराणसी शहर के लोग रामघाट अस्पताल के नाम से भी जानते है। ये अस्पताल घाट के ठीक उपर बनावाया गया था। इसका मकसद था कि पक्के महाल के लोगों को तत्काल सुविधा मिल सके क्योंकि इमरजेंसी की हालत में गलियों से मरीजों को लेकर बाहर जाना बहुत दुर्गम काम था और कई बार मरीज गली में ही दम तोड़ देता था। घाट किनारे होने के नाते लोग नाव से मरीज को लेकर आसानी से इस अस्पताल में पहुंच जाते थे। ये अस्पताल चेरिटेबल संस्था द्वारा चलाया जाता था। लिहाजा लोगों को बेहद कम खर्च में उच्च स्तरीय सुविधा मिलती थी। जिसके चलते बिहार तक के मरीज यहां आते थे।

निशुल्क चैरिटेबल इस अस्पताल की खासियत पर एक नजर डाले तों लगता है आज के आधुनिकतम सुविधाओं से युक्त प्राइवेट अस्पतालों मे जिनकी फीस दे पाना आम लोगों को आसान नहीं वहां ऐसी सुविधाएं बिरले ही मिलेंगी। 

-गंगा किनारे पांच तल का भवन।
-पहला अस्पताल जहां सबसे पहले लिफ्ट की सुविधा शुरू हुई थी।
-ओपीडी के 35 कमरे और 100 बेड का वाॅर्ड।
-10 सेंट्रलाइज एयरकंडीशन रूम।
-सभी रोगों के विशेषज्ञ देते थे नि:शुल्क सेवा।
-ग्राउंड फ्लोर पर डॉक्टरों का आवास।

वैसे तो लोग अस्पताल में मरीजों का इलाज कराने आते हैं, लेकिन अगर अस्पताल बदहाली के चलते खुद ही बीमार हो जाए तो इसे आप क्या क्या कहेंगे। बात तब और बढ़ जाती है जब ये अस्पताल देश के पीएम के संसदीय क्षेत्र में स्थित हो। पीएम नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के ऐसे अस्पताल की जो अव्यवस्थाओं और आर्थिक तंगी के चलते आज खुद बीमार पड़ा है। 

अपने सुनहरे अतीत को समेटे यह अस्पताल एक राष्ट्रीय धरोहर के रूप मे है जिसकी सुध लेने वाला आज कोई नहीं। मगर इस अस्पताल को उसका पुराना गौरव वापस दिलाने के लिए वाराणसी के कांग्रेस जनो ने आज एक लंबी लडाई का संकल्प ले लिया है। कांग्रेस जनो ने एक स्वर से कहा जनहित के संस्थानों को किसी हालात मे स्वहित के लिए कुर्बान नहीं करने दिया जायेगा। हम इसके लिए बडे से बडे आंदोलन के लिए कमर कस चुके हैं।

इसी संदर्भ मे उ.प्र. कांग्रेस कमेटी के सूचना का अधिकार प्रकोष्ठ के पू.चेयरमैन श्री बैजनाथ सिंह और छावनी परिषद के पू.उपाध्यक्ष एवं वर्तमान सदस्य श्री शैलेंद्र सिंह के नेतृत्व में वाराणसी कांग्रेसजनों ने ईंगलिसिया लाईन कार्यालय में आज एक बैठक करके रामघाट स्थित वल्लभ राम शालिग्राम मेहता चेरीटेबल अल्पताल की वास्तविक स्थिति को जनता से छुपाने का सरकार और मंदिर प्रशासन पर आरोप लगाते हुये पांच विन्दुओं पर काशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी से सूचना मांगा।

1.यह कि रामघाट स्थित बल्लभराम सालिगराम मेहता चेरीटेबल अस्पताल का क्या सरकार ने अधिग्रहण कर लिया है?

2.यह कि यदि अधिग्रहण कर लिया है तो किन शर्तों के अधीन किया है इसका सम्पूर्ण विवरण प्रमाणित प्रति में दिया जाय?

3.यह कि यदि अधिग्रहण कर लिया गया है तो अस्पताल संचालित करनेवाले ट्रस्ट को कितना धन दिया गया है इसकी प्रमाणिक सूचना देवें?

4.यह कि यदि अधिग्रहण कर लिया गया तो क्या इसकी सार्वजनिक सूचना जारी की गई है?

5.यह कि यदि अधिग्रहण नहीं किया गया है तो मुख्य कार्यपालक अधिकारी श्री काशी विश्वनाथ मंदिर द्वारा किसी प्राइवेट/संसथागत सम्पत्ति के भवन और संस्थानों के नवीनीकरण हेतु डीपीआर किस आधार पर मांगा जा रहा है?

आज की बैठक में सर्वश्री बैजनाथ सिंह,  विजयशंकर मेहता,भूपेन्द्र प्रताप सिंह शैलेन्द्र सिंह,अशोक कुमार पान्डेय, आनन्द शुक्ला,विवेक मेहता, विवेक  सिंह,शुभम राय,सुवाष राम आदि ने बैठक में हिस्सा लिया।

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