Satya Darshan

जानिए कितनी ताकतवर है वायुसेना, कारगिल युद्ध के दौरान बना लिया था पाक को निशाना, ऐसे टला हमला

भारतीय वायुसेना ने मंगलवार सुबह लगभग साढ़े 3 बजे पाकिस्तान और पीओके में स्थित आतंकी कैंपों पर बड़ा हमला करते हुए 325 से अधिक आतंकियों को मार गिराया। इस हमले से वायुसेना ने 14 फरवरी को पुलवामा में हुए आतंकी हमले का बदला भी ले किया। जानिए कितनी ताकतवर है भारतीय वायुसेना, देखिए खास लड़ाकू विमान और हैलीकॉप्टर...


lL 76 : IL -76 एक बहुउद्देश्यीय चार इंजन वाला टर्बोफैन रणनीतिक एयरलिफ्टर है जिसे सोवियत संघ के इलुशिन डिजाइन ब्यूरो द्वारा डिज़ाइन किया गया है। यह विमान भारी बमबारी की क्षमता रखता है।

MI 17 V5 : रूस की कजान फैक्ट्री में बने इस विमान में 36 जवानों और 4 टन सामान ले जाने की क्षमता है। यह एक मध्यम जुड़वां-टरबाइन परिवहन हैलीकॉप्टर है।


MI 35 : एमआई 35 एक मल्टी रोल कॉम्बेट विमान है। इस विमान में जबरदस्त गोलीबारी की क्षमता है। इस लड़ाकू विमान में 8 जवान भी सवार हो सकते हैं।


जगुआर : जगुआर एक सुपरसोनिक कम ऊंचाई पर उड़ने वाला लड़ाकू विमान है। इसके उत्पादन के लिए ब्रिटेन और फ्रांस ने साझेदारी की थी। इसके हाई-विंग लोडिंग डिजाइन की वजह से कम-ऊंचाई पर एक स्थिर उड़ान और जंगी हथियारों को ले जाने में सहूलियत होती है।


तेजस : तेजस हिन्दुस्तान एरोनाटिक्स लिमिटेड द्वारा विकसित किया गया एक हल्का व कई तरह की भूमिकाओं वाला जेट लड़ाकू विमान है। तेजस अनेक भूमिकाओं को निभाने में सक्षम एक हल्का युद्धक विमान है।


मिग - 27 : मिग - 27 को सोवियत संघ में मिकोयान-गुरेविच ब्यूरो द्वारा डिज़ाइन और निर्मित किया गया था। बाद में लाइसेंस पर भारत में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स द्वारा निर्मित किया गया था। यह मिकोयान-गुरेविच मिग-23 लड़ाकू विमानों पर आधारित है लेकिन मिग-23 के विपरीत यह एयर-टू-ग्राउंड हमले करने में सक्षम है।


हाक : यह विमान काफी हल्का व कई अहम हथियार ले जाने में सक्षम है। विमान की डिजाइन इसे और भी ज्यादा खतरनाक बनाती है। आधुनिक प्रशिक्षण विमान का इस्तेमाल भारत के अलावा 18 अन्य देश भी कर रहे हैं।


मिग - 29 : रूसी मूल का यह लड़ाकू विमान अब हवा में ईंधन भरने में सक्षम है, वह अत्याधुनिक मिसाइलों से युक्त है। यह कई दिशाओं में हमले करने में सक्षम है।


मिराज 2000 : मिराज 2000 एक लड़ाकू विमान है। इसकी खास बात यह है कि ये भीतर तक जाकर टारगेट को ध्वस्त करने की क्षमता रखता है।

जब भारतीय वायुसेना ने बना लिया था पाक को निशाना, ऐसे टला हमला

1999 में हुए कारगिल युद्ध के दौरान इंडियन एयर फोर्स (आईएएफ) ने अपनी पूरी ताकत के साथ पाकिस्तान पर हमले की तैयारी कर ली थी। इसके अलावा भारतीय नौसेना ने भी वायु सेना के साथ कदम मिलाते हुए, कराची के बंदरगाह को ले लिया था निशाने पर परंतु यह हमला हो नहीं पाया। 

इस हमले के न होने की वजह यह रही कि दोनों ही सेनाओं को तत्कालिन एनडीए सरकार से इस योजना को अंजाम देने का आदेश कभी मिला ही नहीं। अटल बिहारी वाजपेयी इस युद्ध के दौरान प्रधानमंत्री पद पर थे। हमले के लिए आदेश देने के बदले, तत्कालिन कैबिनेट कमैटी ने 25 मई 1999 को आईएएफ के एयर चीफ मार्शल एवाय टिपनिस को कड़े आदेश दिए कि फाइटर जेट लाइन ऑफ कंट्रोल के उस पार किसी हालत में नहीं जाने चाहिए। 

टिपनिस ने आगे होकर एलओसी (लाइन ऑफ कंट्रोल) के थोड़ा उस पार जाने की अनुमति मांगी थी। जिससे भारतीय हमला अधिक प्रभावी हो सके और पाकिस्तान आर्मी के कारगिल की चोटी पर होने से होने वाले लाभ को खत्म किया जा सके। साथ ही भारतीय आर्मी की मदद हो सके परंतु उन्हें यह अनुमति नहीं दी गई। भारतीय एअर फोर्स सीमा के अंदर से ही जवाबी हमला कर सकी। 

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