Satya Darshan

5 फरवरी: इतिहास मे आज क्या है खास

अनाज, फल, सब्जियां या फिर किसी और पैदावार में कोई खास गुण लाने के लिए जब उसे जेनेटिक या डीएनए के स्तर पर बदल दिया जाता है तो वह एक जीएम उत्पाद बनता है। आज के ही दिन ऐसा पहला उत्पाद बाजार में आया था।

आम धारणा बन गई है कि आजकल खाने पीने की कोई चीज शुद्ध नहीं हैं। कीटनाशकों और दूसरे रसायनों के इस्तेमाल से खेतों में उगाई जा रही हर फसल में बदलाव आ जाता है लेकिन जानबूझ कर फसल में कोई खास गुण लाने के लिए जब उसकी आनुवंशिक संरचना में बदलाव लाया जाता है तो वह फसल जीन संवर्धित या जीएम क्रॉप बन जाती है। 

5 फरवरी, 1996 को इंग्लैंड में पहली बार जीएम टमाटरों से बनी प्यूरी वहां के बाजारों में बिकनी शुरू हुई। यह प्यूरी उन खास जीएम टमाटरों से बनाई गई थी जिसमें से टमाटर को सड़ाने वाला जीन या आनुवंशिक सूचक अलग कर दिया गया था। यही कारण है कि टमाटर बहुत सालों तक जीएम उत्पादों का प्रतीक रहा। इसके पहले 1994 में अमेरिका में पहली बार व्यावसायिक स्तर पर जीएम टमाटर बेचे गए थे।

बहुत सारी जीएम फसलों को कीड़े, बीमारियों, रसायनों या बुरे मौसम से बचाने वाले खास गुण डाले जाते हैं। कई बार फसलों को और पोषक बनाने और भारी मात्रा में उगाने के लिए भी उनकी जेनेटिक संरचना में बदलाव किए जाते हैं। खाने पीने की चीजों के अलावा बायोफ्यूल बनाने में काम आने वाले पौधों के डीएनए में भी अंतर लाया जाता है जिससे व्यावसायिक फायदे मिलते हैं। 

पहली बार उगाए जाने से लेकर अब तक हर साल पूरे विश्व में जीएम क्रॉप्स को उगाने वाले क्षेत्र में बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है। 1996 से 2012 तक तो इस क्षेत्रफल में 100 गुना वृद्धि हुई है। इस तरह आधुनिक खेती के इतिहास में जीएम फसलें सबसे तेजी से स्वीकार की गई तकनीक बन गई है।

भारत में जीएम बीजों के परीक्षण पर रोक लगी हुई है। भारतीय सुप्रीम कोर्ट की तकनीकी समिति के सुझावों में कहा गया था कि खेतों में जीन संवर्धित फसलों के परीक्षण पर रोक लगाई जानी चाहिए। समिति के मुताबिक रोक तब तक लगी रहनी चाहिए जब तक सरकार सुरक्षा और नियामक ढांचा तैयार नहीं कर लेती। 2014 में ट्रांसजेनिक फसल के समर्थन में बोलते हुए तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा था कि उनकी सरकार अवैज्ञानिक पूर्वाग्रहों के आगे नहीं झुकेगी।

इसके विपरीत जीएम फसलों को खतरनाक बताते हुए पर्यावरणवादी गुटों ने कहा है कि इस बात के वैज्ञानिक सबूत हैं कि वे न सिर्फ लोगों के लिए बल्कि जैव विविधता के लिए भी हानिकारक हैं।

5 फ़रवरी की अन्य महत्त्वपूर्ण घटनाएँ – 

फ्रांस के साथ शांति समझौते पर जर्मन शासक लियोपोल्ड प्रथम ने 1679 में हस्ताक्षर किये।

इटली के कालाब्रिया में 1783 में हुए भीषण भूकंप में लगभग 25000 से ज्यादा लोगों की जाने गयी।

फिलाडेल्फिया के थियेटर में 1870 में पहली बार चलचित्र दिखाया गया।

ब्रिटेन और अमेरिका के बीच सन 1900 में पनामा नहर समझौते पर हस्ताक्षर।

क्यूबा देश अमेरिका के कब्जे से 1904 में मुक्त हुआ।

मैक्सिको ने 1917 में नया संविधान अंगीकृत किया।

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर के पास चौरी चौरा कस्बे में भड़की हुयी भीड़ ने 1922 में पुलिस थाने में आग लगा दी जिसमें 22 पुलिसकर्मियों की मौत हो गयी।

ब्रिटिश समाचार पत्र “संडे टेलीग्राफ” के पहले संस्करण का प्रकाशन 1961 में हुआ।

अमेरिका ने 1970 नेवादा में परमाणु परीक्षण किया।

परमाणु प्रौद्योगिकी के ग़लत इस्तेमाल के मामले में परमाणु वैज्ञानिक अब्दुल कादिर ख़ान को पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ़ ने 2004 में माफी दी।

भारत की सुनीता विलियम्स 2007 में अंतरिक्ष में सबसे अधिक समय बिताने वाली महिला बनीं।

भारतीय निशानेबाज अभिनव बिंद्रा ने 2010 में नीदरलैंड इंटरनेशनल शूटिंग चैंपियनशिप में 600 में से 596 अंक हासिल कर स्वर्ण पदक जीत लिया।

5 फ़रवरी को जन्मे व्यक्ति – 

मुग़ल बादशाह औरंगज़ेब की पुत्री ज़ेबुन्निसा का 1639 में जन्म हुआ।

प्रसिद्ध कवि जानकी वल्लभ शास्त्री का 1916 में जन्म हुआ।

बॉलीवुड के शहंशाह अमिताभ बच्चन के पुत्र और फ़िल्म अभिनेता अभिषेक बच्चन का 1976 जन्म हुआ।

5 फ़रवरी को हुए निधन -

2014 में प्रसिद्ध भजन गायिका जुथिका रॉयका निधन।

2010 में भोजपुरी और हिन्दी फ़िल्मों के प्रसिद्ध अभिनेता सुजीत कुमार का निधन।

2008 में भारतीय आत्मिक योगी महर्षि महेश योगी का निधन।

1927 में भारतीय सूफ़ी संत इनायत ख़ान का निधन।

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