Satya Darshan

रघुराम राजन: ब्राह्मण अर्थशास्त्री जिसकी भविष्यवाणियां अक्षरशः सच हुईं

जन्म दिन की हार्दिक शुभकामनाओं सहित......

रघुराम राजन को कौन नहीं जानता। असल में रघुराम राजन को हम तभी से जानते है जब से वो रिज़र्व बैंक के 23वें गवर्नर बने इससे पहले उनकी भूमिकाएं इतनी चर्चित नहीं रही कि आम लोग उन्हें जान पाते।

मोदी सरकार से विवाद के चलते रघुराम राजन ने अपने कार्यकाल को बढाने से इनकार कर दिया था। जिसकी वजह से 1991 में आर्थिक उदारीकरण की शुरुआत के बाद से राजन ऐसे पहले गवर्नर रहे जिनका कार्यकाल सबसे कम रहा। हम विवाद के बारे में बाद में चर्चा करेंगे लेकिन अभी हम राजन की जिन्दगी के बारे में कुछ महत्वपूर्ण बाते है जो जान लेते है-

3 फ़रवरी 1963 को भोपाल में राजन का जन्म एक तमिल ब्राह्मण परिवार में हुआ और इनका पूरा नाम है रघुराम गोविंद राजन और इनके पिता गोविन्द राजन 1953 बैच के टापर आईपीएस अफसर थे। राजन अपने चार भाईयों में से तीसरे नंबर पर आते हैं। राजन के पिता की 1966 में इंटेलिजेंस ब्यूरो के तरह इंडोनेशिया में पोस्टिंग थी और उसके बाद उन्हें कई जगह भेजा गया जिनमे से आखिर में उनकी जर्मनी पोस्टिंग थी जहां पर राजन समेत भाइयों में शुरुआती शिक्षा के तौर पर फ्रेंच स्कूल में पढाई की और बाद में पूरा परिवार 1974 में भारत लौट गया।

1974 में भारत लौटने के बाद राजन ने दिल्ली के दिल्ली पब्लिक स्कूल, आर के पुरम् में अपनी पढाई की और उसके बाद आईआईटी दिल्ली में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में डिग्री प्राप्त की। कॉलेज में वो एक मेधावी छात्र थे जिसकी वजह से उन्हें ग्रेजुएट होने के बाद 1985 में बेस्ट आल राउंडर छात्र के तौर पर सम्मानित किया गया था। उसके बाद 1987 में उन्होंने आईआईएम अहमदाबाद से बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में डिग्री हासिल की और वंहा भी वह गोल्ड मेडलिस्ट ही थे।

इसके बाद उन्होंने टाटा को बतौर ट्रेनी के तौर पर ज्वाइन किया लेकिन कुछ ही महीनो बाद वो MIT Sloan School of Management चले गये जहां उन्होंने मैनेजमेंट के डाक्टोरल प्रोग्राम में एडमिशन लिया और पीएचडी प्राप्त की। उन्हें पसंद और उनके शोध के विषय बैंकिंग, कार्पोरेट फाइनेंस और इकनॉमिक डेवलपमेंट थे।

रघुराम राजन के करियर की बात करें तो उन्हें हम एक बेहद योग्य अर्थशास्त्री कह सकते है क्योंकि उन्हें इस क्षेत्र का बहुत सालों का अनुभव रहा है। रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया के गवर्नर के तौर पर उन्होंने 4 सितम्बर 2013 को उस समय के गवर्नर डी सुब्बाराव सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने यह पद ग्रहण किया और इससे पहले वो प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के मुख्य आर्थिक सलाहकार रहे। 2003 से 2006 तक अंतराष्ट्रीय मुद्रा कोष के मुख्य अर्थशास्त्री और अनुसन्धान निदेशक भी रह चुके है साथ ही 2008 मे भारत के योजना आयोग द्वारा भारत में वित्तीय सुधार के लिए गठित की गयी कमेटी के मुखिया भी रहे। 2011 मे राजन अमेरिकन फाइनेंस एसोसिएशन के अध्यक्ष चुने गए।

राजन का विवाह राधिका पुरी से हुआ जो उन्हें आईआईएम अहमदाबाद में अपनी पढाई के दौरान मिली थीं। राधिका अब शिकागो यूनिवर्सिटी के ला कालेज में पढ़ाती हैं। राजन के एक बेटा और एक बेटी है। उनके बड़े भाई अमेरिका के एक सोलर कम्पनी में काम करते है और उनकी बहन जो दिल्ली मे फ्रेंच टीचर है जिनका विवाह एक आईएएस ऑफिसर से हुआ है।

रोचक बातें

आप रघुराम राजन को चाहे जैसे भी जानते हो चाहे आप उन्हें गंभीर अर्थशास्त्री के तौर पर जानते हो या रिज़र्व बैंक के गवर्नर के तौर पर लेकिन फिर भी उनके बारे में कुछ ऐसी चीजे हैं जो आप नहीं जानते हैं। वो कौन सी बात है आइये जानते है -

*1970 में उनके पिता की पोस्टिंग श्रीलंका में तो राजनीतिक उथल पुथल के चलते उन्होंने अपने एक साल के स्कूल को मिस कर दिया था।

*राजन हिंदी के मामले में थोड़े कम है क्योंकि उनके पिता की पोस्टिंग शुरू में देश के बाहर ही रही जिसमे इंडोनेशिया, श्रीलंका और बेल्जियम जैसे देश है जिसकी वजह से उन्होंने सातवीं कक्षा में हिंदी जानने और पढने का मौका मिला।

*रघुराम राजन दिल्ली IIT से ग्रेजुएशन और बाद में IIM अहमदाबाद में गोल्ड मेडलिस्ट रहे है।

*उनके छोटे भाई मुकुन्द राजन टाटा ग्रुप के चीफ इथिक्स आफिसर के पद पर कार्यरत है।

*राजन ने राधिका राजन से शादी की है जिन्हें वो तब मिले जब वो IIM अहमदाबाद में पढ़ रहे थे।

*राजन ने 2005 में एक शोधपत्र प्रस्तुत किया जिसमे आने वाले समय मे आर्थिक वैश्विक मंदी और वित्तीय जोखिमो पर गंभीर चिंता जताई थी जिसे 2008 में आई वैश्विक मंदी ने उनके शोधपत्र को अक्षरशः सही साबित कर दिया।

*2003 में उन्हें ब्लेक फिशर अवार्ड से नवाजा गया जो उन्हें मिलता है जिनका वितीय सेक्टर में प्रभावी योगदान हो और जो 40 की उम्र से कम हो।

*राजन खेल के मामले में टेनिस और स्क्वैश दोनों में बेहतर है साथ ही उन्हें स्विमिंग का बेहद शौक है।

*राजन हिंदी में थोड़े कमजोर है लेकिन तमिल और इंग्लिश पर उनकी शानदार पकड़ है। फ्रेंच भी उन्हें थोड़ी बहुत आती है।

*राजन को सुडोकु और क्विज जैसी चीजे बेहद पसंद है।

*राजन शराब और धूम्रपान से कोसो दूर शुद्ध शाकाहारी है।

*उनका कार्यकाल सितम्बर 2016 में ख़त्म हो गया। आगे के कार्यकाल को वो बढाने के पक्ष में नही थे। हालाँकि देश को उनकी जब भी जरुरत रहेगी वो उपलब्ध रहेंगे ऐसा उन्होंने कहा था।

*एक इंटरव्यू में उनकी माँ ने उनके बारे में कुछ राज कहे उनके अनुसार राजन इतने धार्मिक नहीं है और कम ही मंदिर में जाते है। उन्होंने कहा " और इसकी जरुरत भी नहीं है क्योंकि जो आदमी अच्छा है भगवान् हमेशा उसके साथ ही होते है।"

*राजन ने अपने कार्यकाल में एनपीए (Non-performing asset) को लेकर भी काफी सकारामक काम किये साथ ही ऑनलाइन फ्रॉड आदि के बारे में भी समय समय पर चिंता जताते हुए इन्होने बैंकिंग सिस्टम के सुधार पर काफी जोर दिया था।

रघुराम राजन - सरकार विवाद

असल में राजन के अपने दूसरे कार्यकाल को आगे न बढाने की इच्छा के पीछे सुब्रमण्यम स्वामी के बयान और प्रधानमंत्री को उनकी भेजी गयी तथाकथित चिट्टी थी जिसमे उन्होंने राजन पर आरोप लगाते हुए यह कहा कि

"रघुराम राजन मानसिक तौर पर पूरी तरह ठीक नहीं है और उन्होंने जानबूझकर भारतीय अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुँचाया है।"

ऐसे ही उन्होंने कई तरह के और भी अनर्गल आरोप लगाये और उन्हें तत्काल पद से हटाने की भी मांग कर डाली। हालाँकि राजन ने एक इंटरव्यू के दौरान बताया था कि वो भी अब दूसरे कार्यकाल के लिए इच्छुक नहीं है और अपनी उसी यूनिवर्सिटी दुनिया में वापिस जाना चाहते है।

वैसे भी नोटबंदी को देश के लिए घातक बताने वाले विश्वप्रसिद्ध अर्थशास्त्री के साथ जिस तरह का दुर्व्यवहार मोदी सरकार ने किया उससे देश की छवि विश्व मे तार तार हो गई। निश्चित रुप से कार्यकाल आगे न बढाने देने का उनका यह फैसला सर्वथा उचित था।

सर्वश्रेष्ठ केंद्रीय बैंक गवर्नर पुरस्कार से सम्मानित

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के गवर्नर रहे रघुराम राजन को 2014 के लिए यूरोमनी पत्रिका ने सर्वश्रेष्ठ केंद्रीय बैंक गवर्नर के पुरस्कार से सम्मानित किया है। यूरोमनी के अनुसार रघुराम राजन की सख्त मौद्रिक नीति ने हाल में उभरते बाजारों के संकट के समय घाटे में फंसी भारतीय अर्थव्यवस्था में उठे तूफान का मुकाबला किया।

यूरोमनी ने कहा, वह एक अरब से अधिक आबादी वाले देश के निष्क्रिय वित्तीय बाजार को जगाने के प्रयास में निहित स्‍वार्थों से मुकाबला कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मशहूर अर्थशास्त्री राजन ने 2005 में ही 2008 के वित्तीय संकट की भविष्यवाणी कर दी थी।

 

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