Satya Darshan

बजट 2019: यशवंत सिन्हा बोले सरकार ने तोड़ी मर्यादाएं वहीं विपक्ष ने उठाए गंभीर सवाल

पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा ने मोदी सरकार के बजट पर बड़ा हमला बोला और कहा कि यह लोगों के वोट पाने के लिए पैसे बांटने जैसा है।

एक न्यूज चैनल से बातचीत में सिन्हा ने कहा, 

'अंतरिम बजट लाया जाना था. लेकिन सरकार ने संविधान की धज्जियां उड़ाते हुए अपना छठा बजट पेश कर दिया. उनको जनादेश केवल 5 बजट तक के लिए मिला था लेकिन जैसा कि ये हर जगह करते हैं, संविधान की परंपराओं का ध्यान न रखते हुए इन्होंने अपना छठा बजट पेश कर दिया. उस तरफ किसी का ध्यान नहीं जा रहा. लोग सिर्फ यह बात कर रहे हैं कि बजट अच्छा है, बुरा है.'

सिन्हा ने कहा, 

'इस बजट में सरकार का बस एक ही प्रयास है कि विभिन्न वर्ग के लोगों को कैश उपलब्ध करा दो और वोट ले लो. यानी कैश फॉर वोट इनका मूल मंत्र है. अप्रैल-मई में चुनाव होंगे, एक्सपेंडिचर का एक आइटम है जो किसानों के लिए लाया गया है. इसे पहली दिसंबर से लागू किया जा रहा है. ऐसा पहले कभी नहीं हुआ कि एक्सपेंडिचर को पीछे से लागू किया जाए लेकिन यह सरकार कर रही है. मार्च के अंत तक अगर यह सफल हुआ तो यह सरकार हर किसान को 2 हजार रुपया उपलब्ध करा देगी और अप्रैल-मई में चुनाव होगा, तो यह चुनाव कैश फॉर वोट नहीं तो क्या है?

उन्होंने आगे कहा, 

'केंद्र सरकार ने पहले ऐसा कभी नहीं किया कि अपने वोट ऑन अकाउंट वाले बजट में ऐसी बातें की. इस पर किसी ने सवाल नहीं उठाया कि इस सरकार को छठा बजट पेश करने का कोई अधिकार नहीं था. वित्त मंत्री खड़े होते हैं अंतरिम बजट पेश करने के लिए लेकिन पूरा बजट पेश कर देते हैं. 70 साल की जो परंपराएं रही हैं अपने देश में उसको उन्होंने समाप्त कर दिया.'

यशवंत सिन्हा ने कहा कि अगर हम इस बजट के विस्तार में जाएं तो पाएंगे कि कई आवंटन कम करके रखा गया है. पिछले बजट की तुलना में ग्रीन रिवोल्यूशन, व्हाइट रिवोल्यूशन, ब्लू रिवोल्यूशन, प्रधानमंत्री सिंचाई योनजा, स्वच्छ भारत मिशन, महिला सशक्तीकरण जैसी योजनाओं में आवंटन कम कर दिया गया है. इसका अर्थ यह हुआ कि रियलिस्टिक एस्टीमेट नहीं बनाया गया है.

सिन्हा ने कहा कि खर्च कम करके और इनकम को बढ़ा कर दिखाने का प्रयास यह सरकार कर रही है और सारी दुनिया को बेवकूफ बनाने की कोशिश हो रही है. कहा जा रहा है कि राजकोषीय घाटा 3.2 प्रतिशत रहेगा जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं होगा. बजट को गौर से देखने के बाद पता चलेगा कि विभिन्न योजनाओं को कम पैसा दिया गया है. सरकार बहुत सारा खर्च अगले साल के लिए रोक रही है.'

उन्होंने कहा कि कृषि के क्षेत्र में बड़ा सुधार करना चाहिए था लेकिन ऐसा नहीं हुआ और बजट को कैश फॉर वोट कर दिया. बजट में कई ऐसी बातें हैं जिससे पता चलता है कि सरकार को लग रहा है कि लोगों के ध्यान में नहीं आएगा. क्या ये बजट स्टैंडिंग कमेटी में जाएगा, इसके लिए किसी के पास वक्त है?

मोदी सरकार का बजट तेलंगाना सरकार की हूबहू नकल है

बजट पेश होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "एक प्रकार से आज़ादी के बाद देश के इतिहास में किसानों के लिए बनी ये सबसे बड़ी योजना है."

लेकिन इसी तरह की एक योजना तेलंगाना के मुख्यमंत्री के.चंद्रशेखर राव पिछले साल राज्य में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले ही शुरू कर चुके थे.

शुक्रवार को पेश किए गए बजट के अनुसार जिन किसानों के पास 2 हेक्टर तक ज़मीन है उनके बैंक खातों में सरकार के ज़रिए 6 हज़ार रूपए सालाना डाले जाएंगे. इस योजना को 'प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधी' कहा गया है.

तेलंगाना में के. चंद्रशेखर राव की सरकार पिछले साल 'रायतु बंधु' नामक योजना की शुरुआत कर चुकी है जिसके तहत तेलंगाना के किसानों के खाते में सीधे लाभांश राशि पहुंचाई जाती है.

मीडिया में पहले से ही यह सुगबुगाहट थी कि मोदी सरकार अपने इस बजट में तेलंगाना जैसी किसी योजना की घोषणा कर सकती है.

बजट 2019 पर राहुल गांधी, ममता बनर्जी, अखिलेश समेत बाकी नेताओं ने क्या कहा?

इस बजट को विपक्षी पार्टियों ने लोकलुभावन बताया. विपक्षी पार्टियों का कहना है इस बजट को 2019 के लोकसभा चुनावों के मद्देनजर पेश किया गया है. 

सोशल मीडिया पर इस बजट को बीजेपी का चुनावी घोषणा पत्र बताया जा रहा है. 

जहाँ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बजट को जनता का बजट बताया है. वहीं किसानों और बेरोजगार युवाओं को लेकर मोदी सरकार की बेरूखी से काफी मर्माहत दिखे कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी. सदन मे उनकी खामोशी बहुत कुछ कह गयी।

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी

बजट पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्वीट कर कहा, 'पांच साल में आपकी नाकामी और आपके अहंकार ने किसानों का जीवन बर्बाद कर दिया है. 17 रुपये प्रतिदिन देना किसानों का अपमान है.' 

दरअसल, प्रधानमंत्री किसान योजना के तहत किसानों को दी जाने वाली सालाना राहत राशि को लेकर उन्होंने कटाक्ष किया है.

पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम

पूर्व वित्त मंत्री और कांग्रेस के नेता पी चिदंबरम ने कहा कि बजट में दो शब्द शिक्षा और रोजगार गायब, सरकार की नीति 'पकौड़ानॉमिक्स' की है. साथ ही उन्होंने कांग्रेस की इस घोषणा की नकल करने के लिए अंतरिम वित्त मंत्री का आभार कि देश के संसाधनों पर पहला हक गरीबों का है. यह 'वोट ऑन एकाउंट (लेखानुदान का प्रस्ताव) नहीं है, बल्कि 'एकाउंट ऑन वोट (वोट का हिसाब किताब) है.

पश्चिम बंगाल मुख्यमंत्री ममता बनर्जी

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी ने इस बजट को लेकर मोदी सरकार पर हमला किया है. उन्होंने कहा, 'इस सरकार का ये नैतिक अधिकार नहीं है कि वो अगले पांच साल के लिए बजट पेश करे. इस सरकार की एक्सपायरी डेट आ गई है. एक्सपायरी डेट के बाद जब आप कोई दवाई देते हैं तो क्या उसका कोई असर होता है? इसकी कोई कीमत नहीं रह जाती है. इस सरकार की भी कोई कीमत नहीं रहेगी.'

कांग्रेस नेता शशि थरूर

बजट पर कांग्रेस नेता शशि थरूर ने कहा कि यह पूरी कवायद लानत-मलामत की है. सिर्फ एक अच्छा काम हुआ है. मिडिल क्लास के लिए टैक्स स्लैब को बढ़ाया गया है. उन्होंने कहा कि किसानों को 6000 रुपए का जो मिनिमम सपोर्ट दिया गया है, वह हर महीने 500 रुपए होगा. क्या यह 500 रुपया सम्मान के साथ जीने के लिए काफी है?

कुमारस्वामी, मुख्यमंत्री कर्नाटक

वहीं कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने कहा, 'मैं पूछना चाहता हूं कि यह बजट वित्त विभाग द्वारा तैयार किया गया था या आरएसएस के द्वारा? इस बजट में नरेंद्र मोदी ने किसानों को कॉटन कैंडी दी है, जब मैंने लोन माफी की स्कीम लॉन्च की थी तो पीएम ने इसे लॉलीपॉप कहा था. बीजेपी के दोस्तों ने यह बजट तैयार किया है.'

कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे

कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, 'जैसा उनका 15 लाख का जुमला था, 10 करोड़ रोजगार 5 साल में देने का वादा था उसके बारे में बजट में कुछ ऐलान नहीं हुआ. किसानों के लिए कहा था कि उन्हें 6 हजार सालाना देंगे मतलब 500 रूपए हर महीने. वास्तव में तीन महीने में तो 2 हजार ही देंगे. बाकी 4 हजार बाद में देंगे. इस तरह वे वोटर्स को रिश्वत देने की कोशिश कर रहे हैं. इनकम टैक्स में 5 लाख की छूट का प्रस्ताव दे दिया. जैसे पार्टी में जिंदाबाद कहते हैं वैसे संसद में मोदी-मोदी-मोदी के नारे लगा रहे हैं ये क्या है? चुनावों को मद्देनजर रखते हुए ये पूरा बजट देश के सामने रखा, अगर ये वापस नहीं आएंगे तो ये वादे कौन पूरे करेगा. ये जुमला है, जैसे जुमले पहले थे वैसे ही ये हैं. मनरेगा में भी इस बार भी 60 हजार करोड़ है, अरे इन्फ्लेशन ही इतना है अगर बजट में आधा पर्सेंट भी नहीं बढ़ाया है, तो क्या फायदा है. ये समझ रहे हैं लोग वोट देंगे लेकिन इन्होने युवाओं, किसानों को धोखा दिया है. पीछे 5 साल में क्या एचीवमेंट रहा ये नहीं बताया."

समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव

समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने मोदी सरकार के आखिरी बजट पर ट्वीट कर निशाना साधा है. अखिलेश यादव ने कहा कि सरकार ने पिछले पांच साल में ईमानदारी से खाद नहीं बांटी. पांच सालों में 5-5 किलो खाद की चोरी कर अब उसे 6 रुपये में वापस करना चाहती है.अखिलेश यादव ने कहा कि दाम बढ़ाकर व वज़न घटाकर बीजेपी ने किसानों को दोहरी मार दी है. किसान बस चुनाव का इंतजार कर रहा है. किसान आगामी चुनाव में "बोरी की चोरी करने वाली भाजपा" का बोरिया-बिस्तर बांध देगा.

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