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गणतंत्र दिवस: रोचक इतिहास, प्रधानमंत्री नेहरू का दिया खास संदेश एवं यादगार पल

गणतन्त्र दिवस भारत का एक राष्ट्रीय पर्व है जो प्रति वर्ष 26 जनवरी को मनाया जाता है। इसी दिन सन् 1950 को भारत सरकार अधिनियम 1935 को हटाकर भारत का संविधान लागू किया गया था। 26 जनवरी को इसलिए चुना गया था क्योंकि 1930 में इसी दिन भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस  ने भारत को पूर्ण स्वराज घोषित किया था।

देश को आजादी 15 अगस्त 1947 को मिली, लेकिन आजाद भारत के लिए एक पुख्ता संविधान की जरूरत थी ताकि देशवासियों के मूल अधिकार, शासन प्रणाली और न्याय व्यवस्था सुचारू रूप से चल सकें और लोकतंत्र को मजबूती मिले। 

26 जनवरी 1950 को जब संविधान लागू हुआ तो देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने रेडियो के जरिये दुनिया को संबोधित किया था। पंडित नेहरू के भाषण में देश ही नहीं, दुनिया को, खासकर पश्चिमी देशों को एक संदेश था। पहले गणतंत्र दिवस पंडित नेहरू का वह भाषण बहुत ही दुर्लभ है। आजादी की रात वाला उनका भाषण तो लगभग सभी ने सुना है, लेकिन गणतंत्र दिवस पर उनका भाषण कम ही लोगों ने सुना है।

रेडियो पर अंग्रेजी में दिए उनके इस भाषण में खास तौर पर दुनिया के सभी देशों से चैन और अमन की अपील की गई थी। उन्होंने अपने भाषण मे कहा था युद्ध और शांति की मुहिम एक साथ चलने से पनपे असंतुलन को सुधारना होगा, पूरी दुनिया शांति चाहती है, जिसे देशों को समझना होगा। 

उन्होंने कहा था कि पश्चिमी देशों के उनके दौरे से यह साफ है कि दुनिया को अब शांति चाहिए। गणतंत्र दिवस पर भाषणों में आज भी हम भारत की शांतिप्रियता और विकास की पैरोकारी की ही बात करते हैं। शांति के लिए सबसे बड़ा खतरा पाकिस्‍तान बना हुआ है। चीन भी भारत को परेशान करता रहा है। इसलिए आज भी शांति के महत्‍व को समझना उतना ही जरूरी है, जितना पहले गणतंत्र दिवस के वक्‍त पर था।

पहला गणतंत्र दिवस दिल्ली के इरविन एम्पीथियेटर में मनाया गया था। इस जगह को अब मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम कहते हैं। इंडोनेशिया के राष्ट्रपति सुकर्णो गणतंत्र दिवस पर बतौर मुख्य अतिथि आमंत्रित थे। 

पहले राष्ट्रपति डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद ने जैसे ही तिरंगा फहराया था, तिरंग के फहराते ही दनादन 21 तोपों सलामी से राजधानी गूंज उठी थी। प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के झण्डा फहराने के साथ परेड की भी शुरुआत हो गई। 

देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू भी वहां मौजूद थे, उनके साथ सी राजगोपालाचारी भी थे, वे अंतिम ब्रिटिश वायसरॉय लॉर्ड माउंटबेटन की जगह गवर्नर- जनरल का पद संभाल रहे थे।

गणतंत्र दिवस का अर्थ था कि भारत अपनी ज़मीन से विदेशी राज के अंतिम निशान मिटाकर गणतंत्र राष्ट्रों की मंडली में शामिल होने जा रहा था।

किंग जॉर्ज VI ने भारत को अपनी ओर से शुभकामनाएं भेजी थीं और इसका आभार भी जताया कि नए स्वतंत्र हो रहे देश राष्ट्रमंडल देशों में शामिल होंगे।

हालांकि कुछ समय बाद ही किंग का निधन हो गया, भारत में इस शोक समाचार पर श्रद्धांजलि स्वरूप सार्वजनिक छुट्टी की गई थी।

1950 में हुई गणतंत्र दिवस परेड आज की तुलना में उतनी भव्य नहीं थी लेकिन फ़िर भी वह अपने आप में छाप छोड़ने लायक और भारतवासियों के दिलों में यादगार बनने योग्य तो थी ही।

थल, वायु और जल सेनाओं की कुछ टुकड़ियों ने इस परेड में हिस्सा लिया था, हालांकि उस समय किसी तरह की झाकियां नहीं निकाली गई थीं। जिस तरह मौजूदा वक्त में गणतंत्र दिवस की परेड राजपथ से होते हुए लाल क़िले तक जाती है, वैसा उस समय नहीं हुआ था। उस वक्त परेड स्टेडियम में ही हुई थी।

हवाई करतब दिखाने वाले जहाज़ों में जेट या थंडरबोल्ट शामिल नहीं थे, इनकी जगह डकोटा और स्पिटफ़ायर जैसे छोटे विमानों ने ये किया था।

जनरल फ़ील्ड मार्शल करिअप्पा भारतीय सेनाओं के पहले प्रमुख थे, जिन्होने जवानों की अपनी एक टुकड़ी को उन्होंने फ़ौजी हिंदी में कहा था, 

''आज हम भी आज़ाद, तुम भी आज़ाद और हमारा कुत्ता भी आज़ाद ''!!  

उनकी आवाज़ ने वहां जोश का एक अलग ही माहौल पैदा कर दिया था।

भारत में 26 जनवरी खास महत्व रखता है। इसी दिन भारत का संविधान लागू हुआ था यानि देश में कानून के राज की शुरुआत हुई। 26 जनवरी को राष्ट्रीय पर्व का दर्जा प्राप्त है। हर साल इस दिन को हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। भारत अपने गणतंत्र दिवस के मौके पर किसी विदेशी राष्ट्राध्यक्ष को मुख्य अतिथि के रूप में बुलाता है। इंडिया गेट पर राज्यों की झांकियां निकाली जाती हैं और राष्ट्रपति को 21 तोपों की सलामी दी जाती है। 

आइए जानते हैं कि भारत वासियों के लिए क्यों खास है यह दिन- 

वर्ष 1929 के दिसंबर महीने में लाहौर में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का अधिवेशन हुआ। इसकी अध्यक्षता पंडित जवाहरलाल नेहरू कर रहे थे। इस अधिवेशन में प्रस्ताव पास हुआ कि अगर अंग्रेजी हुकूमत 26 जनवरी 1930 तक भारत को डोमिनियन का पद नहीं देता है तो भारत खुद को पूरी तरह से स्वतंत्र घोषित कर देगा। 

इसके बावजूद 26 जनवरी 1930 तक जब अंग्रेज सरकार ने कुछ नहीं दिया तब कांग्रेस ने उस दिन भारत की पूर्ण स्वतंत्रता के निश्चय की घोषणा की और अपना सक्रिय आंदोलन शुरू किया। इस दिन जवाहर लाल नेहरु ने लाहौर में रावी नदी के किनारे तिरंगा फहराया। 

इसके बाद भारत ने 26 जनवरी 1930 को स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया। उस दिन से 1947 में देश के आजाद होने तक 26 जनवरी स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया जाता रहा। 

इसके बाद देश आजाद हुआ और 15 अगस्त को भारत के स्वतंत्रता दिवस के रूप में स्वीकार किया गया। हमारा संविधान 26 नवंबर 1949 तक तैयार हो गया था। तब जो नेता थे उन्होंने दो महीने और रुकने का निर्णय लिया और फिर 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू हुआ और इस दिन को तब से गणतंत्र दिवस के रुप में मनाया जाता है।

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