Satya Darshan

इसरो की एक और बड़ी उपलब्धि, चंद्रयान - 2 सफलतापूर्वक प्रक्षेपित

नयी दिल्ली | जुलाई 23, 2019

भारतीय अंतरिक्ष अनुंसधान संगठन (इसरो) ने अपनी उपलब्धियों के ताज में एक और नगीना जड़ते हुए सोमवार को महत्त्वाकांक्षी अभियान चंद्रयान-2 को पृथ्वी की कक्षा में सफलतापूर्वक प्रक्षेपित कर दिया। इसरो के अब तक के सबसे शक्तिशाली रॉकेट जीएसएलवी मार्क-3 ने सोमवार को अपराह्न 2 बजकर 43 मिनट पर गर्जना के साथ श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से उड़ान भरी और 16 मिनट बाद चंद्रयान-2 को पृथ्वी की अपेक्षित कक्षा में पहुंचा दिया। 

करीब तीन बजे इसके सफल प्रक्षेपण की घोषणा के साथ ही इसरो का मिशन कंट्रोल रूम जश्न में डूब गया। इस अभियान को 15 जुलाई को भेजा जाना था, लेकिन तकनीकी गड़बड़ी के कारण इसे अंतिम क्षणों में टाल दिया गया था। 

इस दौरान इसरो के मिशन कंट्रोल रूम में माहौल तनावपूर्ण था। इसरो के दो पूर्व अध्यक्ष ए एस किरण कुमार और के राधाकृष्णन दर्शक दीर्घा से पूरी प्रक्रिया को करीब से देख रहे थे। मिशन कंट्रोल रूम में मौजूद अधिकारियों के चेहरे पर आत्मविश्वास था लेकिन वे गंभीर दिखाई दे रहे थे। चंद्रयान-2 के पृथ्वी की कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित होने की घोषणा के साथ ही मिशन कंट्रोल रूम में खुशी की लहर दौड़ पड़ी। वैज्ञानिकों ने एक दूसरे को गले लगाया और बधाई दी। 

इसरो के अध्यक्ष के शिवन बेहद खुश दिखाई दे रहे थे। उन्होंने कहा, 'आज का दिन भारत में अंतरिक्ष, विज्ञान और प्रौद्योगिकी के लिए ऐतिहासिक दिन है। मुझे यह घोषणा करते हुए अपार खुशी हो रही है कि जीएसएलवी मार्क-तीन यान ने चंद्रयान 2 को अपेक्षित कक्षा में पहुंचा दिया है। यह हमारे लक्ष्य से 6,000 किमी ज्यादा है और बेहतर है। अब उपग्रह के पास ज्यादा ईंधन होगा।'

शिवन ने कहा कि टीम इसरो और संगठन के विभिन्न केंद्रों के इंजीनियरों, तकनीकी सहायकों, तकनीशियनों और सपोर्टिंग स्टाफ की मदद से दुष्कर काम संभव हो पाया। इसके लिए गठित विशेषज्ञों की टीम पिछले सात दिन से लगातार काम कर रही थी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि मिशन की हर प्रणाली सही ढंग से काम कर रही है। उपग्रह टीम ने चंद्रयान-2 के सपने का साकार करने के लिए पिछले 18 महीने में काफी मेहनत की है। 

इसरो प्रमुख ने कहा, 'चंद्रयान-2 अब पृथ्वी की कक्षा में पहुंच चुका है, इसलिए इसकी कमान अब उपग्रह टीम के पास आ गई है। रॉकेट ने वह काम कर दिया है जो उपग्रह टीम को उसकी ऊंचाई बढ़ाने के लिए कल करना पड़ता। अंतिम चरण में लैंडर को चांद की सतह पर अपेक्षित स्थान पर सुरक्षित उतारा जाएगा। 15 मिनट का यह समय बेहद मुश्किल दौर होगा।'

उधर दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मिशन पर करीबी नजर बनाए हुए थे। उन्होंने ट्वीट किया, 'यह भारत के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है। चंद्रयान-2 का प्रक्षेपण हमारे वैज्ञानिकों के कौशल और विज्ञान की नई सीमाओं को लांघने की 130 करोड़ भारतीयों के संकल्प का प्रतीक है। आज हर भारतीय गौरवान्वित है।' 

संसद के दोनों सदनों ने भी इस उपलब्धि पर इसरो के वैज्ञानिकों को बधाई दी।  राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने ट्वीट किया, 'श्रीहरिकोटा से चंद्रयान-2 का ऐतिहासिक प्रक्षेपण सभी भारतीयों के लिए गौरव का क्षण है। हमारे वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को भारत के स्वदेशी अंतरिक्ष कार्यक्रम को आगे ले जाने के लिए बधाई।' 

603 करोड़ रुपये की लागत से बने 3,850 किग्रा वजनी चंद्रयान-2 में एक ऑर्बिटर, एक लैंडर और एक रोवर शामिल है। पृथ्वी से चांद की औसत दूसरी 3,84,000 किमी है। विक्रम लैंडर मिशन के 48वें दिन चांद की सतह पर उतरेगा। अगर यह अभियान सफल रहता है तो भारत चांद पर यान उतारने वाला दुनिया का चौथा देश होगा। इससे पहले रूस, अमेरिका और चीन यह उपलब्धि हासिल कर चुके हैं। 

नील आर्मस्ट्रांग के चंद्रमा की सतह पर उतरने की 50वीं वर्षगांठ गत शनिवार मनाई गई थी।  जीएसएलवी मार्क-3 को 15 जुलाई को प्रक्षेपित किया जाना था लेकिन तकनीकी गड़बड़ी के कारण इसे एक घंटे पहले टाल दिया गया था। 375 करोड़ रुपये की लागत से बने जीएसएलवी मार्क-3 रॉकेट ने 16 मिनट की उड़ान के बाद चंद्रयान-2 को 170 गुणा 40400 किमी ऊंची कक्षा में पहुंचा दिया। यहां से चंद्रयान-2 विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर के साथ करीब 3.844 किमी का सफर तय करके चांद तक पहुंचेगा।

शिवन ने कहा कि करीब 500 उद्योगों ने जीएसएलवी मार्क-3 के विकास में योगदान दिया जबकि 120 उद्योगों ने 3.8 टन के उपग्रह के विकास में मदद की। इसी तरह भारतीय विज्ञान संस्थान और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों सहित 15 से अधिक अकादमिक संस्थानों ने चंद्रयान-2 मिशन के विकास में साथ दिया। 

कॉरपोरेट जगत से महिन्द्रा समूह के चेयरमैन आनंद महिन्द्रा इसरो को बधाई देने वाले पहले उद्योगपति थे। उन्होंने ट्वीट किया, 'मेरी सांसें अटकी हुई थीं और मैं खुद को सामान्य करने के लिए इसरो के वैज्ञानिकों को एकदूसरे को गले लगाने का इंतजार कर रहा था। हमारी क्रायोजेनिक प्रौद्योगिकी को मान्यता मिलना एक उल्लेखनीय उपलब्धि है। इससे हमें और कई चंद्र अभियानों में मदद मिलेगी। मैं अपने वैज्ञानिकों को सलाम करता हूं।'

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