Satya Darshan

23 जुलाई, राष्ट्रीय प्रसारण दिवस: बहुजन हिताय से आरंभ हुआ सफर सफलता के 92 वर्ष पूरे किया

आज प्रसारण दिवस है. वर्ष 1927 में 23 जुलाई (तिलक का जन्मदिवस भी) मुंबई से इस दिन रेडियो प्रसारण आरम्भ हुआ था. वैसे 1923 में भी प्रयास हुआ था. आज तो 400 से अधिक स्टेशन हैं, 90% से अधिक क्षेत्र और 99% से अधिक जनसँख्या की रेडियो प्रसारण तक पहुँच है. बड़े-बड़े भारी रेडियो की तुलना में आज का ट्रांजिस्टर सेट तो सौंवा भाग है.

दिवस विशेष | जुलाई 23, 2019

देश में रेडियो प्रसारण आज 92 वर्ष पूरे कर रहा है. देश के लिए नई उपलब्धियों का और रेडियों श्रोताओं के लिए यह खुशी का दिन है. राष्ट्रीय प्रसारण दिवस भारत में प्रत्येक वर्ष 23 जुलाई को मनाया जाता है. आज के दिन वर्ष 1927 में इंडियन प्रसारण कंपनी ने बम्बई स्टेशन से रेडियो प्रसारण की शुरूआत की थी. सन् 1923 में पहला रेडियो कार्यक्रम बॉम्बे रेडियो क्लब ने प्रसारित किया था. 23 जुलाई 1927 को इंडियन ब्रॉडकास्टिंग कंपनी लिमिटेड नामक कंपनी एवं तत्कालीन भारत सरकार के बीच एक समझौता हुआ था. जिसके तहत 23 जुलाई 1927 को प्रायोगिक तौर पर बम्बई और 26 जुलाई 1927 को कलकत्ता में प्रसारण शुरू किया गया.

इन ट्रांसमीटरों को सरकार ने वर्ष 1930 में सरकार ने अपने नियंत्रण में ले लिया और भारतीय प्रसारण सेवा के नाम से उन्हें संचालित करना शुरू कर दिया. सन् 1936 में भारतीय प्रसारण सेवा का नाम बदलकर ऑल इंडिया रेडियो कर दिया गया. वर्ष 1956 से ऑल इंडिया रेडियो को आकाशवाणी का नाम दे दिया गया.

ऑल इंडिया रेडिया जनता को सूचना देने शिक्षित करने एवं मनोंरजन करने के लिए अपनी सेवाएं प्रदान कर रहा है। यह प्रारम्भिक दौर से ही बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय के उद्देश्य के साथ संचालित हो रहा है। मुम्बई से बढ़ा कांंरवा 414 के पायदान तक पहुच चुका है यानि कि मौजूदा परिवेश में आकाशवाणी के 414 स्टेशन है। यह भाषाओं की संख्या के मामले में दुनिया के सबसे बड़े प्रसारण संगठनों में से एक है।

दुनिया में रेडियो प्रसारण का इतिहास काफी पुराना नहीं है. सन 1900 में मारकोनी ने इंग्लैण्ड से अमरीका बेतार संदेश भेजकर व्यक्तिगत रेडियो संदेश की शुरूआत की थी. इसके बाद कनाडा के वैज्ञानिक रेगिनाल्ड फेंसडेन ने 24 दिसम्बर 1906 को रेडियो प्रसारण की शुरूआत की.

उन्होंने जब वायलिन बजाया तो अटलांटिक महासागर में विचरण कर रहे जहाजों के रेडियो आपरेटरों ने अपने-अपने रेडियो सेट में सुना. कल्पना कीजिए कितना सुखद क्षण रहा होगा, लोग झूम उठे होंगे. संचार युग में प्रवेश का यह प्रथम पड़ाव था. उसके बाद पिछले वर्षों का इतिहास बड़ा रोचक है. विज्ञान ने खूब प्रगति की. संचार के क्षेत्र में दुनिया अब बहुत आगे बढ़ चुकी है.

दुनिया में इसकी पहचान एक महत्‍वपूर्ण प्रसारण सेवा के रूप में है और इसका समाचार सेवा प्रभाग देश और विदेशों में श्रोताओं को समाचारों और विचारों से लगातार अवगत करा रहा है. ऑल इंडिया रेडियो यानी वर्तमान का आकाशवाणी इस शब्द को मैसूर के धाक़ड़ विद्वान और चिंतक एम.वी.गोपालस्वामी ने गढ़ा. आकाशवाणी का अर्थ है आकाश से मिला संदेश. पंचतंत्र की कथाओं में इस शब्द का जिक्र मिलता है. देश के स्वतंत्र होने के बाद ऑल इंडिया रेडियो को आकाशवाणी ही कहा जाने लगा.

1947 में भारत-पाकिस्तान के विभाजन के बाद भारत में रेडियों के छह स्टेशन आए और 3 पाकिस्तान में चले गए. आज आजादी के 70 साल बाद भारत का प्रसारण तंत्र 414 रेडियो स्टेशनों के जरिए भारत के 92 प्रतिशत भूभाग और 125 करोड़ देशवासियों तक बीच पहुंचने का अनुपम औऱ सरल साधन है. अपनी विदेश प्रसारण सेवा में यह 11 भारतीय भाषाओं और 16 विदेशी भाषाओं में 100 देशों तक अपनी पहुंच रखता है.

बदल गया रेडियो

रेडियो के स्वरूप में परिवर्तन और संशोधन सदा भारत ही नही दुनियां भर में होते रहे हैं. कहां वह बड़े वॉल्व वाला ड्राइंगरूम में रखा रहने वाला मर्फी (बड़ा साइज का रेडियों) का स्थिर रेडियो, जो बाद में सॉलिड स्टेट हो गया और फिर चलता-फिरता दो बैट्री से चलने वाला एक ट्रांजिस्टर रेडियों बनकर हम सबके सामने आया. ट्रंक के भार से किताब के वजन तक पहुंचने में रेडियो का अपना एक लंबा समय और अनुभव लगा है. कंधे पर लटकने वाले ट्रांजिस्टर को कान में लगा कर इअर फोन से सुनते युवा इस संस्कृति के वाहक हैं. आज मोबाइल फोन के माध्यम से रेडियो अब हरेक व्यक्ति की जेब में पहुंच गया है और इंटरनेट और एप्स के जरिए रेडियो ने विश्व भर में अपनी पहुंच बना ली है, जो पहले केवल सीमित क्षेत्र तक होता था.

गांवों के विकास में रेडियो की बड़ी भूमिका

रेडियो एक ग्रामीण भारत के विकास सरत और आसान उपकरण है, जो किसी सामाजिक समूह की संचार आवश्यकताओं की पूर्ति का एक बेहतरीन मंच देश को उपलब्ध कराता है. यही नहीं, यह समय पर प्रासंगिक जानकारी प्रदान करने के लिए सबसे सरल और तीव्र गति का साधन भी आल इंडिया रेडियो यानी आकाशवाणी है. सामाजिक, सांस्कृतिक, नैतिक, आध्यात्मिक और आर्थिक मांगों की आवाज उठाने के लिए, सांस्कृतिक पहचान को पुनर्स्थापित करने में इसकी भूमिका सराहनीय है.

ग्रामीण क्षेत्रो में रेडियो समुदायों (कम्यूनिटी रेडियो) को उनके सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक वातावरण को प्रभावित करने वाले एक संवाद और निर्णय में लोगों को हिस्सेदारी की शक्ति प्रदान करता है. यह एक व्यापक, सुलभ, किफायती और लोकप्रिय संचार का माध्यम है जो सामाजिक जागरूकता बढ़ाने, स्थानीय समुदायों में एकजुटता के लिए प्रेरित करता है. ग्रामीण समुदायों की राय जानने, उनकी जरूरतों को समझने और नवजीवन की आकांक्षाओं के लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति के लिए रेडियो देशवाशियों के लिए एक मंच प्रदान करता है.

रेडियो की अपनी अनूठी विशेषता है. इसकी पहुंच ड्राइंग रूम या बेडरूम तक सीमित नहीं है, बल्कि रसोईघर, कार, स्टडी टेबल, खेत, बस, ट्रक, ढाबे, स्कूल, पंचायत और युवाओं की जेब तक सूचना, शिक्षा, मनोरंजन, प्रेरणा और मार्गदर्शन पहुंचाने का सबसे सस्ता, सरल और तीव्र माध्यम है.

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