Satya Darshan

दिल्ली की बेहद लोकप्रिय CM रहीं शीला दीक्षित का निधन, कई दिनों से चल रहीं थीं बीमार

नयी दिल्ली (एसडी) | जुलाई 20, 2019

दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित का निधन हो गया है. दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया. आज यानी शनिवार सुबह उन्हें दिल्ली के एक्सकॉर्ट्स अस्पताल में भर्ती कराया गया था. दोपहर 3.30 बजे उन्होंने अंतिम सांस लीं.

शीला दीक्षित दिसंबर 1998 से दिसंबर 2013 तक दिल्ली की तीन बार मुख्यमंत्री रह चुकी थीं. मुख्यमंत्री रहने के बाद शीला दीक्षित केरल की राज्यपाल भी रह चुकी थीं. वर्तमान में वे दिल्ली प्रदेश कांग्रेस की अध्यक्ष थीं. वे पिछले कुछ समय से बीमार चल रही थीं. 81 साल की उम्र में उनका निधन हो गया. ​ 

बता दें कि अपने निधन से कुछ दिनों पहले तक वह राजनीति में खासी ऐक्टिव थीं और हाल ही में उन्होंने दिल्ली में नए जिलाध्यक्षों की नियुक्ति भी की थी। 

यही नहीं कांग्रेस पार्टी दिल्ली के आगामी विधानसभा चुनावों में उन्हें सीएम के चेहरे के तौर पर उतारने की तैयारी में थी. दिल्ली में कांग्रेस की सरकार जाने के बाद केरल की राज्यपाल भी रही थीं. इसके अलावा कांग्रेस ने यूपी विधानसभा चुनाव में उन्हें मुख्यमंत्री के चेहरे के तौर पर भी पेश किया था. शीला को हमेशा से गांधी-नेहरू परिवार का करीबी माना जाता था.

कांग्रेस की कद्दावर नेता रहीं शीला दीक्षित का जन्म 31 मार्च 1938 को पंजाब के कपूरथला में हुआ. उन्होंने दिल्ली के कॉन्वेंट ऑफ जीसस एंड मैरी स्कूल से पढ़ाई की और फिल दिल्ली यूनिवर्सिटी के मिरांडा हाउस कॉलेज से मास्टर्स ऑफ आर्ट्स की डिग्री हासिल की. शीला दीक्षित साल 1984 से 1989 तक उत्तर प्रदेश के कन्नौज से सांसद रहीं. बतौर सांसद वह लोकसभा की एस्टिमेट्स कमिटी का हिस्सा भी रहीं.

शीला दीक्षित को दिल्ली का चेहरा बदलने का श्रेय दिया जाता है. उनके कार्यकाल में दिल्ली में विभिन्न विकास कार्य हुए. शीला दीक्षित ने महिलाओं की स्थिति पर संयुक्त राष्ट्र आयोग में 5 साल (1984-1989) तक भारत का प्रतिनिधित्व किया. वह प्रधानमंत्री कार्यालय में 1986 से 1989 तक संसदीय कार्यराज्यमंत्री रहीं. साल 1998 के लोकसभा चुनावों में शीला दीक्षित को भारतीय जनता पार्टी के लाल बिहारी तिवारी ने पूर्वी दिल्ली क्षेत्र से मात दी. बाद में वह मुख्यमंत्री बनीं. शीला दीक्षित गोल मार्केट क्षेत्र से 1998 और 2003 से चुनी गईं. इसके बाद 2008 में उन्होंने नई दिल्ली क्षेत्र से चुनाव लड़ा.

शीला दीक्षित को समन्वयवादी राजनीति और विकास का चेहरा माना जाता रहा है. दिल्ली में मेट्रो के नेटवर्क का विस्तार हो या फिर बारापूला जैसे बड़े रोड नेटवर्क उन्हीं की देन माने जाते हैं. दिल्ली में उनके सहयोगी मंत्री रहे महाबल मिश्रा ने शीला दीक्षित को श्रद्धांजलि देते हुए कहा उनके निधन से हुए नुकसान की भरपाई नहीं की जा सकती. 

View More

Search

Search by Date

जनमत

वाराणसी से पीएम मोदी लोस चुनाव 2019 जीतेंगे?

Navigation

Follow us

Mailing list

Copyright 2018. All right reserved