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50 खरब डॉलर इकोनॉमी आकाश से नहीं टपकेगी, कांग्रेस सरकारों ने रखी मजबूत नींव, छोड़ी थी 18 खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था- प्रणब मुखर्जी

नयी दिल्ली | जुलाई 19, 2019

पूर्व राष्ट्रपति डॉ प्रणब मुखर्जी ने कहा है कि आधुनिक भारत की नींव उन संस्थापकों ने रखी थी, जिनका योजनाबद्ध अर्थव्यवस्था में मज़बूत भरोसा था, जैसा आजकल नहीं है, जब योजना आयोग को खत्म कर दिया गया है.

राजधानी दिल्ली में मावलंकर हॉल स्थित कॉन्स्टीट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित समृद्ध भारत कार्यक्रम में पूर्व राष्ट्रपति ने कहा, "जो लोग 55 साल के कांग्रेस शासन की आलोचना करते हैं, वे यह बात नज़रअंदाज़ कर देते हैं कि आज़ादी के वक्त भारत कहां था, और हम कितना आगे आ चुके हैं... हां, अन्य लोगों ने भी योगदान दिया, लेकिन आधुनिक भारत की नींव हमारे उन संस्थापकों ने रखी थी, जिन्हें योजनाबद्ध अर्थव्यवस्था में मज़बूती से भरोसा था, जबकि आज ऐसा नहीं है, जब योजना आयोग को ही खत्म कर दिया गया है..."

डॉ प्रणब मुखर्जी ने कहा, "जो 50-55 साल के कांग्रेस शासन की आलोचना करते हैं, वे यह भूल जाते हैं कि हमने कहां से शुरू किया था, और कहां जाकर छोड़ा था... अगर भारत की अर्थव्यवस्था को 50 खरब अमेरिकी डॉलर तक ले जाना है, तो हमने 18 खरब डॉलर की मज़बूत नींव छोड़ी थी, जो लगभग शून्य से शुरू हुई थी..."

उन्होंने कहा कि भारत को भविष्य में 50 खरब अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था बना पाने की नींव पिछली सरकारों ने रखी थी, जिनमें जवाहरलाल नेहरू, डॉ मनमोहन सिंह और पी.वी. नरसिम्हा राव की सरकारें भी शामिल थीं.

पूर्व राष्ट्रपति ने कहा, "वित्तमंत्री ने बजट पेश करते हुए कहा था कि वर्ष 2024 तक भारत की अर्थव्यवस्था 50 खरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच जाएगी... लेकिन यह दर्जा आसमान से उतरकर नहीं आएगा... इसके लिए मज़बूत नींव मौजूद है, और उस नींव को अंग्रेज़ों ने नहीं, आज़ादी के बाद हिन्दुस्तानियों ने ही बनाया था..."

डॉ प्रणब मुखर्जी ने कहा, "भारत ने तेज़ी से तरक्की की, क्योंकि जवाहरलाल नेहरू तथा अन्य ने IIT, ISRO, IIM, बैंकिंग नेटवर्क आदि की स्थापना की... इसे डॉ मनमोहन सिंह और नरसिम्हा राव द्वारा अर्थव्यवस्था का उदारीकरण करने से भी मदद मिली, जिससे भारत की आर्थिक संभावनाएं बेहद बढ़ गईं... उसी बुनियाद पर वित्तमंत्री आज यह दावा कर सकते हैं कि भारत 50 खरब अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था बन जाएगा..."

समृद्ध भारत फाउंडेशन द्वारा आयोजित व्याख्यान में उन्होंने कहा, 'पंचवर्षीय योजनाओं ने दूसरे लोगों के बीच अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य, शिक्षा के लिए दृष्टिकोण का निर्माण किया. इन योजनाओं के आधार पर निवेश किया जाता था.' मुखर्जी ने आगे कहा कि वह इस बात से सहमत हैं कि गैर-कांग्रेसी गवर्नरों ने भी देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. उन्होंने कहा कि मंगलयान को संभव बनाया गया है क्योंकि जादू से नहीं बल्कि निरंतर प्रयासों से जमीनी स्तर पर काम किया जाता है.

बता दें कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के जरिए मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का पहला बजट पेश किया गया था. इस बजट में भारत को आने वाले सालों में 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने की बात कही गई थी.

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