Satya Darshan

नवजोत सिंह सिद्धू और बाबाजी का ठुल्लू

80 के दशक में नवजोत सिंह सिद्धू भारतीय क्रिकेट के चमकते सितारे थे. अपने क्रिकेट के जौहर दिखाकर उन्होंने देश के करोड़ों लोगों का दिल जीत लिया. क्रिकेट के रत्नो मे एक सिद्धू, उन दिनों बहुत सीधे-साधे और सरल स्वभाव के थे।

सुरेशचंद्र रोहरा | जुलाई 19, 2019

द कपिल शर्मा शो में नवजोत सिंह सिद्धू खूब ठहाके लगाते थे. बात-बात में आपके मुंह से  शेरो-शायरी के फूल झरते थे. और जब कभी कपिल शर्मा किसी पर तंज करते, कहते- बाबाजी का ठुल्लू ! तो नवजोत सिंह सिद्धू हो हो कर हंसने लगते. आज सिद्धू उसी मोड़ पर खड़े हैं. और कहा जा सकता है- नवजोत सिंह सिद्धू आपको राजनीति मे क्या मिला… बाबा जी का ठुल्लू  !

नवजोत सिंह सिद्धू जब तलक भाजपा में थे, उनका सितारा बुलंद होता चला गया. पंजाब की राजनीति में उनके पांव मजबूत होते चले गए एक क्रिकेटर को सन्यास के बाद कौन पूछता है मगर अपनी बेजोड़ कलाकारी के कारण नवजोत सिंह सिद्धू जहां टेलीविजन के छोटे पर्दे पर अपनी पहचान और जगह बनाने में कामयाब हुए वहीं राजनीति में पग रखा तो भाजपा ने उन्हें हाथों-हाथ लिया. यही नहीं उनकी पत्नी नवजोत कौर को भी ‘मंत्री’ पद मिला.

यह वही सिद्धू है जिन्होंने कांग्रेस के बड़े चेहरे राहुल गांधी को ‘पप्पू’ कह कर संबोधित किया था और उनका खूब माखौल उड़ाते रहे. आज सिद्धू दु:ख भरे संक्रमण के दिन बिता रहे हैं. राजनीति में हाशिए पर हैं, टेलीविजन की दुनिया से आउट भाजपा से बाहर सत्ता विमुख आइए! नवजोत सिंह सिद्धू की पड़ताल करें देखें कैसी है- सिद्धू की हस्ती, और बखत..

सबसे बुरे दिन चल रहे सिद्धू के

80 के दशक में नवजोत सिंह सिद्धू भारतीय क्रिकेट के चमकते सितारे थे. अपने क्रिकेट के जौहर दिखाकर उन्होंने देश के करोड़ों लोगों का दिल जीत लिया. क्रिकेट के रत्नो मे एक सिद्धू, उन दिनों बहुत सीधे-साधे और सरल स्वभाव के थे. जैसा कि उन्होंने स्वयं एक साक्षात्कार में बताया था कि किसी के सामने उनके बोल नहीं फूटते थे, ऐसे थे सिद्धू. और अंग्रेजी तो उन्होंने कभी पढ़ी नहीं, सो अंग्रेजी बोलते, वे क्रिकेटर साथियों का मुंह देखते रह जाते थे.

आज जो मकबूलियत सिद्धू को मिली है उसके पीछे उनके मुंह से बारंबार फूलों की तरह झरती शायरी है. उन दिनों वे शायरी भी नहीं बोल पाते थे. मगर उन्होंने धीरे-धीरे स्वयं को मजबूत बनाया और एक आधार स्तंभ बन गए .फिर एक समय आया जब रिटायरमेंट के बाद टीवी शो में मेहमां बतौर आने लगे. इसी बीच सिद्धू को राजनीति का चस्का लगा और भाजपा में लालकृष्ण आडवाणी के आशीर्वाद से सांसद बन गए. मगर जब नरेंद्र मोदी का राजनीति में पदार्पण हुआ तो सिद्धू की राजनीतिक महत्वाकांक्षा टकराने लगी.वह पंजाब को अपने हाथों में रखना चाहते थे जो

भाजपा  नेतृत्व को मंजूर नहीं हुआ. बेबस सिद्धू,  कांग्रेस में चले गए. जहां उन्हें बहुत कुछ फ्री हैंड मिला मगर जब वे पंजाब के सबसे शक्तिशाली राजनीतिक चट्टान से भिड़ने लगे तो, उनके पर काट दिए गए… आज नवजोत सिंह सिद्धू न इघर के रहे न उधर के…आज अपने सबसे बुरे दिनों को जी रहे हैं सिद्धू.

दल बदल की छवि से नुकसान

नवजोत सिंह सिद्धू जब तलक भाजपा में थे उन्हें बहुत कुछ मिला. मगर अति महत्वाकांक्षा की दौड़ में सिद्धू ने अपना सब कुछ अपने हाथों से तोड़ डाला. लुटा डाला. भाजपा में रहते इन्हें अमृतसर से सांसद बनने का स्वर्णिम अवसर मिला इस दरम्यान भाजपा आकाली दल की गवर्नमेंट में अपनी डा. पत्नी और हमनाम नवजोत कौर को स्वास्थ्य मंत्री का सम्मानजनक पद मिला . यह माना जा रहा है कि सिद्धू अगरचे निष्ठा पूर्वक भाजपा में बने रहते तो आगे उन्हें बहुत कुछ मिलता.मगर उन्हें लगने लगा, मैं सर्वथा योग्य हूं और मेरे बगैर भाजपा शून्य हो जाएगी. इस सोच के चलते उन्होंने बगावत करनी शुरू कर दी और दलबदल करके कांग्रेस में आ गए.

नवजोत सिंह सिद्धू के दल बदल से जहां उनकी छवि खराब हुई, वहीं उनके हाथ से सब कुछ निकलता चला गया. कांग्रेस में आकर सांसदी  खोनी पड़ी अब अमृतसर से अनुपम खेर की पत्नी किरण खेर सांसद बन बैठी है .दूसरी तरफ उनकी पत्नी को भी क्लीनिक मे बैठकर मरीज देखने पड़ रहे हैं .कांग्रेस में सिद्धू की बुरी गति हुई यहां भी एक मात्र कारण उनका अहम और अति महत्वाकांक्षा ही है.

“कैप्टन” से पंगा भारी पड़ा

नवजोत सिंह सिद्धू नि:सन्देह एक शानदार व्यक्तित्व के स्वामी है .जहां उनकी पहचान राष्ट्रव्यापी है, वहीं जब मंच से संबोधन करते हैं तो लोगों को मंत्रमुग्ध करने की अद्भुत क्षमता उनमें है. अपनी इन्हीं क्वालिटी के कारण सिद्धू में ‘अहम’ उत्पन्न हुआ और शायद यही अहम ही वह कारण है जो उन्हें पंजाब के मुख्यमंत्री और राहुल सोनिया गांधी के सबसे विश्वास्त हाथ   कैप्टन अमरिंदर सिंह से दो-दो हाथ करा बैठा. सिद्धू को अहम था की वे सीधे राहुल गांधी से ‘हाथ’ मिलाते हैं उन्हें अहम था उनकी हस्ती बड़ी है. उन्हें आत्म विश्वास था कि वे अर्थात सिद्धू जहां खड़े हो जाते हैं लाइन वहीं से शुरू होती है.

अपने अहम के कारण ही उन्होंने एक दफे एक पत्रकार को कहा था की उनके कैप्टन सिर्फ एक है… उनका इशारा राहुल गांधी की तरफ था. मगर यह ‘तंज’ उन्हें पंजाब के शेर अमरिंदर सिंह से रार करा बैठा और एक स्वर मैं पंजाब के मंत्री गण सिद्धू पर पिल पड़े. सिद्धू अगर कैप्टन अमरिंदर सिंह से हाथ मिलाकर चलते तो कांग्रेस पार्टी का भला होता ही उनका भविष्य भी उज्जवल होता .उन्हें आज इस तरह पंजाब के कैबिनेट मंत्री के ‘पद’ को छोड़ने और कोप भवन में जाने की जरूरत नहीं पड़ती.

अब क्या करेंगे श्रीमान सिद्धू

नवजोत सिंह सिद्धू ने दुनिया देखी है. खूब उतार-चढ़ाव देखे हैं अब उन्हें क्या करना चाहिए और क्या करेंगे यह मंथन करें तो कहा जा सकता है राजनीति की सांप सीढ़ी के खेल में सिद्धू की बहुत बुरी गत बनी है. पंजाब के ‘कैप्टन’ के सामने कांग्रेस के बड़े ʼकैप्टनʼ राहुल की भी नहीं चली. और सिद्धू को राजनीति के मैदान से पेवेलियन जाना पड़ा है.

अब उन्हें ‘आप’ पार्टी आमंत्रित कर रही है. आप पार्टी पंजाब में बुरे दिन देख रही है क्या सिद्धू आप ज्वाइन करेंगे या कांग्रेस में मौन और धैर्य रखकर बढ़ेंगे ? इधर कपिल शर्मा शो की मेजबानी भी नरेंद्र मोदी से पंगा लेने के कारण कपिल शर्मा खो बैठे हैं  वहां अब  उनकी ठौर नहीं . नवजोत सिंह सिद्धू के यह दिन चिंतन मनन के हैं बैठकर सोचे कि उनसे क्या गलती हो गई है जो बैठे-बिठाए सब कुछ चला गया… आज उनके पास कपिल शर्मा शो का बाबाजी का ठुल्लू के अलावा है क्या.

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