Satya Darshan

सुप्रीम कोर्ट में हो गई सीबीआई की एंट्री

जेपी सिंह | जुलाई 10, 2019

उच्चतम न्यायालय में बेंच फिक्सिंग का मामला लगातार गहराता जा रहा है। वकील, उद्योगपति और कोर्ट स्टाफ के बीच साठगांठ से मुकदमों की मनमानी लिस्टिंग और आदेश टाइप करने में गड़बड़ी की बार-बार शिकायतें मिल रही थीं। इन शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने फैसला लिया है कि उच्चतम न्यायालय की रजिस्ट्री में गड़बड़ी की जांच अब सीबीआई के अफसर करेंगे।

फैसले के अनुसार सीबीआई के एसएसपी, एसपी और इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारी डेप्यूटेशन पर उच्चतम न्यायालय रजिस्ट्री में एडिशनल, डिप्टी रजिस्ट्रार और ब्रांच अफसर के पद पर तैनात किए जाएंगे। इनकी मदद दिल्ली पुलिस भी करेगी।यह अफसर मामलों की सुनवाई की तारीख में हेराफेरी और कर्मचारियों-वकीलों के चाल-चलन पर नजर रखेंगे।

इस आदेश के साथ ही उच्चतम न्यायालय के इतिहास में नया पन्ना जुड़ गया। उच्चतम न्यायालय के इतिहास में ऐसा पहली बार हो रहा है जब सीबीआई की सबसे ऊंची अदालत की रजिस्ट्री में प्रवेश हो रहा है। यानी आइंदा गड़बड़ी वाली घटनाओं की जांच में सीबीआई के अधिकारियों की मदद के लिए दिल्ली पुलिस का अमला भी होगा।

हाल के महीनों में रजिस्ट्री या कोर्ट स्टाफ की कारगुजारियां उजागर हुई हैं। बिना बेंच के निर्देश के मुकदमों की मनमाने ढंग से लिस्टिंग की कई जजों और बेंच की ओर से मिली शिकायतों के बाद चीफ जस्टिस ने ये फैसला किया है। इस संबंध में केंद्र सरकार को भी जानकारी दे दी गई है।

इस मामले में उच्चतम न्यायालय कह चुका है कि उसके आदेश में फॉरेंसिक ऑडिटर का नाम बदल दिया गया। सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले फरवरी में अपने दो कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया था।

यह मामला एरिक्सन मामले में उद्योगपति अनिल अंबानी को कोर्ट में हाजिर होने को लेकर था. इसमें कोर्ट के आदेश में इस तरह छेड़छाड़ की गई जिससे ऐसा लगा कि अनिल अंबानी को कोर्ट में खुद हाजिर होने से छूट दी गई है। बाद में आदेश में छेड़छाड़ को लेकर मामला दर्ज किया गया।

आम्रपाली मामले में उच्चतम न्यायालय की एक बेंच कह चुकी है कि यह दुर्भाग्यपूर्ण, हैरान और चकित करने वाला है कि इस अदालत के आदेशों में हेराफेरी और उन्हें प्रभावित करने की कोशिशें हो रही है। यह उच्चतम न्यायालय के लिहाज से काफी निराशाजनक है। इसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। इससे कुछ दिन पहले भी इसी तरह का मामला जस्टिस आरएफ नरीमन की अदालत में हुआ और अब फिर से यह हुआ है।

गौरतलब है कि उच्चतम न्यायालय के वकील उत्सव बैंस ने आरोप लगाया था कि उच्चतम न्यायालय में केसों की लिस्टिंग में दलालों का हस्तक्षेप रहता है। न्यायालय ने वकील उत्सव बैंस के आरोपों पर एक सदस्यीय जांच पैनल भी गठित किया है। उत्सव ने आरोप लगाया था कि सुप्रीम कोर्ट में कुछ बिचौलिए केसों की मनमुताबिक लिस्टिंग जैसे काम कराने के लिए तैयार रहते हैं।

पैनल की अध्यक्षता उच्चतम न्यायालय के पूर्व जज एके पटनायक कर रहे हैं। जस्टिस अरुण मिश्रा ने इस मामले में दो महीने पहले आईबी चीफ, दिल्ली पुलिस कमिश्नर और सीबीआई डायरेक्टर से अपने चैम्बर में मुलाकात की थी।

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई पर यौन शोषण के मामले से जुड़े ‘बेंच फिक्सिंग’ मामले में जस्टिस अरुण मिश्रा की अध्यक्षता में केस की सुनवाई कर रही तीन जजों की स्पेशल बेंच ने सख्त लहजे में कहा था कि हम हमेशा सुनते हैं कि कोर्ट में ‘बेंच फिक्सिंग’ हो रही है। यह हर हाल में बंद होनी चाहिए।

पिछले 3-4 साल से जिस तरह से आरोप लगाए जा रहे हैं, उससे तो यह संस्था खत्म हो जाएगी। अमीर और शक्तिशाली लोग सोचते हैं कि वे रिमोट कंट्रोल से कोर्ट चलाएंगे। वे आग से खेल रहे हैं। हम फिक्सिंग की साजिश रचने वालों को जेल भेजेंगे। उच्चतम न्यायालय के 4-5फीसद वकील महान संस्था का नाम खराब कर रहे हैं। ‘बेंच फिक्सिंग’ का मामला गंभीर है और इसकी जांच होगी।

(वरिष्ठ पत्रकार और कानूनी मामलों के जानकार जेपी सिंह की रिपोर्ट)

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