Satya Darshan

कैसे जाने कि कोई आत्महत्या करने वाला है

सरोकार | जुलाई 5, 2019

दुनिया के कई देशों में टीनएजर्स में आत्महत्या की प्रवृत्ति बढ़ी है. कभी साइबर बुलिंग तो कभी कई तरह के दबावों के चलते अवसादग्रस्त होते किशोरों में ऐसे लक्षण खतरनाक संकेत देते हैं. इन्हें जानिए और कीमती जानें बचाइए.

अमेरिका में खासकर टीनएज लड़कों  में आत्महत्या की दर लगातार बढ़ रही है. 2007 से 2017 के बीच की गई एक स्टडी से पता चला है कि 15 से 19 साल की उम्र वालों में यह दर 8 प्रति लाख से बढ़कर 12 प्रति एक लाख हो गई. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ऐसे युवा होते लड़के-लड़कियों के माता-पिता कुछ बातों पर ध्यान दें, तो समय रहते उन्हें बचा सकते हैं. 

इस स्टडी के मुख्य लेखक और हार्व्रड मेडिकल स्कूल में रिसर्च एसोसिएट ओरेन मिरॉन कहते हैं, "यह एक असली खतरा है जिसे लेकर हम सोचते हैं कि ऐसा हमारे साथ कभी नहीं हो सकता." लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन की मानें तो वैश्विक स्तर पर हर साल करीब 8,00,000 लोग खुदखुशी कर लेते हैं.

ध्यान देने वाली बात यह है कि आत्महत्या के विचारों से घिरे रहने वाले लोग भी असल में मरना नहीं चाहते. एक्सपर्ट बताते हैं कि ऐसे लोग केवल वैसा जीवन नहीं जीना चाहते जैसा वे जी रहे होते हैं. अगर आप बच्चों के अभिभावक हैं, शिक्षक हैं, दोस्त हैं या किसी और तरह से किशोरों से साथ होते हैं, तो उनमें दिखने वाली ऐसी बातों को चेतावनी समझें और उन्हें सुसाइडल स्थिति से बाहर निकलने में मदद दें.

1. इस बारे में बातें करना

कोई ऐसा कहे, "मैं अब ज्यादा दिनों तक तुम्हारे लिए परेशानी नहीं बनूंगा" या "मैं खुद को ही खत्म कर लूंगा" तो उसे गंभीरता से लें, भले ही कहने वाले ने ऐसा मजाक में कहा हो. हो सकता है कि कोई ऐसा कहे ना लेकिन अपने सोशल मीडिया पेज पर कोई ऐसा पोस्ट शेयर करे या किसी और तरह से ऐसा लिखे. विशेषज्ञ बताते हैं कि कई लोग अपने परिवार से छुपाने के लिए ऐसी बातें बेनाम लिखते हैं या सोशल मीडिया पर पोस्ट के रूप में डालते हैं. इसलिए डिजिटल दुनिया पर भी नजर रखनी चाहिए.

2. खुद को नुकसान पहुंचाना

ऐसे किशेर जो खुद को नुकसान पहुंचाने वाली हरकतें करते हैं उन पर खास ध्यान देना चाहिए. लंदन की क्वीन मेरी यूनिवर्सिटी में मनोविज्ञान की असिस्टेंट प्रफेसर किर्स्टिन हैडफील्ड बताती हैं, "खुद को चोट पहुंचाने वाले ऐसे किशोंरों में आत्महत्या की कोशिश करने की काफी संभावना है." ज्यादा मात्रा में शराब पीना या ड्रग्स लेने लगना भी ऐसा व्यवहार होता है.

3. समाज से अलग थलग

किसी का खुद को सबसे काट लेना एक चिंता का मामला होना चाहिए. जब भी कोई ऐसा करे तो उसे खुदखुशी के विचारों से ग्रस्त समझा जाना चाहिए. हैडफील्ड कहती हैं, "अगर किसी का सामाजिक संबंल मजबूत हो तो उसके मानसिक रोगों से ग्रस्त होने की संभावना काफी कम होती है." वे सलाह देती हैं कि परिवारजन देखें कि उनके घर के बच्चे दूसरों से खुद को काट तो नहीं रहे हैं और उन्हें बार बार बताएं कि वे हर हाल में उन्हें प्यार और मदद देना बंद नहीं करेंगे. अगर माता पिता को बातचीत में मुश्किलें आएं तो उन्हें थेरेपिस्ट की मदद लेने से भी नहीं चूकना चाहिए.

4. फंसे हुए और हताश

जब भी ऐसी भावनाएं दिखें कि किशोर किसी स्थिति में फंसे हुए या हताश महसूस कर रहे हैं तो आत्महत्या के विचारों के आने की संभावना बढ़ जाती है. ऐसे हालात में सावधानी बरतें और मदद करें, ज्यादातर लोग जिन्हें खुदखुशी का ख्याल आता है वे भी असल में मरना नहीं चाहते हैं. टीनएजर्स में अकसर ऐसी झल्लाहट देखने को मिलती है जब वे कहते हैं कि "मुझे अपनी जिंदगी से नफरत है." उन्हें बात करने और अपनी मन:स्थिति के बारे में विस्तार से बताने के लिए प्रेरित करें.

5. दिनचर्या में बदलाव

अगर अचानक उनके रूटीन में बदलाव आने लगे तो उससे ये भी संकेत मिलता है कि वे अवसादग्रस्त हो सकते हैं. सबसे आसानी से दिखने वाला बदलाव नींद में दिखता है. विशेषज्ञ हैडफील्ड बताती हैं, "नींद और आत्महत्या के विचारों का बहुत गहरा संबंध पाया गया है." वे बताती है कि अगर कोई टीनएजर केवल 4-5 घंटे ही सो रहा है तो उसमें खुदखुशी के विचारों के लिए नजर रखें. अगर कोई बहुत ज्यादा सोने लगा हो और बिस्तर ही नहीं छोड़ना चाहता हो तो वह अवसाद यानि डिप्रेशन से ग्रस्त हो सकता है.

6. अपनी चीजें त्यागना

अगर कोई किशोर अपनी पसंदीदा चीजें तक लोगों को बांट आए और उसकी कोई तार्किक वजह तक ना बता सके, तो समझिए कि कुछ गड़बड़ चल रहाी है. उससे बात करें और तुरंत मदद लें. एक्सपर्ट कहते हैं कि कई बार इसका मतलब होता है कि उन्होंने जान देने की योजना बना ली है.

7. व्यक्तित्व में बदलाव, मूड बदलना, गुस्सा या घबराहट

हालांकि टीनएज के बच्चों में ये सारी ही चीजें आम होती हैं लेकिन इन पर सावधानी से नजर रखनी चाहिए. अगर परिवार में मूड डिसऑर्डर का इतिहास रहा हो या किसी और ने भी पहले आत्महत्या या उसकी कोशिश की हो तो खास ध्यान देने की जरूरत है. ऐसे किसी भी बदलाव के बारे में उनसे बात करना बहुत जरूरी है. हैडफील्ड कहती हैं, "एक मददगार अभिभावक या निःस्वार्थ प्रेम करने वाला कोई व्यक्ति बहुत अहम भूमिका निभा सकता है."

हाल पूछना, परेशानी समझना और जरूरत हो तो मदद मुहैया कराना अहम है क्योंकि किशोर अकसर खुद से मदद मांगने नहीं आते हैं. उनके आपके पास आने का इंतजार ना करें.

(अगर आप ऐसे किसी को जानते हों जो गंभीर मानसिक वेदना या खुदखुशी के विचारों से गुजर रहा हो तो उसे पेशेवर मदद दिलाएं. आप चाहें दुनिया के किसी भी कोने में हों , ऐसी मदद कहां मिल सकती है यह जानने के लिए आप www.befrienders.org पर जा सकते हैं)

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