Satya Darshan

राहुल ने छोड़ा अध्यक्ष पद, जताई अकल्पनीय हिंसा की आशंका, जानिए पत्र मेंं कहा क्या

नयी दिल्ली (एसडी) | जुलाई 4, 2019

लोकसभा चुनाव 2019 में मिली हार की जिम्मेदारी लेते हुए राहुल गांधी  ने आधिकारिक रूप से कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया.उन्होंने इस्तीफा देने से पहले ट्विटर पर से ‘अध्यक्ष, कांग्रेस’ हटाया फिर कहा,”अब मैं अध्यक्ष नहीं हूं.”

राहुल ने कहा,” 2019 के लोकसभा चुनाव में पार्टी को मिली हार की वह जिम्मेदारी लेते हुए कांग्रेस अध्यक्ष पद से अपना इस्तीफा दे रहे हैं.”

अध्यक्ष बनने की चाहत नहीं

इस से पहले राहुल ने कहा कि पार्टी अध्यक्ष पद पर बने रहने की उन की कोई चाहत नहीं है और कांग्रेस कार्यकारी समिति को इस पद के लिए शीघ्र ही किसी और व्यक्ति को ढूंढ लेना चाहिए.

संभावना है कि जब तक नए अध्यक्ष का चुनाव नहीं होता तब तक कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मोतीलाल वोरा अध्यक्ष पद का कार्यभार देख सकते हैं.

नए अध्यक्ष का फैसला जल्द करें

राहुल ने यह भी कहा है कि पार्टी को बिना देरी किए जल्द ही नए अध्यक्ष पर फैसला कर लेना चाहिए. वैसे पिछले दोनों कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने राहुल गांधी से मुलाकात की और उन्हें अध्यक्ष पद पर बने रहने का आग्रह किया. इस मुलाकात से पहले राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने ट्वीट कर कहा,”राहुल गांधी ही पार्टी का नेतृत्व कर सकते हैं. देश हित और जनता के प्रति उन की प्रतिबद्धता बेमिसाल है.” लेकिन राहुल ने गहलोत के इस निवेदन को सिरे से खारिज कर दिया.

पढ़िए राहुल गांधी का पूरा पत्र

कांग्रेस के लिए काम करना मेरे लिए सम्मान की बात रही है, जिसके आदर्श हमारे ख़ूबसूरत देश के लिए जीवन शक्ति है. मेरे ऊपर पार्टी और मुल्क के प्यार का क़र्ज़ है और मैं इसका अहसानमंद हूं.

कांग्रेस प्रमुख के तौर पर 2019 के लोकसभा चुनाव में हार की ज़िम्मेदारी मेरी है. भविष्य में पार्टी के विस्तार के लिए जवाबदेही काफ़ी अहम है. यही कारण है कि मैंने कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष पद से इस्तीफ़ा दिया है.

पार्टी को फिर से बनाने के लिए कड़े फ़ैसले की ज़रूरत है. 2019 में हार के लिए कई लोगों की जवाबदेही तय करने की ज़रूरत है. यह अन्याय होगा कि मैं दूसरों की जवाबदेही तय करूं और अपनी जवाबदेही की उपेक्षा करूं.

कांग्रेस पार्टी के कई सहयोगियों ने मुझसे कहा कि मैं अगले अध्यक्ष का चुनाव करूं. पार्टी का जो भी नया अध्यक्ष होगा, उसे मैं चुनूं यह मेरे लिए ठीक नहीं होगा. हमारी पार्टी का विशाल इतिहास और विरासत है. मैं इसके संघर्ष और मर्यादा का आदर करता हूं. यह हमारे मुल्क की बनावट के साथ गुँथा हुआ है.

मेरा भरोसा है कि पार्टी नेतृत्व के मामले में बिल्कुल सही फ़ैसला लेगी और नया नेतृत्व पार्टी को साहस, प्रेम और ईमानदारी के साथ आगे बढ़ाएगा.

इस्तीफ़ा देने के तत्काल बाद मैंने कांग्रेस वर्किंग कमिटी में अपने सहकर्मियों को सलाह दी कि वो नए अध्यक्ष चुनने की ज़िम्मेदारी एक ग्रुप को दें. वही ग्रुप नए अध्यक्ष की खोज शुरू करे. मैं इस मामले में मदद करूंगा और कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन बहुत ही आसानी से हो जाएगा.

मेरा संघर्ष महज सत्ता पाने के लिए नहीं रहा है

बीजेपी के ख़िलाफ़ मेरे मन में कोई नफ़रत नहीं है लेकिन भारत के बारे में उनके विचार का मेरा रोम-रोम विरोध करता है.

ये विरोध इसलिए है क्योंकि मेरा अस्तित्व एक ऐसे भारतीय विचार से ओतप्रोत है जो उनके भारत के विचार से सीधे टकराता है. ये कोई नई लड़ाई नहीं है, ये हमारी धरती पर हज़ारों सालों से लड़ी जाती रही है. जहां वे अलगाव देखते हैं, वहां मैं समानता देखता हूं. जहां वे नफ़रत देखते हैं, मैं मोहब्बत देखता हूं. जिस चीज़ से वो डरते हैं मैं उसको अपनाता हूं.

राहुल गांधी

यही सहानुभूति वाला विचार लाखों-लाख मेरे प्यारे देश वासियों के दिलों में भी बहता है.

यही वो भारत का विचार है जिसे हम अब अपने पूरे दमखम से रक्षा करेंगे.

हमारे देश और हमारे संविधान पर जो हमला हो रहा है, वो हमारे राष्ट्र की बुनावट को नष्ट करने के लिए डिज़ाइन किया गया है.

इस लड़ाई से मैं किसी भी तरह से पीछे नहीं हट रहा हूं. मैं कांग्रेस पार्टी का एक वफ़ादार सिपाही और भारत का समर्पित बेटा हूं और मैं अपनी अंतिम सांस तक इसकी सेवा और रक्षा करता रहूंगा.

हमने एक तीखा और प्रतिष्ठित चुनाव लड़ा. हमारा चुनाव प्रचार भारत के सभी लोगों, धर्मों और समुदायों के लिए भाईचारे, सहिष्णुता और सम्मान वाला था.

राहुल गांधी

मैंने अपने पूरे दमखम के साथ व्यक्तिगत रूप से प्रधानमंत्री, आरएसएस और उन संस्थाओं से संघर्ष किया है जिन्हें उन्होंने कब्ज़ा कर रखा है.

मैं लड़ा क्योंकि मैं भारत को प्यार करता हूं. मैं उन आदर्शों को बचाने के लिए लड़ा जिनकी बुनियाद पर भारत खड़ा है.

एक समय मैं पूरी तरह अकेला खड़ा रहा और मुझे इस पर गर्व है. मैंने अपने कार्यकर्ताओं और पार्टी सदस्यों, पुरुषों और महिलाओं के साहस और समर्पण से बहुत कुछ सीखा है. उन्होंने मुझे प्यार दिया और विनम्रता सिखाई है.

पूरी तरह से स्वतंत्र और साफ़-सुथरे चुनाव के लिए देश की संस्थाओं का निष्पक्ष रहना अनिवार्य है. कोई भी चुनाव स्वतंत्र प्रेस, स्वतंत्र न्यायपालिका और एक पारदर्शी चुनाव आयोग जो कि निष्पक्ष हो के बग़ैर सही नहीं हो सकता. तब भी कोई चुनाव स्वतंत्र नहीं हो सकता है जब तक सभी वित्तीय संसाधनों पर एक ही पार्टी का क़ब्ज़ा हो.

हमने 2019 के चुनाव में एक राजनीतिक पार्टी का सामना नहीं किया बल्कि, हमने भारत सरकार की पूरी मशीनरी के ख़िलाफ़ लड़ाई लड़ी, हर संस्था को विपक्ष के ख़िलाफ़ इस्तेमाल किया गया था. ये बात अब बिल्कुल साफ़ है कि भारत की संस्थाओं की जिस निष्पक्षता की हम अब तक सराहना करते रहे थे, वो निष्पक्षता अब नहीं रही.

राहुल गांधी

देश की सभी संस्थाओं पर क़ब्ज़ा करने का आरएसएस का उद्देश्य अब पूरा हो गया है. हमारा लोकतंत्र अब मौलिक तौर पर कमज़ोर कर दिया गया है. सबसे बड़ा ख़तरा ये है कि अब से चुनाव जो कि भारत का भविष्य निर्धारित करते थे अब वो केवल एक रस्मअदायगी भर रह जाएंगे.

सत्ता पर क़ाबिज़ होने के परिणाम स्वरूप भारत को अकल्पनीय हिंसा और पीड़ा सहना होगा. किसानों, बेरोज़गार, नौजवानों, महिलाओं, आदिवासियों, दलितों और अल्पसंख्यकों को सबसे ज़्यादा नुक़सान सहना होगा.

हमारे देश की अर्थव्यवस्था और साख पर भी इसका बुरा प्रभाव पड़ेगा

प्रधानमंत्री की इस जीत का मतलब ये नहीं है कि वो भ्रष्टाचार के आरोप से मुक्त हो गए हैं. कोई कितना भी पैसा ख़र्च कर ले या कितना ही प्रॉपेगैंडा कर ले, सच्चाई की रोशनी को छिपाया नहीं जा सकता है. भारत की संस्थाओं को दोबारा हासिल करने और उन्हें पुनर्जीवित करने के लिए पूरे भारत को एक होना होगा और कांग्रेस पार्टी ही इन संस्थाओं को दोबारा खड़ा करेगी.

राहुल गांधी

इस अहम काम को करने के लिए, कांग्रेस पार्टी को ख़ुद में आमूलचूल बदलाव लाना होगा. आज बीजेपी भारत के लोगों की आवाज़ को सुनियोजित तरीक़े से कुचल रही है. इन आवाज़ों की रक्षा करना कांग्रेस पार्टी का कर्तव्य है.

भारत में कभी भी केवल एक आवाज़ नहीं रही है और नहीं कभी केवल एक आवाज़ रहेगी. भारत हमेशा से कई आवाज़ों का संगम रहा है. असली भारत माता का सार यही है.

भारत और विदेश में रहने वाले हज़ारों भारतीयों का बहुत शुक्रिया जिन्होंने मुझे समर्थन के लिए सन्देश और पत्र भेजे. मै अपनी पूरी ताक़त से कांग्रेस पार्टी के आदर्शों के लिए लड़ता रहूंगा.

जब भी पार्टी को मेरी सेवा, मेरे किसी भी सलाह की ज़रूरत होगी, मैं हमेशा मौजूद रहूंगा. कांग्रेस की विचारधारा का समर्थन करने वाले और ख़ासकर पार्टी के प्रिए कार्यकर्ता, मुझे अपने भविष्य में पूरी आस्था है और मुझे आप सभी के प्रति बहुत सारा प्रेम है.

भारत में लोगों की आदत रही है कि शक्तिशाली लोग सत्ता से चिपके रहते हैं, कोई भी सत्ता को त्यागना नहीं चाहता. लेकिन सत्ता के अपने मोह को छोड़े बिना और एक गहरी विचारधारा की लड़ाई लड़े बिना हम अपने विरोधियों को नहीं हरा सकते. मैं एक कांग्रेसी पैदा हुआ था, ये पार्टी हमेशा मेरे साथ रही है, ये मेरी जीवनरेखा रही है और मेरे लिए ये हमेशा इसी तरह रहेगी.

राहुल के इस्तीफे के बाद विपक्षियों ने भले राहत की सांस ली हो पर अपने सरल स्वभाव, विरासत में मिली राजनीतिक सूझबूझ से राहुल ने अपनी खास पहचान बनाई है. उन्होंने इस्तीफा भले दे दिया पर संसद में अपने सवालों से विपक्ष को निशाने में लेने पर ढील बरतेंगे, इस की संभावना कम ही है.

वैसे भी राहुल ने इस्तीफा दे कर एक तीर से दो निशाना साधने की कोशिश की है. पहली तो यह कि इस से उन की छवि और अधिक निखरेगी और विपक्ष को एक नसीहत भी होगा दूसरा वे पार्टी में उठ रही उन के खिलाफ गुपचुप विरोध पर विराम लगा कर पार्टी के लिए जमीनी स्तर पर काम कर सकेंगे.

बहरहाल, जो भी हो इस्तीफे से राहुल को राजनीति नुकसान होगा, इस में संदेह ही है.

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