Satya Darshan

जीएसटी संग्रह में आई गिरावट

अर्थ दर्शन | जुलाई 2, 2019

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह जून में कम रहा है। पिछले चार महीने में पहली बार ऐसा हुआ है जब जीएसटी संग्रह 1 लाख करोड़ रुपये से नीचे रहा है। अंतरिम बजट में घोषित लक्ष्य को हासिल करने के लिए हर महीने जीएसटी संग्रह 1.3 लाख करोड़ रुपये होना चाहिए। 

आगामी शुक्रवार को पेश होने वाले आम बजट में यह आंकड़ा बरकरार रखा गया तो इससे प्राप्त करना मुश्किल हो सकता है। सोमवार को वित्त मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार जून में जीएसटी संग्रह महज 4.5 प्रतिशत की मामूली वृद्घि के साथ 99,939 करोड़ रुपये रही, जिसमें मई में 6 प्रतिशत तेजी दर्ज हुई थी। इसके मद्देनजर राजस्व संग्रह लक्ष्य पूरा करने के लिए सरकार को आंकड़ों को लेकर चुस्ती (डेटा इंटेलीजेंस) और नीतियों पर अधिक जोर देना पड़ सकता है। 

नई वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के लिए राजस्व संग्रह का लक्ष्य एक गंभीर चुनौती बन गया है। सीजीएसटी संग्रह संशोधित अनुमान के मुकाबले 9 प्रतिशत कमी के साथ 4.5 लाख करोड़ रुपये रहा। वित्त वर्ष 2018-19 के लिए संशोधित अनुमान में यह आंकड़ा 5 लाख करोड़ रुपये रहा था। 

पीडब्ल्यूसी इंडिया में पार्टनर प्रतीक जैन ने कहा, 'जीएसटी संग्रह में मामूली बढ़ोतरी चिंता की बात है और अगले कुछ महीनों में ऑडिट और जांच के मोर्चे पर आपको कुछ उपाय देखने को मिल सकते हैं। इससे सरकार 2019-20 में जीएसटी संग्रह के अपने लक्ष्य पर पुनर्विचार कर सकती है। इस सप्ताह पेश होने वाले आम बजट में इसका पता चलेगा।' 

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक जून में केंद्रीय जीएसटी संग्रह 18,366 करोड़ रुपये, राज्य जीएसटी 25,353 करोड़ रुपये, एकीकृत जीएसटी 47,772 करोड़ रुपये और उपकर संग्रह 8,457 करोड़ रुपये रहा। वित्त वर्ष के पहले 3 महीनों का केंद्रीय जीएसटी संग्रह के वितरण के बाद 1.2 लाख करोड़ रुपये रहा जबकि 6.1 लाख करोड़ रुपये के लक्ष्य को हासिल करने के लिए इसे 1.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक होना चाहिए था। 

सरकार कर चोरी को रोकने के उपायों पर काम कर रही है जिसमें डेटा विश्लेषण, रिटर्न के नए प्रारूप, ई-वे बिल प्रणाली, प्रस्तावित ई-एनवॉइसिंग प्रणाली और मूवी थिएटरों के लिए अनिवार्य ई-टिकटिंग व्यवस्था शामिल है। 

मार्च में जीएसटी संग्रह 1.06 लाख करोड़ रुपये, अप्रैल में 1.13 लाख करोड़ रुपये और मई में एक लाख करोड़ रुपये था। उम्मीद से कम जीएसटी संग्रह के कारण जीएसटी दरों में खासकर 28 फीसदी की श्रेणी में और कटौती की संभावना धूमिल हो गई है। जीएसटी परिषद की पिछली बैठक में केवल इलेक्ट्रिक वाहनों पर कर की दर 12 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी करने पर विचार किया गया और इसे फिटमेंट कमेटी को भेज दिया गया।  

डेलॉयट इंडिया में पार्टनर एम एस मणि ने कहा, 'संग्रह में मामूली गिरावट से यह बात साफ है कि अभी दरों में कटौती की गुंजाइश नहीं है। उम्मीद से कम संग्रह से जीएसटीएन के पास मौजूद डेटा का और विश्लेषण होगा ताकि इसकी खामियों को दूर किया जा सके।'

विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि दर नरम पड़ी

नए ऑर्डर मिलने में मामूली बढ़त के चलते देश के विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि दर जून में थोड़ी नरम रही। इसका आशय उत्पादन और रोजगार की वृद्धि का भी नरम पडऩा है। कंपनियों के पर्चेजिंग मैनेजरों के बीच किए जाने वाले मासिक सर्वेक्षण की सोमवार को जारी रपट में यह बात सामने आई है। 

आईएचएस मार्किट इंडिया मैन्युफैक्चरिंग पर्चेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) जून में 52.1 अंक पर रहा। यह मई के 52.7 अंक से नीचे है जो तीन महीने का उच्च स्तर था। हालांकि यह लगातार 23वां महीना है जब विनिर्माण पीएमआई 50 अंक से ऊपर बना रहा है।

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