Satya Darshan

रेल पटरियों पर उठ रहे सवाल

नयी दिल्ली | जून 28, 2019

भारतीय रेल ने 2019-20 तक ज्यादा एक्सल लोड वैगनों के माध्यम से 70 प्रतिशत माल ढुलाई का लक्ष्य रखा था, जिसे बड़ा झटका लगा है। युनिवर्सिटी आफ इलिनोइस की ओर से कराए गए एक अध्ययन के मुताबिक स्टील अथॉरिटी आफ इंडिया (सेल) द्वारा उपलब्ध कराई जा रही पटरियां, जिनका इस समय इस्तेमाल हो रहा है, खराब गुणवत्ता की हैं और वे 25 टन एक्सल लोड वैगनों के लिए उपयुक्त नहीं हैं।

रेल मंत्रालय की ओर से कराए गए इस अध्ययन के परिणाम के बाद सेल और उसके सबसे बड़े उपभोक्ता रेलवे में खींचतान हो सकती है। एक सूत्र ने यह संकेत दिए कि सरकारी स्टील दिग्गज द्वारा तत्काल टॉप ग्रेड की रेल पटरियों की आपूर्ति कर पाने की संभावना नहीं है।

रिपोर्ट के मुताबिक भारत के मौजूदा ट्रैक ढांचे की 880 एमपीए टेंसिल स्ट्रेंथ 25 टन एक्सल लोड परिचालन के लिए पर्याप्त नहीं है। इस मामले से जुड़े एक नजदीकी सूत्र ने कहा, 'आदर्श रूप से ज्यादा एक्सल लोड वैगन के इस्तेमाल के लिए 1080 एमपीए की रेल पटरियों की जरूरत है, जबकि मौजूदा पटरियां 22.9 टन एक्सल लोड के योग्य हैं।'

सूत्रों के मुताबिक रेलवे ने पहले ही इस्पात मंत्रालय और सेल से कहा है कि वह अगले दो साल में उच्च ग्रेड की पटरियों की आपूर्ति करे, जिससे 'मिशन 25 टन' योजना पर आगे बढ़ा जा सके। योजना के मुताबिक नैशनल ट्रांसपोर्टर ने 2019-20 तक उच्च एक्सल लोड वैगनों के माध्यम से 70 प्रतिशत माल ढुलाई का लक्ष्य रखा था।

इस सिलसिले में भेजे गए ई मेल का सेल ने कोई जवाब नहीं दिया। बहरहाल सेल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न दिए जाने की शर्त पर कहा कि कंपनी को रिपोर्ट के बारे में कोई जानकारी नहीं है और वह रेलवे की जरूरतों के मुताबिक रेल पटरियां बना रही है।

युनिवर्सिटी आफ इलिनोइस ट्रांसपोर्टेशन टेक्नोलॉजी ट्रांसफर (टीटीटी) टीम की ओर से पेश की गई एक रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अगर तुलना करें तो भारतीय रेल की मौजूदा 880 एमपीए की रेल पटरिगां अमेरिका में इस्तेमाल होने वाली मानक ग्रेड की पटरियों से भी कम क्षमता की हैं। इसमें आगे यह भी कहा गया है कि रेलवे की सुरक्षा और विश्वसनीयता के हिसाब से रेल पटरियां अहम हैं क्योंकि इन पर यात्री ट्रेनों व मालगाडिय़ों दोनों का ही परिचालन होता है।

टीटीटी ने ज्यादा क्षमता की रेल पटरियों के इस्तेमाल की सिफारिश की है। युनिवर्सिटी के अध्ययन का परिणाम ठीक वही आया है, जो भारतीय रेलवे की शोध इकाई रिसर्च डिजाइन ऐंड स्टैंडर्ड ऑर्गेनाइजेशन के अध्ययन से सामने आया था। सेल के अधिकारियों ने कहा कि पिछले सप्ताह रेलवे और सेल के बीच बैठक हुई थी, लेकिन चालू वित्त वर्ष में उपलब्ध कराई जाने वाली मात्रा के अलावा अन्य किसी विषय पर चर्चा नहीं हुई। पिछले कुछ साल से रेल पटरियों की मांग बहुत ज्यादा बढ़ी है, क्योंकि रेल नेटवर्क विकसित करने का काम व्यापक स्तर पर हुआ है और नरेंद्र मोदी के पहले कार्यकाल में बुनियादी ढांचा विकास पर ज्यादा काम हुआ है, जिसमें पटरियों का नवीकरण शामिल है।

पिछले सप्ताह की बैठक में यह संकेत दिया गया था कि चालू वित्त वर्ष में 17 लाख टन पटरियों की कुल जरूरत में से सेल 13.5 लाख टन आपूर्ति करेगी। कं पनी के अधिकारी ने कहा, 'सेल को जरूरतों में बदलाव के बारे में कोई सूचना नहीं दी गई है। हम अपने ग्राहकों की जरूरतों के मुताबिक बदलाव जारी रखेंगे।'

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