Satya Darshan

जर्मनी में हिंसक दक्षिणपंथियों की संख्या रिकार्ड स्तर पर बढ़ी

विश्व दर्शन | जून 28, 2019

पिछले दिनों कासेल शहर के काउंटी प्रमुख की हत्या के बाद जर्मनी में उग्र दक्षिणपंथी हिंसा का मामला गरमा गया है. अब खुफिया सेवा की रिपोर्ट में कहा गया है कि जर्मनी में हिंसा को उतारू करीब 13,000 उग्र दक्षिणपंथी हैं.

हर साल जर्मनी की घरेलू खुफिया एजेंसी देश की सुरक्षा स्थिति पर रिपोर्ट देती है. ताजा रिपोर्ट के अनुसार रजिस्टर्ड उग्र दक्षिणपंथियों की संख्या रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है. गृह मंत्री हॉर्स्ट जेहोफर द्वारा पेश रिपोर्ट के अनुसार कुल रजिस्टर्ड उग्र दक्षिणपंथियों में आधे लोग यानि 12,700 हिंसा के लिए तैयार बताए जाते हैं. जेहोफर ने कहा है कि इन लोगों के अति हथियार प्रेम के कारण ये संख्या चिंताजनक है. खुफिया एजेंसी के अनुसार संघीय जर्मनी के अस्तित्व को नकारने वाले राइषबुर्गर की संख्या बढ़कर 19,000 हो गई है जिनमें से 1,000 उग्रपंथी हैं. देश में सक्रिय आइडेंटिटी मूवमेंट के सदस्यों को गृह मंत्री ने बौद्धिक आगजनी करने वाला बताया है जो अब तक हिंसक तो नहीं हैं, लेकिन खतरनाक हैं.

रिपोर्ट के अनुसार राजनीति प्रेरित दक्षिणपंथी हिंसक घटनाओं में कमी आई है. पिछले साल उसकी संख्या 19,409 रही. इसके विपरीत उग्र दक्षिणपंथी हिंसा 2017 के 1054 से बढ़कर 1088 हो गई. हॉर्स्ट जेहोफर ने कासेल के काउंटी प्रमुख वाल्टर लुबके की हत्या की भी चर्चा की. संदिग्ध अभियुक्त ने इस बीच अपराध कबूल कर लिया और पुलिस ने दो और लोगों की गिरफ्तारी की है जिन पर हत्या में मदद का संदेह है.

लुबके की लाश उनके घर के बाहर मिली थी. चांसलर की सीडीयू पार्टी के सदस्य लुबके अपने आप्रवासी समर्थक विचारों के लिए जाने जाते थे और उनकी हत्या को जर्मनी में विदेशियों के खिलाफ विद्वेष की भावना के प्रसार के साथ जोड़ कर देखा जा रहा है. उनकी हत्या के बाद पार्टी के अंदर भी नरमपंथियों और गरमपंथियों के बीच बहस तेज हो गई है. 

खुफिया एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार इस्लामी और वामपंथी कट्टरपंथियों की संख्या में भी थोड़ा इजाफा हुआ है. वामपंथी उग्रवादियों की संख्या बढ़कर 32,000 हो गई है जबकि हिंसक लोगों की तादाद करीब 9,000 है. जेहोफर के अनुसार इस्लामी कट्टरपंथ का खतरा पहले की तरह गंभीर है. इस्लामी कट्टरपंथ के समर्थक लोगों का आंकड़ा करीब 11,3000 माना जा रहा है. सुरक्षा एजेंसियों की निगाह में करीब 1000 ऐसे लोग हैं जो जर्मनी से सीरिया और इराक गए थे और उनमें से आधे ने वहां लड़ाई में हिस्सा लिया या स्थानीय संगठनों की मदद की. उनमें से एक तिहाई वापस लौट आए हैं और जर्मनी के लिए गंभीर सुरक्षा खतरा हैं.

शरणार्थी संकट के शिखर पर जर्मनी में धुर दक्षिणपंथ का तेज उदय शुरू हुआ था. चांसलर अंगेला मैर्केल की अनुदारवादी क्रिश्चियन डेमोक्रैटिक यूनियन के दाएं बाजू में उभरने वाली एएफडी पार्टी इस बीच न सिर्फ देश के सारे प्रदेशों की विधानसभाओं में है बल्कि राष्ट्रीय संसद में भी वह प्रमुख विपक्षी पार्टी है. एक ओर बढ़ता कट्टर दक्षिणपंथ और उसके खिलाफ राजनीतिक लड़ाई है तो दूसरी ओर देश में उग्र दक्षिणपंथ का बढ़ता खतरा.

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