Satya Darshan

5जी नीलामी का लक्ष्य, नहीं होगा पूरा

रोमिता मजूमदार | जून 17, 2019

भारत महत्वाकांक्षी 5जी स्पेक्ट्रम की नीलामी की तैयारी कर रहा है, लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि मौजूदा आधार कीमत पर (जिसे उद्योग महंगा मान रहा है) दूरसंचार कंपनियों के लिए आंतरिक रिटर्न की दर अतिरिक्त निवेश पर 7 फीसदी के निचले स्तर पर होगी। 

पिछले हफ्ते डिजिटल कम्युनिकेशंस कमीशन (डीसीसी) ने आगामी स्पेक्ट्रम नीलामी पर दूरसंचार नियामक की सिफारिशों की समीक्षा की मांग की है, खास तौर से आरक्षित कीमत पर। यह स्पेक्ट्रम नीलामी के दौरान प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करने के लिए किया गया है, साथ ही यह भी सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है कि पिछली नीलामी की तरह बिना बिका स्पेक्ट्रम न रह जाए। पिछली नीलामी में सिर्फ 40 फीसदी स्पेक्ट्रम ही बिक पाया था।

कर्ज से लदी दूरसंचार कंपनियों ने नीलामी में दिलचस्पी नहीं दिखाई है। भारती एयरटेल ने कहा है कि कीमतें काफी ज्यादा हैं, वहीं वोडाफोन आइडिया चाहती है कि नीलामी 2020 में हो। क्रिसिल की निदेशक (शोध) एच गांधी ने कहा कि फाइबराइजेशन महंगा है और यह स्पेक्ट्रम की लागत में सबसे ऊपर है, जो मौजूदा कीमत पर काफी ज्यादा है। 

उन्होंने कहा, मार्च 2019 में दूरसंचार कंपनियों पर 4.3 लाख करोड़ रुपये का कर्ज था। इसी वजह से भारत में फाइबराइजेशन के मोर्चे पर बड़ा बदलाव और दूरसंचार व टावर कंपनियों के बीच नए कारोबारी मॉडलों का सृजन होगा, जब 5जी पेश किया जाएगा।

5जी तकनीक 70 फीसदी से ज्यादा फाइबराइजेशन की अनिवार्यता बताता है जबकि मौजूदा समय मेंं यह स्तर 25-30 फीसदी है। क्रिसिल का अनुमान है कि अगर हर कंपनी को वैयक्तिक स्तर पर इस सीमा पर पहुंचना है तो भारतीय दूरसंचार कंपनियों को अगले 2-3 साल में सिर्फ फाइबर नेटवर्क लगाने में एक लाख करोड़ रुपये तक निवेश करने होंगे। जमीन की ज्यादा लागत और मंजूरी से फाइबराइजेशन की लागत मेट्रो शहरोंं में प्रति किलोमीटर करीब 1 करोड़ रुपये बैठती है। 

विश्लेषकों का मानना है कि अगर सरकार आगामी नीलामी में बेहतर भागीदारी चाहती है तो लागत में कमी अनिवार्य है। वैश्विक ब्रोकरेज फर्म सीएलएसए ने हालिया नोट में कहा है कि भारत की भारी भरकम 5जी स्पेक्ट्रम लागत आंतरिक रिटर्न की उचित दर को पीछे ले जाने वाली है।

सीएलएसए ने कहा, भारत में ट्राई ने 3.3-3.6 गीगाहट्र्ज बैंड में 245 मेगाहट्र्ज स्पेक्ट्रम नीलामी की सिफारिश की है। इस तरह से वैयक्तिक कंपनी को इस बैंड में 80-100 मेगाहट्र्ज स्पेक्ट्रम मिल सकता है। हालांकि ट्राई की आरक्षित कीमत 490 करोड़ रुपये प्रति मेगाहट्र्ज से ऑपरेटरों को 100 मेगाहट्र्ज स्पेक्ट्रम के लिए करीब 7 अरब डॉलर देने होंगे, जो कोरिया की कीमत के मुकाबले करीब चार गुना है। 

ब्रोकरेज का कहना है कि ऐसे में अतिरिक्त निवेश पर आंतरिक रिटर्न की दर 7 फीसदी होगी। सीएलएसए ने कहा कि स्पेक्ट्रम की लागत 33 फीसदी घटने से आंतरिक रिटर्न की दर 13 फीसदी पर पहुंच सकती है। भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया का 4जी प्रसार अभी ग्राहक आधार का 25-30 फीसदी है, ऐसे में 5जी का इस्तेमाल सीमित हो सकता है।

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