Satya Darshan

रेड न्यूज के हमलों का शिकार हो रही कांग्रेस, कैसे निपटेंगे राहुल गांधी?

प्रदीप द्विवेदी | जून 9, 2019

चाहत और चुनाव में सब जायज है! लिहाजा, केन्द्र की कुर्सी की चाहत में चुनाव में वह सबकुछ किया गया जिसकी जरूरत थी?

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी केरल पहुंचे, और पीएम नरेंद्र मोदी पर जमकर निशाना साधा कि- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने झूठ बोलकर लोकसभा चुनाव जीता! तो इसमें नया क्या है? आप तो सच भी ठीक-से स्थापित नहीं कर पाए! इसलिए 2019 को भूल जाइए, 2024 की तैयारी कीजिए?

लोकसभा चुनाव खत्म हो गया है, कांग्रेस खत्म नहीं हुई है! इसलिए, सोच-समझ कर सियासी कदम उठाइए? यह पेड न्यूज वाली बीसवीं सदी नहीं है, रेड न्यूज वाली एक्कीसवीं सदी है! आजकल कइयों को आपसे भी पहले पता चल जाता है कि आपने इस्तीफा दे दिया है? यही नहीं, अब आप इस्तीफा वापस नहीं लेने पर अड़े हुए हैं? और आप भी मजेदार हैं, उसी दिशा में आगे बढ़ रहे हैं जिस दिशा में विरोधी आपको ले जाना चाह रहे हैं? उन्हें पता है कि यदि गांधी परिवार राजनीति से हट गया तो पूरा सियासी मैदान खाली हो जाएगा? केन्द्र की सत्ता तो दूर, विपक्ष भी नजर नहीं आएगा?

दरअसल, इस बार प्रधानमंत्री का पद ही विपक्षी एकता का सबसे बड़ा दुश्मन बन गया था? जिनकी सियासी औकात दस-बीस सीटें जीतने की भी नहीं थी वे जीत के सियासी सपने देखते रहे और हकीकत में हार गए! कांग्रेस के पास तो फिर भी आधा दर्जन राज्य हैं, चार दर्जन से ज्यादा लोकसभा सीटें हैं, नौ दर्जन से ज्यादा सीटों पर दूसरे नंबर पर रही है, लिहाजा आप तो फिर भी आ जाओगे मुख्यधारा में, लेकिन उन सबका क्या होगा?

अगले पांच साल यह उम्मीद कत्तई मत रखना की कांग्रेस रेड न्यूज का शिकार होने से बच जाएगी? ऐसे मुद्दे जो कांग्रेस के खिलाफ जा सकते हैं, वे जोरशोर से उठाए जाते रहेंगे? कांग्रेस के एक पार्षद ने भी पाला बदला तो नेशनल न्यूज बनेगी? उन्होंने भले ही आठवें दशक में ईमेल भेज दी थी, लेकिन आपके ज्ञान पर सवाल उठते रहेंगे? उधर, हाथापाई भी हुई तो राखी बंधवा कर मामला रफादफा हो जाएगा और इधर, कोई बयान भी आया तो बवाल हो जाएगा? 

सियासी सयानों का मानना है कि यदि सच्चे-झूठे सियासी हमलों से बचते-बचाते राहुल गांधी ने पांच साल निकाल दिए तो ठीक, वरना कांग्रेस मुक्त भारत होने में ज्यादा वक्त नहीं लगेगा!

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