Satya Darshan

वाराणसी के सिगरा, भेलूपुर, लंका के हुक्का बार बने अय्याशी का अड्डा, धडल्ले से परोसा जा रहा सेक्स और मादक पदार्थ, कारवाई होगी कब?

वाराणसी (एसडी) | जून 8, 2019

पढ़े वरिष्ठ पत्रकार श्री कृष्णा पंडित की विशेष रिपोर्ट

बनारस में इन दिनों नियम कानून की धज्जियां उड़ते हुए बनारस के लोगों को देखने को मिल रहा है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बनारस के लगभग अलग-अलग थाना क्षेत्रों में कई सारे हुक्का बार संचालित हो रहे हैं जिसका पुलिस का संरक्षण पूरी तरीके से व्याप्त है और तो और नाबालिक बच्चे हुक्का पीने के बाद होटल मालिक के साथ सॉठ गॉठ से 1000/- रुपये से 1200/- रुपए दे कर 2 से 3 घंटे अपने माशूका के साथ रूम में करते हैं एक दूसरे के साथ खुल्लम खुल्ला प्यार ,ना ही कोई नियंत्रण ना ही कोई रोक टोक। आखिर महीना देते हैं हम ऐसा कुछ कहना है हुक्का बार संचालन करने वाले का अजीब विडंबना है जिला प्रशासन क्यों नहीं करता सख्त कारवाई कारण केवल मात्र वसूली है नाबालिक बच्चे जिनकी उम्र किताबों में और पढ़ने लिखने के साथ भविष्य सवारने की होती है वह अपनी जिंदगी बंद कमरे में अय्याशी में बिता रहे हैं।

मेट्रो शहर मैं जिस तरीके से हुक्का बार का चलन पसरा हुआ है नशे की इस लत ने युवाओं की कैरियर को अंधकारमय बनाने का सबसे आसान तरीका है पिछले दिनों लगातार कई बार हुक्का बार से संबंधित मुद्दों और खबरों को विशेष रूप से वरिष्ठ पत्रकार कृष्णा पंडित ने पुरजोर आवाज उठाई जिसकी हनक धीरे धीरे लखनऊ के गलियारों में भी सुनाई देने लगी जिसके परिणाम स्वरूप वाराणसी में हुक्का बार के खिलाफ तेजतर्रार आईपीएस अनिल कुमार ने कल भोजूबीर में स्थित हुक्का बार पर छापा मारकर हुक्का बार से संबंधित नशीली व मादक पदार्थों को कब्जे में लेकर हुक्का बार को सीज कर दिया। जांच में लिए गए सैंपल के जांच के बाद मालिकों पर भी गाज गिरने की विशेष संभावना है।

बनारस के सिगरा थाना अंतर्गत नामी गिरामी होटल व मॉल में भी हुक्का बार का संचालन किया जा रहा है यही नहीं भेलूपुर व थाना लंका अंतर्गत भी कई नामी-गिरामी हुक्का बार संचालित हो रहे हैं जिस पर निगाहें सबकी हैं लेकिन कार्रवाई कोई नहीं करता अब देखना यह है कि तेज तरार आईपीएस अनिल कुमार क्या बनारस में हुक्का बार के चलन को बंद कर पाएंगे या खुद ही खाना पूर्ति कर एक दायरे में सिमट जाएंगे यह तो समय ही बताएगा।

लेकिन बनारस की सभ्यता संस्कृति पर जबरजस्त चोट करता है यह चलन बहुत ही घिनौना है जो पैसे के मदारियों ने अपनी जाल के तहत नन्हे मुन्ने बच्चे जो देश के भविष्य है उनको फांस लिया है जिसमें पुलिस की भूमिका भी बहुत संदिग्ध है और समाज के इस निकृष्ट काम में समर्पित साथी के रूप में जाने जाते हैं।

आखिर जो इनके सहयोग में निरंतर अपना हाथ बटाए हुए हैं उन पर भी करवाई होनी चाहिए क्योंकि बच्चे देश के भविष्य होते हैं और उन पर ही हमारा आने वाला कल निर्भर होता है यह नस्लें खराब करने और लचर समाज पैदा करने की साजिश है कुछ समाज द्रोहीयों का, इसमें जो जो भी शामिल हो इनकी जांच कर कठोरतम कार्रवाई होनी चाहिए जिससे कि दोबारा इस तरीके का संचालन करने के लिए कोई फिर सोच ना सके।

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