Satya Darshan

नौकरियों का सृजन करना मेरी पहली प्राथमिकता- हरसिमरत कौर, खाद्य प्रसंस्करण मंत्री

शुभायन चक्रवर्ती, निवेदिता मुखर्जी | जून 8, 2019
खाद्य प्रसंस्करण मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने शुभायन चक्रवर्ती और निवेदिता मुखर्जी को दिए साक्षात्कार में बताया कि अपने दूसरे कार्यकाल में उनकी प्राथमिकता नौकरी मांगने वालों को नौकरी सृजक बनाने की होगी। 

पेश हैं बातचीत के संपादित अंश:  

 
मोदी सरकार पिछले पांच वर्ष के अपने कार्यकाल से किस रूप में अलग है? 
 
जहां तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सवाल है आप इस बात को लेकर पूरी तरह से आश्वस्त हो सकते हैं कि हर बार चीजें अलग नजर आएंगी। इसलिए, यह केवल निरंतरता भर की सरकार नहीं होगी। मंत्रिमंडल की पहली बैठक में ही प्रधानमंत्री ने यह स्पष्ट कर दिया था कि वह किसी तरह की ढिलाई नहीं बरतना चाहते। उनका संदेश था कि मंत्रियों को अपनी इस पारी की शुरुआत नई ताकत, नए जोश और नए विचारों के साथ करनी चाहिए।
 
क्या प्रधानमंत्री ने मंत्रियों को कोई विशेष दिशानिर्देश दिया है? 
 
सभी मंत्रियों को यह निर्देश दिया गया है कि उन्हें काम करते समय पंक्ति के अंतिम व्यक्ति को अपने ध्यान में रखना चाहिए और उसके बाद सारी चीजें अपने आप दुरुस्त हो जाएंगी।
 
प्रधानमंत्री अब मंत्रियों से 100 दिन के एजेंडे के अलावा पांच साल की कार्य योजना भी लेना चाहते हैं। क्या इससे चीजें बदलेंगी? 
 
यह एक अच्छी बात है। इससे हमें यह समझने में मदद मिलेगी कि हमारे घोषणापत्र में कौन-कौन से ल्क्ष्य शामिल किए गए थे और हम यह सुनिश्चित कर पाएंगे कि वे समय पर पूरे हों। दूसरी बात है जब हम अपना काम शुरू करें तो हमारी दृष्टि स्पष्ट हो।
 
इस बार आपकी प्राथमिकता के केंद्र में क्या है? 
 
पिछले तीन महीने से चुनाव प्रचार के सिलसिले में घूमने के दौरान मुझे लगा कि लोगों के लिए नौकरी सबसे पहली चिंता है। खाद्य प्रसंस्करण बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन करने वाले क्षेत्रों में से एक है। पिछले पांच वर्ष के दौरान हमने बुनियादी ढांचा खड़ा करने पर ध्यान दिया था और अब मेरी पहली प्राथमिकता रोजगार पैदा करना है।  
 
रोजगार सृजन के लिए आपके पास कोई कार्य योजना है? 
 
मैं ग्रामीण रोजगार पर ध्यान दे रही हूं। पंजाब देश के सबसे समृद्घ राज्यों में से एक है लेकिन यहां भी किसान के बेटे के लिए खेती करना पहले की तरह व्यावहारिक नहीं रह गया है। अन्य राज्यों में हालात और भी बदतर हैं। मेरी शुरुआती योजना यह है कि हर जिले में एक प्रशिक्षण सह प्रसंस्करण केंद्र हो जहां लोग उस क्षेत्र में उगाई जाने वाली चीजें लेकर आएं। यह एक ऐसी बुनियादी व्यवस्था है जिसका इस्तेमाल कर लोग अपने खेतों में जिन उत्पादों को पहले से उगा रहे हैं उनकी गुणवत्ता बढ़ा सकते हैं। उत्पाद को पहले पैकेटों में भरा जाए, उसे परिष्कृत किया जाए और उस पर लेबल चढ़ाया जाए और अंत में ऐसे दुकान की व्यवस्था हो जहां से इनकी बिक्री की जाए। इसमें यह विचार करना होगा कि बहु ब्रांड खाद्य उत्पादों से एफडीआई के जरिये जो खुदरा दुकानें मैंने जोड़ी हैं उनका इस्तेमाल इस उद्देश्य के लिए किस प्रकार से किया जा सकता है, ताकि इसकी एक शृंखला बन जाए।   
 
इससे नौकरियों का सृजन कैसे होगा? 
 
किसान इन साझी सुविधाओं का इस्तेमाल लंबे वक्त तक कर सकते हैं। पांच से छह वर्ष बाद किसान में इतना आत्मविश्वास आ जाएगा कि वह मौजूदा योजनाओं में से किसी एक से अनुदान लेकर खुद का कारोबार खोल सके। इसके बाद नौकरी लेने वाले की जगह वह नौकरी देने वाला बन जाएगा। मेरे पास ग्राम समृद्घि योजना नाम से विश्व बैंक की भी एक योजना है जिस पर हमने पिछले दो वर्ष में काम किया था और उम्मीद है कि अगले कुछ दिनों में यह पूरी हो जाएगी। योजना का लक्ष्य छोटे किसानों को सब्सिडी देना है।
 
विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए खाद्य नीति में और क्या कुछ किया जाना बाकी है? 
 
मैं इस मसले पर वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल जी के साथ नए सिरे से चर्चा करूंगी। मैं पूरी ईमानदारी से यह मानती हूं कि स्वदेशी बुनियादी ढांचे के लिए विदेशी पैसा से और अच्छी बात कोई नहीं हो सकती। इसकी वजह यह है कि सरकार अपने दम पर सारी चीजें नहीं कर सकती है। 
 
अमित शाह वरिष्ठ मंत्रियों के साथ बैठक की अध्यक्षता कर रहे हैं और उन्हें सभी महत्त्वपूर्ण मंत्रिमंडलीय समितियों में शामिल किया गया है। क्या इससे यह धारणा बन रही है कि अब सत्ता के कई केंद्र होंगे?  
 
सत्ता का केंद्र अभी भी प्रधानमंत्री हैं और उसको लेकर कोई दूसरी बात नहीं है। सभी लोग उनके नेतृत्व में ही काम करते हैं। लेकिन यदि उन्हें अपनी सहायता और सरकार को ज्यादा सक्षम, प्रभावी और तीव्र गति से चलाने के लिए और भी लोग मिले हैं तो मेरे विचार से यह बहुत ही अच्छी बात है।  
 
इस मंत्री परिषद में आप महिला शक्ति को किस प्रकार से देखती हैं? 
 
जब तक मोदी प्रधानमंत्री हैं महिला शक्ति हमेशा नई ऊंचाई पर होगी। उन्होंने धारणाओं को तोड़ते हुए महिलाओं को ऐसे मंत्रालय दिए जो इससे पहले किसी महिला के पास नहीं रहा, फिर चाहे यह वित्त मंत्रालय की बात हो या फिर विदेश मंत्रालय की।
 
केंद्रीय बजट से आपकी क्या उम्मीद है? 
 
5 जुलाई को आने वाले बजट में अधिक ध्यान अंतरिम बजट में की गई घोषणाओं के संतुलन पर रहेगा। हमारा ध्यान अगले वर्ष आने वाले बजट पर होगा।
 
क्या आपको देश में महिला वित्त मंत्री जो कि आपकी पड़ोसी भी हैं, का लाभ मिलेगा? 
 
मैं समझती हूं कि पड़ोसी होने का इससे कुछ भी लेनादेना नहीं है। प्रधानमंत्री ने एक निर्णय लिया है और मैं पूरी तरह से आश्वस्त हूं कि यह बहुत ही बुद्घिमानी भरा निर्णय है। निर्मला सीतारमण बहुत ही सक्षम हैं। उन्होंने रक्षा और वाणिज्य दोनों ही मंत्रालयों में अच्छा काम किया है और वित्त मंत्री के रूप में भी वह अच्छा प्रदर्शन करेंगी। 

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