Satya Darshan

महिलाओं के मुफ्त सफर का वादा कैसे होगा पूरा

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि आम परिवारों की बेटियां जब कालेज के लिए निकलती हैं, महिलाएं नौकरी के लिए निकलती हैं तो लोगों का दिल धकधक करता रहता है. उन की सुरक्षा की चिंता बनी रहती है.

अक्षय कुलश्रेष्ठ | जून 7, 2019

अरविंद केजरीवाल ने 5 साल तक राजसुख भोग लिया हैं, पर कहीं यह राजसुख छिन न जाए, इसीलिए अब वे छटपटा रहे हैं और ऐलान दर ऐलान किए जा रहे हैं. उन का नया ऐलान यही है कि मेॆट्रो के अलावा  डीटीसी व क्लस्टर बसों में महिलाओं को किराया नहीं देना पड़ेगा. वैसे फिलहाल 30 से 33 फीसदी ऐसी महिलाएं हैं जो मेट्रो और सरकारी बसों में सफर करती हैं.

भले ही इस व्यवस्था को लागू करने में कुछ महीने का समय लगे, पर कुछ लोग इसे चुनावी स्टंट मान रहे हैं तो कुछ लोग आम जनता के पैसों का दुरुपयोग. बहुत से तो इसे आम जनता से वसूला गया टैक्स इस तरह की योजनाओं पर भेंट चढ़ा हुआ मान रहे हैं.

मुफ्त सेवाएं दे कर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भले ही महिलाओं की वाहवाही और आने वाले विधानसभा चुनाव में उन के वोट बटोरने की तलाश में हों, पर यह जुमला भी कहीं उन की बदनामी की वजह न बन जाए.

इस के अलावा और भी कई घोषणाएं हैं. मसलन सभी स्कूलों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे. अस्पतालों व बसों में मार्शल तैनात किए जाएंगे और पोस्टर भी लगाए जाएंगे कि इस बस में मार्शल तैनात हैं. इस व्यवस्था को शुरू करने में जो भी खर्चा आएगा वह दिल्ली सरकार देगी. मोटेतौर पर इस में 700 से 800 करोड़ तक का खर्चा होगा.

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि आम परिवारों की बेटियां जब कालेज के लिए निकलती हैं, महिलाएं नौकरी के लिए निकलती हैं तो लोगों का दिल धकधक करता रहता है. उन की सुरक्षा की चिंता बनी रहती है. उस को ध्यान में रखते हुए दिल्ली सरकार ने फैसला किया है कि डीटीसी की बसों, मैट्रो और क्लस्टर बसों में महिलाओं को किराया नहीं देना होगा. सरकार का एक ही मकसद है कि महिलाएं ज्यादा से ज्यादा पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल कर सकें. पर साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जो महिलाएं किराया देने में सक्षम हैं, वह सब्सिडी का प्रयोग न करें.

इस पर दिल्ली भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी कहते हैं कि वे इस योजना का विरोध तो नहीं कर रहे हैं लेकिन जो काम 52 महीनों में केजरीवाल नहीं कर सके उसे वे 3 महीने में कैसे कर सकते हैं. वे केवल लोगों को गुमराह कर रहे हैं. दिल्ली में 20,000 बसें चाहिए, लेकिन प्रदेश सरकार के पास सड़क पर चलाने के लिए महज 3,300 बसें हैं. उन्हें  इस ओर ध्यान देना चाहिए था.

वैसे, लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को पूरी तरह बहुमत मिल जाने पर अरविंद केजरीवाल को अपनी कुरसी खिसकती नजर आ रही है, तभी तो वे लोकलुभावन ऐलान किए जा रहे हैं. चुनाव होने से पहले ही लोगों को घोषणाओं के जाल में फंसाने की कोशिशें शुरू हो गई हैं. अभी कई और घोषणाएं होंगी. संभव है कि यह घोषणा भी कर दी जाए कि सभी के घर के बाहर एक बस खड़ी रहेगी. जब लोग चाहें तब सवारी कर सकते हैं.

यदि अरविंद केजरीवाल कुछ कर सकते हैं तो वह आयुष्मान भारत योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना लागू करें. आयुष्मान योजना से गरीबों को दिल्ली, पश्चिम बंगाल और केरल में वंचित रखा जा रहा है. यहां भी हमारी सरकार बनने के बाद यह योजना दिल्ली में लागू हो जाएगी.

मनोज तिवारी ने इस समस्या की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा कि पहले बसों में मार्शल तैनाती की बात कही गई थी, अब उस पर बात नहीं हो रही है. नए स्कूल बनाने के वादे पूरे नहीं हुए. पेयजल, अनधिकृत कालोनियों को नियमित करने, यमुना को साफ करने को ले कर किए गए वादों पर अब वे कुछ नहीं बोल रहे हैं.

मनोज तिवारी का कहना है कि आम आदमी पार्टी ने दिल्ली को नंबर वन बनाने की घोषणा की थी और प्रदूषण में नंबर वन बना दिया. अब फिर से ऐसी घोषणा कर दी जिस पर लोगों की हंसी नहीं रुक रही है. केजरीवाल, जो बिना बोले खाल उधेड़ रहे हैं. बच्चों को मास्क लगा कर चलने और गंदा पानी पीने के लिए मजबूर कर दिया हैं.

अपना मकसद साधने के लिए दिल्ली के मुख्यमंत्री ऐसी घोषणाएं कर तो रहे हैं, पर अमलीजामा पहनाने में अधिकारियों को तमाम तरह के पसीने बहाने पड़ेंगे. अब देखना यह होगा कि आम जनता अरविंद केजरीवाल पर कितना भरोसा कर पाती है.

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