Satya Darshan

कांग्रेस की जीत से बनी लोस चुनावों में हार की भूमिका?

प्रदीप द्विवेदी | जून 4, 2019

राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी में प्रदेश कार्यकारिणी और पदाधिकारियों की बैठक में लोकसभा चुनाव के परिणामों को लेकर चर्चा हुई. इस मौके पर सीएम अशोक गहलोत और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट की मौजूदगी में राहुल गांधी को कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर बने रहने के लिए प्रस्ताव भी पारित किया गया.

दरअसल, राजस्थान विधानसभा चुनाव 2018 केन्द्र की मोदी सरकार के लिए प्री-एक्जाम टेस्ट साबित हुए. यही वजह है कि लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने फिर से कामयाबी हांसिल कर ली. विस में कांग्रेस की जीत के कारण ही लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की हार की भूमिका बीजेपी तैयार कर पाई.

विस चुनाव में बीजेपी को जनता की नाराजगी की वजह समझ में आ गई और इन मुद्दों पर केन्द्र की मोदी सरकार ने तेजी से सुधार शुरू कर दिए. इसी क्रम में गैस-पेट्रोल के दाम, आर्थिक आधार पर आरक्षण, आयकर सीमा वृद्धि, किसानहित की योजनाएं जैसे निर्णय तो लिए ही गए, संगठन के स्तर पर भी सुधार किए गए. विस में हार की वजह से लोस चुनाव में संघ की सक्रियता भी बढ़ गई.

बीजेपी को पता था कि सोशल मुद्दों पर चुनाव लड़ना आसान नहीं है, इसलिए इमोशनल मुद्दों पर फोकस किया गया. पुलवामा अटैक, एयर स्ट्राइक, अभिनंदन की पाकिस्तान से वापसी जैसे घटनाक्रम ने राष्ट्रवाद के मुद्दे को मुख्य मुद्दा बनाने में मदद की.

उधर, कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव के दौरान अपने सारे बड़े और प्रभावी नेताओं को चुनावी मैदान में उतार दिया था, जिसके कारण लोकसभा चुनाव के दौरान सशक्त उम्मीदवारों की कमी रही और इसके चलते कई सीटों पर मजबूरन ऐसे प्रत्याशियों को उतारा गया जो जीतने की हालत में नहीं थे.

केन्द्र में पीएम मोदी सरकार का कामकाज शुरू होते ही राजस्थान में सियासी जोड़तोड़ की गतिविधियां बढ़ जाएंगी. लेकिन, यदि कांग्रेस राजस्थान में अपनी सरकार बचा कर जनहित के कार्यों पर फोकस करने में कामयाब रही तो आने वाले पंचायत, स्थानीय निकाय जैसे चुनावों में सफल हो कर एक बार फिर से राजस्थान की राजनीतिक तस्वीर बदल सकती है.

देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले समय में बीजेपी राजनीतिक जोड़तोड़ से कांग्रेस को प्रदेश की सत्ता से हटाने में सफल होती है या फिर गहलोत-पायलट की जोड़ी हारी हुई बाजी पलटने में कामयाब रहती है.  

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