Satya Darshan

योगी सरकार का फैसला, मीटिंग्स में मोबाइल फोन प्रतिबंधित

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने फैसला किया हैं कि प्रदेश सरकार की कैबिनेट मीटिंग में अधिकारी और मंत्री अब मोबाइल फोन लेकर नहीं जा सकेंगे. मीटिंग में जाने से पहले इन सभी को अपने मोबाइल फोन बैठक कक्ष के बाहर की जमा कराने होंगे।

शैलेंद्र सिंह | जून 4, 2019

मोबाइल फोन केवल बात करने भर के लिये नहीं रह गये है. अब यह फोटो और वीडियो कैमरा का काम करने लगे है. इनसे सबसे बड़ी घबराहट राजनीतिक दलों में है. यह दल चाहे सरकार में हो या विपक्ष में अपनी मीटिंग में मोबाइल फोन को पसंद नहीं करते हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि मोबाइल फोन के जरीये रिकार्डिंग करके सोशल मीडिया पर वीडियों को वायरल करना सहज हो गया है.

उत्तर प्रदेश में सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के सांसद और विधायक के बीच ‘जूते चलने’ का वीडियों वायरल हो गया जिसके कारण पार्टी को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा. इस तरह के तमाम वीडियो पूरे देश के राजनीतिक दलों के लिये मुसीबत की वजह बनते जा रहे हैं. इससे निजात पाने के लिये राजनीतिक दलोें ने अपनी प्रमुख मीटिंग में मोबाइल और वीडियों कैमरा ले जाना प्रतिबंधित कर दिया गया है.

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने फैसला किया हैं कि प्रदेश सरकार की कैबिनेट मीटिंग में अधिकारी और मंत्री अब मोबाइल फोन लेकर नहीं जा सकेंगे. मीटिंग में जाने से पहले इन सभी को अपने मोबाइल फोन बैठक कक्ष के बाहर की जमा कराने होंगे. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव की तरफ से इस आशय के निर्देश जारी किये गये हैं.

केवल सरकार में ही नहीं विपक्ष में भी यह रोग तेजी से बढ रहा है. उत्तर प्रदेश की प्रमुख विपक्षी पार्टी बहुजन समाज पार्टी ने अपनी कोआर्डिनेटर स्तर की मीटिग में सभी को निर्देश दिया कि वह अपने मोबाइल बैठक में ना लाये. बाकी दलो में भी यह बीमारी तेजी से बढ़ रही है.

इसकी प्रमुख वजह यह है कि राजनीतिक दलों में अनुशासन की कमी आई है. गोपनीय बैठकों की बातें अब बड़ी तेजी से वायरल हो कर बाहर आने लगी है. राजनीतिक दल भले ही जाति, धर्म, क्षेत्र और बाहुबल की आलोचना करते हो पर चुनाव को जीतने के लिये वह इन सबका ही सहारा लेते है. 

यह बातें पहले मीडिया में सूत्रों के हवाले से बाहर आती थी अब नेता इनको मोबाइल में रिकार्ड करके मीडिया तक में देने लगे थे. ऐसे में राजनीति दलों की सच्चाई बाहर आने लगी. इससे परेशान होकर अब राजनीतिक दलों ने मोबाइल फोन पर प्रतिबंध लगा दिया है.

केन्द्र की मोदी सरकार तो इससे एक कदम आगे निकल गई है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने सांसदों के साथ पहली मीटिंग में ही साफ कर दिया कि सांसद ‘छपास’ और ‘दिखास’ से दूर रहे. नरेन्द्र मोदी ने सांसदों को बताया कि मीडिया उनको किस तरह से प्रभावित करके सच्चाई निकलवा लेती है. मोदी की सीख का असर उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री आवास में सांसदों की मीटिंग में साफतौर पर देखा गया.

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सरकारी आवास 5 कालीदास मार्ग पर मुख्यमंत्री ने सभी सांसदों के स्वागत में भोज का आयोजन किया. सांसदों ने वहां मौजूद मीडिया को देखकर कुछ बोलने से मना कर दिया.

राजनीति के जानकार इस तरह के प्रतिबंध को मीडिया सेंसरशिप से जोड़कर देखते हैं. नेताओं का मीडिया के साथ एक रिश्ता होता था. अब यह रिश्ता बंद करने का प्रयास किया जा रहा है. नेता यह चाहते है कि मीडिया केवल वह खबरें ही दिखाये जो उनके फेवर की हो. 

कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने अपने प्रवक्ताओं को मीडिया से दूर रहने को कह दिया है. मीडिया से दूरी की बीमारी अब अपने पार्टी के भीतर भी पहुंच गई जिसके तहत मंत्री और बड़े पार्टी पदाधिकारी तक को मीटिग में फोन ले जाने से मना कर दिया गया है.

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