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बीएचयू में धूमधाम से मनाई गई बुद्ध जयंती, वी.सी. राममोहन पाठक ने कहा विश्व को युद्ध नहीं बुद्ध की है जरूरत

वाराणसी (एसडी) | 21 मई, 2019

काशी हिंदू विश्वविद्यालय के पाली एवं बौद्ध अध्ययन विभाग के तत्वावधान में भगवान बुद्ध की 2563 वीं जयंती मंगलवार को विश्वविद्यालय के एच एच सान्ताणी सभागार में आयोजित की गई। इस अवसर पर बुद्ध के उपदेश की प्रासंगिकता पर एक सेमिनार भी आयोजित की गई। 

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा, चेन्नई के कुलपति प्रोफेसर राम मोहन पाठक ने कहा कि भगवान बुद्ध स्वयं एक संचार कर्ता थे। बुद्ध के उपदेशों को आत्मसात करने से ही विश्व के में शांति आएगी। विश्व को युद्ध नहीं बल्कि बुद्ध की जरूरत है।
 
विशिष्ट अतिथि वक्ता प्रोफेसर प्रद्युम्न दुबे ने कहा कि उपकार  सबसे बड़ा धर्म है। दूसरों के कल्याण के अलावा कोई दूसरा धर्म नहीं है। मुख्य वक्ता के रूप में प्रोफेसर हरिशंकर शुक्ला ने कहा कि बौद्ध धर्म एवं दर्शन में कर्म को प्रधान बतलाया गया है। कर्म से ही सारा कार्य संचालित होता रहा है। 

स्वागत पाली एवं बौद्ध अध्ययन विभागाध्यक्ष प्रोफेसर विमलेंद्र कुमार एवं संचालन तथा धन्यवाद ज्ञापन प्रोफेसर लाल जी 'श्रावक' के द्वारा किया गया। प्रोफेसर ए. के. राय, प्रोफेसर अशोक कुमार जैन, प्रोफेसर वजीर हसन , प्रो. प्रीति दुबे सहित बौद्ध भिक्षु एवं शोध छात्र कार्यक्रम में उपस्थित थे। 

इस अवसर पर प्रो. हरिशंकर शुक्ला को पाली साहित्य में निपुणता एवं वर्ष 2017 के राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किए जाने पर पाली एवं बौद्ध अध्ययन विभाग के अध्यक्ष द्वारा अंग वस्त्रम एवं बुके देकर सम्मानित किया गया।

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