Satya Darshan

चुनाव संपंन्न होते ही अमूल ने प्रति लीटर दूध की कीमतों में किया एकमुश्त दो रुपये का इजाफा

अहमदाबाद | मई 21, 2019

19 मई को देश में लोकसभा चुनाव का आखिरी चरण संपंन्न हुआ इधर पशु आहार के दामों में 15 प्रतिशत से ज्यादा तक के हालिया इजाफे की वजह से अमूल ब्रांड के तहत डेरी उत्पादों का विपणन करने वाले गुजरात सहकारी दुग्ध विपणन महासंघ (जीसीएमएमएफ) ने सोमवार को दूध की कीमतों में प्रति लीटर दो रुपये तक के इजाफे की घोषणा की। यह इजाफा सभी छह ब्रांडों पर लागू होगा। 

दिल्ली एनसीआर, गुजरात, पश्चिम बंगाल, कोलकाता, उत्तराखंड और महाराष्ट्र आदि राज्यों के प्रमुख बाजारों में 21 मई से अमूल के दुग्ध उत्पादों की कीमतों में प्रति लीटर दो रुपये का इजाफा होगा। महासंघ के अनुसार अहमदाबाद में अमूल गोल्ड के 500 मिलीलीटर पैक का संशोधित एमआरपी (अधिकतम खुदरा मूल्य) 27 रुपये, अमूल शक्ति 25 रुपये, अमूल ताजा 21 रुपये और अमूल डायमंड 28 रुपये होगा। अलबत्ता गुजरात में गाय के दूध की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। दूध की उपभोक्ता कीमतों में दो साल पहले मार्च 2017 में आखिरी बार संशोधन किया गया था।

जीसीएमएमएफ के अनुसार पिछले एक साल के दौरान चावल की तेल-रहित भूसी जैसी प्रमुख पशु आहार सामग्री की कीमतों में 61 प्रतिशत तक, पॉलिश चावल चूरे में 22 प्रतिशत तक, शीरे में 82 प्रतिशत तक और मक्का में 63 प्रतिशत तक का खासा इजाफा हुआ है। इसके परिणामस्वरूप मवेशियों के चारे के दामों में 15 प्रतिशत से भी अधिक तक की वृद्धि हुई है। 

जीसीएमएमएफ ने सोमवार को एक आधिकारिक सूचना में कहा, 'इसी प्रकार इस गर्मी में हरे चारे के दामों में 100 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी देखी गई है। दूध उत्पादकों के लिए दूध खरीद के दामों में चारे और चारे की लागत, श्रम लागत, पशु चिकित्सा उपचार की लागत आदि जैसी उत्पादन लागत और उनके परिवार की आजीविका चलाने के लिए कुछ लाभ जरूर शामिल रहना चाहिए। 

दूध उत्पादन की लागत में वृद्धि को देखते हुए गुजरात के सभी दूध संघों के सदस्यों ने पिछले कुछ महीनों से दूध खरीद का न्यूनतम मूल्य बढ़ाकर 30-50 रुपये प्रति किलोग्राम (5-8 प्रतिशत वसा) कर दिया है। इससे हमारे दुग्ध उत्पादकों को नए पशु शामिल करने और दूध उत्पादन जारी रखने का प्रोत्साहन मिलेगा और उनकी आजीविका को सहारा मिलेगा।'
 
पिछले दो सालों के दौरान घरेलू और अंतरराष्ट्रीय डेरी बाजार में प्रतिकूल परिस्थितियां नजर आई हैं। उद्योग ने स्किम्ड मिल्क पाउडर (एसएमपी), संपूर्ण दुग्ध पाउडर (डब्ल्यूएमपी) और बटर ऑयल जैसी जिंसों की कीमतों में गिरावट देखी है। 

महासंघ ने कहा है कि इसके परिणामस्वरूप देश भर में दूध की उत्पादक कीमतों में गिरावट आई है जिससे दुग्ध उत्पादकों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। हालांकि गुजरात की दुग्ध सहकारी समितियों ने अपने उत्पादकों को दूध की लाभकारी कीमतों का भुगतान जारी रखा।

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