Satya Darshan

वाराणसी के चुनावी समीकरणों पर कितना असर डालेगा प्रियंका का रोड शो

ऋषभ कु. शर्मा | मई 16, 2019

15 मई को हुए प्रियंका के रोड शो में अच्छी खासी भीड़ इकट्ठा हुई. कांग्रेस समर्थकों के मुताबिक प्रियंका का लोगों से मिलने का अंदाज उन्हें उनकी दादी इंदिरा जैसा लगता है. लेकिन मोदी के संसदीय क्षेत्र में इसका क्या असर होगा?

काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के सामने लगी पंडित मदन मोहन मालवीय की मूर्ति चारों तरफ से कांग्रेस के झंडों और कार्यकर्ताओं से घिरी हुई है. उत्साही कार्यकर्ता नारेबाजी कर रहे हैं. राहुल गांधी के नारे "चौकीदार चोर है" की गूंज सबसे ज्यादा सुनाई दे रही है. मीडिया का बड़ा हुजूम यहां मौजूद है क्योंकि यहां कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी रोड शो करने आ रही हैं. वाराणसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र है. पिछली बार वो लगभग पौने चार लाख वोट के अंतर से जीते थे. पिछली बार उनको दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने यहां चुनौती दी थी.

कांग्रेस ने पिछली बार की तरह इस बार भी अजय राय पर भरोसा जताया है. सपा-बसपा गठबंधन के टिकट पर कांग्रेस छोड़कर सपा में शामिल हुईं शालिनी यादव हैं. महामना मालवीय की मूर्ति के पास एक छोटा सा मंच लगा है. इसके ऊपर नरेंद्र मोदी के स्वागत का पोस्टर लगा है. फोटो पत्रकारों को उम्मीद है कि प्रियंका इस मंच से भाषण देंगी तो ऊपर लगी मोदी के पोस्टर से वो एक अच्छा शॉट ले पाएंगे.

Indien Priyanka Gandhi Vadra beim Wahlkampf in Varanasi

5 बजे ये रोड शो शुरू होकर बीएचयू से गोदोलिया तक जाना था. इसके बाद प्रियंका को काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन करना था, लेकिन प्रियंका यहां करीब सवा छह बजे पहुंची. प्रियंका के आने से पहले बड़ी संख्या में कांग्रेस समर्थक इकट्ठा हो चुके थे. प्रियंका के साथ छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल, राजीव शुक्ला और अजय राय भी थे. प्रियंका ने महामना की मूर्ति पर माल्यार्पण किया और रोड शो शुरू हुआ. हालांकि इस बात को कैसे देखा जाए कि जिन मदन मोहन मालवीय को भारत रत्न देने में कांग्रेस के पसीने छूट गए, उन्हीं मालवीय की मूर्ति पर माल्यार्पण से यह रोड शो शुरू होता है.

प्रियंका को एसपीजी सुरक्षा घेरा मिला है. ऐसे में उनके खुले ट्रक के चारों और कड़ी सुरक्षा है. अर्धसैनिक बलों की महिला सुरक्षाकर्मी बड़ी संख्या में यहां मौजूद हैं. प्रियंका ने उस मंच पर भाषण नहीं दिया. वो सीधे ट्रक में चढ़ कर लोगों का अभिवादन करने लगीं. रोड शो कोई 100 मीटर आगे बढ़ा तभी सड़क के डिवाईडर से एक युवक गिर जाता है. प्रियंका के सुरक्षाकर्मी तुरंत उन्हें इसकी खबर देते हैं. वो ट्रक रुकवाकर तुरंत उस युवक के पास आती हैं. उसकी मदद करती हैं और एंबुलेंस बुलवाकर उसे अस्पताल भेज देती हैं. प्रियंका और राहुल पिछले कुछ दिनों में कई बार ऐसा कर चुके हैं. ये कहीं ना कहीं उनकी स्टाइल ऑफ पॉलिटिक्स बताता है.

Varanasi Narendra Modi Indien

रोड शो में चल रहे बीएचयू के छात्र विश्वास कहते हैं कि मोदी के रोड शो में इससे ज्यादा भीड़ थी. विश्वास का कहना है, "प्रियंका के आने से मोदी का मार्जिन थोड़ा बहुत कम हो सकता है लेकिन मोदी हार ही जाएं ऐसा संभव नहीं है." अपने समर्थन के बारे में विश्वास कहते हैं कि 2014 में वो मोदी के समर्थक थे लेकिन बढ़ती बेरोजगारी और कई सारे वादे पूरे ना कर पाने को लेकर अब वो मोदी के समर्थक तो नहीं रहे हैं. विश्वास की बात को बीच में काटते हुए एक कांग्रेस कार्यकर्ता कहते हैं कि मोदी के रोड शो में बीजेपी ने पैसे देकर भीड़ बुलाई थी. उनसे पांच हजार रुपये में 50 आदमी लाने को कहा था. कई सारे लोग बाहर से भी आए थे. इसलिए भीड़ इतनी ज्यादा थी.

प्रियंका अपने हाथ में एक गंदे पानी की बोतल लेकर चल रही हैं. इसे वो गंगा का पानी बता रही हैं. जहां भी लोगों को हुजूम उनका स्वागत करना चाह रहा है वो ट्रक से तुरंत उतर नीचे आ जाती हैं. कांग्रेस कार्यकर्ताओं में उनके नीचे उतरते ही जोश भर जाता है. हालांकि कुछ सुरक्षाकर्मी बुदबुदाते हैं कि ये बार-बार उतरकर हमारा काम मुश्किल कर रही हैं. बनारस के लोग अपनी छतों से लगातार प्रियंका की वीडियो और तस्वीरें ले रहे हैं.

रोड शो को अपनी दुकान पर बैठकर देख रहे सकल मिश्रा कहते हैं,"प्रियंका इंदिरा जैसी ही लागत है. बोलत भी वैसे ही है. पर यहां तो मोदी के आगे सब फेल हैं. अबकी तो पता नहीं पर अगली बार प्रियंका को राहुल से आगे कर कांग्रेस लड़े तो जीत सकत है. ये लगत है इंदिरा जैसी". कांग्रेस के समर्थक भी इसे दूसरे नंबर की लड़ाई मान रहे हैं क्योंकि नरेंद्र मोदी को यहां हरा पाना इस बार तो संभव नहीं लगता. हालांकि एक स्थानीय कांग्रेस नेता का कहना है कि ये 2022 की तैयारी है. प्रियंका यूपी की प्रभारी हैं. कांग्रेस का काडर यहां घट गया है लेकिन प्रियंका के आने से कार्यकर्ता सक्रिय हुए हैं. अगर लोकसभा चुनाव के बाद भी प्रियंका यहां सक्रिय रहीं तो कांग्रेस के समीकरण बदल सकते हैं.

पहले प्रियंका ने कई बार कार्यकर्ताओं के बीच वाराणसी से चुनाव लड़ने की बात रखी. मीडिया में इस तरह की अटकलें भी लगाई गईं कि वो यहां से चुनाव लड़ेंगी. लेकिन नामांकन के आखिरी दिनों में अजय राय को टिकट दिया गया जो नरेंद्र मोदी के लिए वॉकओवर जैसा था. अजय राय 2017 में विधायक का चुनाव भी नहीं जीत सके थे. बताया जाता है कि इस बार वो टिकट के इच्छुक नहीं थे पर आलाकमान के निर्देशों का पालन करने के लिए मैदान में हैं. कुछ लोगों का कहना है कि बीएसएफ से बर्खास्त जवान तेज बहादुर यादव को जब गठबंधन ने टिकट दिया तो एक माहौल बनने लगा. ये जीत का माहौल तो नहीं था लेकिन मोदी की जीत का मार्जिन कम कर सकता था.

अजय राय के यहां खुद के वोटर हैं. कांग्रेस के वोटर नहीं हैं. इस रोड शो में एक-दो जगह भाजपा समर्थकों ने मोदी-मोदी के नारे लगाए लेकिन प्रियंका इनसे विचलित नहीं दिखती हैं. वो मुस्कराकर उनका अभिवादन करती हैं. और आगे चलती जाती हैं.

रिक्शा चला रहे भीमसिंह यादव इस बार मोदी से नाराज हैं. उनका कहना है कि नोटबंदी में हम लाइन में खड़े रहे और पैसे वाले ऊपर से अपने नोट बदलवा ले गए. पिछली बार 15 लाख देने की बात कही थी पर कुछ नहीं मिला. भीमसिंह को उज्ज्वला में गैस कनेक्शन मिला है लेकिन वो कहते हैं कि सिलेंडर महंगा होने की वजह से भरवा नहीं पा रहे.

हालांकि बनारस में मोदी के पक्ष में स्पष्ट माहौल है. इसकी वजह खुद नरेंद्र मोदी ही हैं. नरेंद्र मोदी के प्रचार के लिए बीजेपी के कई बड़े नेता बनारस में मौजूद हैं. ये सब जीत का मार्जिन बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं. 

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