Satya Darshan

नीली स्याही पर लगे काले दाग

नयी दिल्ली (एसडी) | मई 14, 2019

भारत में चुनावी धांधली रोकने के लिए वोटरों की अंगुली पर इस्तेमाल होने वाली स्याही की गुणवत्ता पर इधर हर चुनाव में सवाल उठते रहे हैं. इस बार भी देश के कई हिस्सों से इसके तुरंत साफ हो जाने की शिकायतें मिल रही हैं.

चुनाव आयोग इन शिकायतों को खारिज करता रहा है. पूर्व चुनाव आयुक्त नसीम जैदी समेत कई लोगों ने इस मामले की जांच की मांग उठाई है. वोटरों की अंगुली पर यह स्याही लगाने का मकसद चुनावी धांधली को रोकना था. यह स्याही अपने मकसद में पूरी तरह कामयाब नहीं रही है. हाल में दक्षिण अफ्रीकी चुनावों में भी इस अमिट स्याही की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए तमाम राजनीतिक दलों ने भारी हंगामा किया है.

भारत में वर्ष 1962 में चुनाव आयोग ने विधि मंत्रालय, नेशनल फिजिकल लैबोरेटरी और नेशनल रिसर्च डेवलपमेंट कार्पोरेशन के साथ मिल कर कर्नाटक सरकार के उपक्रम मैसूर पेंट्स के साथ लोकसभा व विधानसभा चुनावों के लिए अमिट स्याही की सप्लाई के करार पर हस्ताक्षर किए थे. वह कंपनी उसी समय से इस स्याही की सप्लाई करती रही है. कंपनी भारत के अलावा 25 से ज्यादा यूरोपीय और अफ्रीकी देशों को भी इस स्याही की सप्लाई करती रही है. 

इस साल लोकसभा चुनाव के पहले और दूसरी चरण के बाद ही तमाम हिस्सों से लोग महज नेल पालिश रिमूवर से इस स्याही को मिटा कर अपनी तस्वीरें सोशल मीडिया पर पोस्ट करने लगे. द क्विंट वेबसाइट की संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी ऋतु कपूर भी इनमें शामिल थीं. इस वेबसाइट ने इस बारे में एक रिपोर्ट भी छापी थी.

वैसे तो पहले भी ऐसी शिकायतें मिलती रही हैं. लेकिन अब इनकी बाढ़ आ गई है. बंगलुरू के आर्किटेक्ट परीक्षित दलाल ने तो बंगलुरू उत्तर लोकसभा क्षेत्र के चुनाव अधिकारी से इस बारे में बकायदा लिखित शिकायत भी की है. दलाल ने अपनी शिकायत में कहा है, वोट डालने के बाद मैंने साबुन से हाथ धोए और यह देखने के लिए नेल पालिस रिमीवर का इस्तेमाल किया कि स्याही का दाग मिटता है या नहीं.  मुझे यह देख कर सदमा लगा कि यह दाग पूरी तरह मिट गया है.

अब ऐसी शिकायतें बढ़ने के बाद तमाम लोगों और संगठनों ने इस स्याही की गुणवत्ता की जांच करने की मांग की है. पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त नसीम जैदी कहते हैं, इस मामले की जांच की जानी चाहिए और अगर कोई दो बार वोट डालने के लिए इस स्याही को मिटाने में सफल रहता है तो चुनाव कानून के संबंधित प्रावधानों के तहत पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराई जानी चाहिए. विशेषज्ञों का कहना है कि इस स्याही का जीवनकाल महज छह महीनों का है यानी उसके बाद यह खराब हो जाती है.

कांग्रेस के प्रवक्ता संजय झा ने भी इस स्याही के आसानी से मिटने की शिकायत की है. उनका कहना था, मतदान करने के एक घंटे बाद ही नेल पॉलिस रिमूवर लगाने पर स्याही गायब हो गई. उन्होंने मतदान के बाद की और अंगुली पर स्याही का निशान मिटने की दो तस्वीरें भी अपने ट्विटर पर पोस्ट की है. हैदराबाद की एक पत्रकार ने तो इस स्याही को मिटाते हुए एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर अपलोड किया है. उनके अलावा देश भर के कई पत्रकारों और नेताओं ने ऐसी तस्वीरें पोस्ट की हैं.

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