Satya Darshan

पाक मदद को सशर्त तैयार अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष, खत्म करनी होगी सब्सिडी

विश्व दर्शन | मई 14, 2019

पाकिस्तान और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के बीच 6 अरब डॉलर के बेलआउट पैकेज पर सहमति बन गई है. पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था बुरे हाल में है और देश के सामने भुगतान संकट से निबटने की चुनौती है.

पाकिस्तान के वित्त मंत्रालय और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के अधिकारियों के बीच राजधानी इस्लामाबाद में तकरीबन रात भर चली कई दौर की बैठक के बाद इस डील पर सहमति बनी. 1980 के दशक से अब तक पाकिस्तान ने 12 बार अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की मदद ली है. वाशिंगटन में मौजूद मुद्रा कोष के बोर्ड की अभी इस डील पर मंजूरी बाकी है. अगर मंजूरी मिली तो पाकिस्तान को 13वीं बार मदद मिलेगी.

सोमवार को दोनों पक्षों ने इस बारे में जानकारी दी. अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के तरफ से पाकिस्तान को यह आर्थिक मदद 39 महीनों में मिलेगी. पाकिस्तान के वित्त मंत्री हाफिज शेख ने बताया कि पाकिस्तान को इसके बदले में कुछ आर्थिक सुधारों को लागू करना होगा जिन पर दोनों पक्ष रजामंद हुए हैं.

डील के मुताबिक पाकिस्तान अपनी मुद्रा पर से केंद्रीय बैंक का नियंत्रण खत्म कर देगा और उसे बाजार आधारित विनिमय दर (एक्सचेंज रेट) को लागू करना होगा. इसके अलावा घाटे में चल रही कंपनियों का निजीकरण होगा साथ ही ऊर्जा और कृषि के क्षेत्र में सब्सिडी को खत्म करना होगा.

शेख के मुताबिक वर्ल्ड बैंक और एशियन डेवलपमेंट बैंक भी इससे अलग 3 अरब डॉलर की रकम पाकिस्तान को मुहैया कराएंगे. हालांकि पाकिस्तान की जरूरत इतने भर से भी पूरी नहीं होगी. पाकिस्तान को उम्मीद है कि चीन जैसे सहयोगी देशों और खाड़ी के अमीर देशों की मदद के बलबूते वह कुछ और रकम हासिल करने में कामयाब होगा.

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की तरफ से जारी बयान में कहा गया है, "पाकिस्तान विकास की धीमी गति, बढ़ती महंगाई, भारी कर्ज और कमजोर बाहरी स्थिति वाले चुनौतीपूर्ण आर्थिक वातावरण से जूझ रहा है."

तकरीबन 22 करोड़ की आबादी वाले मुस्लिम देश पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति पिछले कुछ समय से लगातार खराब चल रही है. पिछले साल इमरान खान के प्रधानमंत्री बनने के बाद यह और बुरे दौर में पहुंच गई. प्रधानमंत्री इमरान खान ने पहले कोशिश थी कि पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से मदद न लेनी पड़े. उन्होंने चीन, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात से मदद की गुहार लगाई थी.

देश में महंगाई की दर बढ़ कर आठ फीसदी से ज्यादा हो गई है और पिछले एक साल में पाकिस्तान रुपये का मोल लगभग एक तिहाई घट गया है. ऐसे में पाकिस्तान के पास मुश्किल से दो महीने के लिए आयात का बिल चुकाने लायक ही विदेशी मुद्रा बची है. मजबूर हो कर उसे अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से मदद मांगनी पड़ी.

पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से कई बार मदद मांगी है लेकिन अकसर इसके लिए लगाई जाने वाली शर्तें बेहद अलोकप्रिय होती हैं. अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने अनुमान लगाया है कि पाकिस्तान में मौजूदा साल में विकास दर 2.9 फीसदी रहेगी जो 2018 में 5.2 फीसदी थी.

आईएमएफ के साथ बातचीत के दौर में ही पाकिस्तान के वित्त मंत्री असद उमर को इस्तीफा देना पड़ा. उनकी जगह वित्त मंत्रालय की कमान हाफीज शेख ने संभाली. इतना ही नहीं आईएमएफ के अर्थशास्त्री रेजा बाकिर को अब तारिक बाजवा की जगह सेंट्रल बैंक का गवर्नर भी नियुक्त किया गया है.

(रॉयटर्स)

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