Satya Darshan

तथ्यों को छिपाने पर दर्ज हो FIR - प्रश्नांत भूषण

जेपी सिंह | मई 11, 2019

उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को राफेल डील मामले में दायर पुनर्विचार याचिकाओं और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के खिलाफ दायर अवमानना मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया। उच्चतम न्यायालय ने पिछली सुनवाई में दोनों मामलों की एक साथ लिस्टिंग की थी। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया रंजन गोगोई, जस्टिस कौल और जस्टिस जोसेफ की पीठ ने आप नेता संजय सिंह की याचिका खारिज कर दी है। 

वहीं प्रशांत भूषण की ओर से दायर की गई पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। इससे पहले उच्चतम न्यायालय ने संजय सिंह की टिप्‍पणी पर कड़ी प्रतिक्रिया जताई थी। दो घंटे तक चली सुनवाई के बाद चीफ पीठ ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।

इससे पहले वकील प्रशांत भूषण ने पीठ के समक्ष बहस करते हुये कहा कि फैसले की समीक्षा का आधार ये है कि दिसंबर 2018 का जजमेंट इसी पर आगे बढ़ रहा था कि याचिकाकर्ता सौदे को रद्द करने की मांग कर रहे थे, जबकि हमलोग ललिता कुमारी जजमेंट के आधार पर सौदे की जांच और एफआईआर दर्ज करने की मांग कर रहे हैं।

रिव्यू की जरूरत इसलिए भी है, क्योंकि सरकार की ओर दी गई गलत सूचनाओं के कारण जजमेंट में कई त्रुटियां हैं। यहां तक कि सरकार ने खुद इस मामले में करेक्शन एप्लिकेशन दायर किया है।

प्रशांत भूषण ने सवाल उठाया कि सरकार को कैसे पता चला कि कैग की रिपोर्ट में बाद में कुछ हिस्से जोड़े जाएंगे? सरकार को नवंबर 2018 में कैसे पता चला कि कैग 2019 की रिपोर्ट में कीमतों से जुड़ा हिस्सा जोड़ेगा?’ भूषण ने कहा कि सौदे में एंटी करप्शन क्लॉज क्यों हटाया गया। इस बारे में सरकार जवाब नहीं दे पाई है।

यह अकेला मुद्दा फैसला सुनाने के लिए पर्याप्त आधार है।इस सौदे में न तो कोई बैंक गारंटी ली गई और न ही कोई सॉवरन गारंटी। राफेल विमान की सप्लाई में देरी हो रही है, जबकि पहले कहा गया था कि 36 विमानों की सप्लाई जल्द हो जाएगी।

प्रशांत भूषण ने सरकार के इस दावे पर भी सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) इस सौदे पर केवल नजर रखे हुए था न कि पीएमओ किसी समानांतर सौदेबाजी में शामिल था। भूषण ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) का भी इसमें रोल था।सौदे में कई ऐसी बातें हैं जिससे तय होता है कि पीएमओ नजर रखने से ज्यादा कुछ कर रहा था जिसकी पूरी जांच होनी चाहिए। 

प्रधानमंत्री ने जब सौदे का ऐलान किया, उस वक्त अनिल अंबानी और फ्रांस के रक्षा अधिकारियों के बीच बैठक हो रही थी। लगभग उसी वक्त अनिल अंबानी को फ्रांस सरकार की ओर से टैक्स में बहुत बड़ी छूट मिली।

अरुण शौरी ने झूठी गवाही को लेकर सवाल उठाया कि सरकार कहती है कि सभी दस्तावेज कैग को दिए जा सकते हैं तो कोर्ट को देने में क्या दिक्कत है? जजमेंट में हर एक त्रुटि के लिए सरकार की ओर से दी गई गलत जानकारी जिम्मेवार है। कोर्ट ने सरकार में भरोसा जताया लेकिन सरकार ने इस भरोसे को तोड़ा। अरुण शौरी ने जजमेंट में और भी त्रुटियों की ओर इशारा किया और कहा कि ये एक्सीडेंटल नहीं है।

अटॉर्नी जनरल वेणुगोपाल ने सरकार का पक्ष रखते हुये कहा कि याचिकाकर्ताओं की ओर से कुछ मूलभूत बातें उठाई गई हैं। वेणुगोपाल उन बातों में कुछ अन्य पहलू जोड़कर मुद्दे को तूल दिया गया है। विमान की कीमतों की जहां तक बात है तो यह इंटरगवर्मेंटल एग्रीमेंट (आईजीए) की धारा 10 के तहत तय की गई है वेणुगोपाल आईजीए के तहत कीमतें नहीं बताई जा सकतीं। कोर्ट ने भी कीमतें नहीं पूछी हैं बल्कि प्रोसीजर की जानकारी मांगी गई है। हमने प्रोजीसर के बारे में बता दिया है। अगर इसमें कोई त्रुटि है भी तो सौदे की समीक्षा का यह आधार नहीं बनता। याचिकाकर्ता सौदे पर सवाल उठाना चाह रहे हैं जो देश के लोगों की सुरक्षा को प्रभावित करता है। राफेल विमान सजावट के लिए नहीं हैं। ये हरेक व्यक्ति की सुरक्षा के लिए निहायत जरूरी है। दुनिया में ऐसा कहीं नहीं होता कि ऐसा मामला कोर्ट में लाया जाए।

वेणुगोपाल की बात सुनकर जस्टिस केएम जोसफ ने ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी के बारे में पूछा। उन्होंने अटॉर्नी जनरल से कहा कि इसका फैसला कौन करता है, क्या ये कोर्ट इस पर निर्णय ले सकता है? 

सीजेआई रंजन गोगोई ने सॉवरन गारंटी के बारे में सवाल उठाया। अटॉर्नी जनरल ने इसके जवाब में रूस और अमेरिका के साथ हुए रक्षा सौदों का हवाला दिया, जिसमें बैंक गारंटी से भारत को छूट दी गई है। 

जस्टिस जोसफ ने डोमेन एक्सपर्ट के डिसेंट नोट के बारे में जानकारी मांगी, क्योंकि प्रशांत भूषण के मुताबिक इंटरनेशनल निगोशिएटिंग टीम के तीन रक्षा विशेषज्ञों ने राफेल के मूल्य निर्धारण के संबंध में आपत्तियां लेते हुए एक असहमति नोट जारी किया था। 

जस्टिस जोसफ के इस सवाल पर वेणुगोपाल ने कहा कि तीन रक्षा विशेषज्ञों ने जो मुद्दे उठाए हैं उसे डिफेंस इक्वीजिशन कमेटी को रेफर कर दिया गया है। अंततः तीनों विशेषज्ञ सहमत हो गए। 

जोसफ ने पूछा, तीनों विशेषज्ञों की सहमति कोर्ट में पेश करने में आपको कोई आपत्ति है? न्यायिक सीमाओं का हवाला देते हुए एटॉर्नी जनरल ने कहा कि कोर्ट को इसमें नहीं जाना चाहिए, लेकिन इसके बावजूद आप चाहते हैं तो मैं ऐसा करूंगा। इन सभी दलीलों को सुनने के बाद उच्चतम न्यायालय ने राफेल सौदे की रिव्यू याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।

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