Satya Darshan

बिजली कटौती से हलकान 'उत्तम' प्रदेश

लखनऊ | मई 9, 2019

उत्तर प्रदेश में चुनावों के बीच बिजली व्यवस्था पटरी से उतर गई है। बेतहाशा गर्मी और लू थपेड़ों के बीच बढ़ी मांग के चलते प्रदेश के तमाम हिस्सों में बिजली की आपूर्ति में दिक्कत खड़ी हो गई है। 

मई की शुरुआत में ही प्रदेश में बिजली की मांग बढ़कर 20,000 मेगावॉट प्रतिदिन के पार पहुंच गई। हर रोज बढ़ती मांग के चलते उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) का आपूर्ति रोस्टर बिगडऩे लगा है। मई के दूसरे सप्ताह की शुरुआत होते ही छोटे शहरों के साथ ही बड़े शहरों में भी बिजली कटौती शुरू हो गई है। कॉरपोरेशन अधिकारियों का कहना है कि मांग बढऩे के साथ ही बहुत सी जगहों से फाल्ट की शिकायत भी आने लगी है जिसके चलते भी कटौती का सामना करना पड़ रहा है। 

उत्तर प्रदेश के लगभग सभी हिस्सों में इस समय बेतहाशा गर्मी पड़ रही है। मई के शुरुआती तीन दिनों में फनी चक्रवात के असर के चलते पारा थोड़ा गिरा था लेकिन बीते चार दिनों से यह रोज बढ़ रहा है। लू और गर्म हवा के थपेड़ों के चलते बिजली की मांग खासी बढ़ी है। 

पावर कॉरपोरेशन के अधिकारियों की मांनें तो अप्रैल के आखिरी हफ्ते में ही मांग 20,000 मेगावॉट के पार पहुंच गई  थी जो इस समय करीब 21,000 मेगावॉट के लगभग है। कॉरपोरेशन के सामने समस्या ग्रिड की क्षमता की भी है। 
 
उनका कहना है कि ग्रिड की क्षमता 22,000 मेगावॉट की है लिहाजा इस पर 21,000 से ज्यादा का लोड भी नहीं लिया जा सकता है। इसके चलते बाहर से बिजली खरीद कर भी प्रदेश में संकट को दूर नहीं किया जा सकता है। इस समय प्रदेश ग्रिड से अपनी अधिकतम सीमा तक बिजली ले रहा है। बीते साल प्रदेश में बिजली की अधिकतम मांग 20,000 मेगावॉट तक रही थी। 

पावर कॉरपोरेशन का कहना है कि बीते काफी समय सें प्रदेश में जिलों को 24 घंटे, शहरों को 22 घंटे, तहसीलों को 20 घंटे और गांवों को 16 से 18 घंटे बिजली दी जा रही थी। बदली हुई परिस्थितियों में इस रोस्टर को बदलना पड़ेगा। 

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