Satya Darshan

इसरो ने पांच सेटेलाइट्स की मदद से लगाया 'फोनी तूफान' का सटीक पूर्वानुमान, सुरक्षित हुए हजारों लोग

चेन्नई (एसडी) | मई 5, 2019

बंगाल की खाड़ी में आए फोनी महातूफान के चलते ओडिशा में करीब एक दर्जन लोग जान गवां बैठे और सैकड़ों लोग प्रभावित हुए, लेकिन इस भयावह आपदा को भारतीय मौसम विज्ञानियों के प्रयासों के चलते टाला जा सका। 

दरअसल, एक हफ्ते पहले मौसम वैज्ञानिकों ने दक्षिणी हिंद महासागर में निम्न दबाव की स्थिति की पहचान की थी। 5 भारतीय सैटलाइटों ने उस दबाव क्षेत्र पर लगातार नजर बनाए रखी जो फोनी चक्रवाती तूफान का रूप ले रहा था। 

फोनी 'अत्यंत भीषण चक्रवात' का रूप लेता जा रहा था, उधर इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (इसरो) द्वारा भेजे गए सैटलाइट हर 15 मिनट पर ग्राउंड स्टेशन पर डेटा भेज रहे थे। इस डेटा से फोनी को ट्रैक करने, उसके मूवमेंट के बारे में सटीक पूर्वानुमान लगाने और इस तरह सैकड़ों जिंदगियों को बचाने में मदद मिली। 

भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक, फोनी की तीव्रता, लोकेशन और उसके आस-पास बादलों के अध्ययन के लिए इनसेट-3डी, इनसेट-3डीआर, सेक्टसेट-1, ओसियनसेट-2 और मेघा ट्रॉपिक्स सैटलाइटों द्वारा भेजे गए डेटा का इस्तेमाल किया गया। फोनी के केंद्र के 1,000 किलोमीटर के दायरे में बादल छाए हुए थे, लेकिन बारिश वाले बादल सिर्फ 100 से 200 किलोमीटर के दायरे में थे। बाकी बादल करीब 10 हजार फीट की ऊंचाई पर थे।

आईएमडी के डायरेक्टर जनरल केजे रमेश ने बताया कि सैटलाइटों का पूर्वानुमान में महत्वपूर्ण भूमिका है, खासकर तूफान के दौरान। इनके द्वारा भेजे गए डेटा से हमें सटीक पूर्वानुमान जारी करने में मदद मिलती है। 

सैटलाइटों के डेटा के हिसाब में आईएमडी ने इस बात का सटीक पूर्वानुमान लगाया कि फोनी किस जगह पर लैंडफॉल करेगा। इस वजह से ओडिशा, आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल ने 11.5 लाख से ज्यादा लोगों को सुरक्षित जगहों पर शिफ्ट कर दिया। 

सेक्टसेट-1 से भेजे गए डेटा से चक्रवाती तूफान के केंद्र पर नजर रखी गई, वहीं ओसनसेट-2 समुद्री सतह, हवा की गति और दिशा के बारे में डेटा भेज रहा था। 

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