Satya Darshan

अब 200 टन गोल्ड ने देश छोड़ा

नयी दिल्ली (एसडी) | मई 2, 2019

दिल्ली दक्षिण लोकसभा से चुनाव लड़ रहे नवनीत चतुर्वेदी ने सरकार और रिजर्व बैंक पर बड़े गंभीर आरोप लगाए हैं चतुर्वेदी ने कहा कि रिजर्व बैंक का 200 टन सोना मोदी सरकार ने आते ही चोरी छुपे विदेश भेज दिया है। 

चतुर्वेदी ने कहा बैंक ऑफ़ इंटरनेशनल सेटेलमेंट्स (बीआईएस) जो स्विजरलैंड में है। उसमें भेजा गया है। यह सोना विदेश में तब भेजा जाता है। जब वहां से कर्ज़ लेना हो, डॉलर लेना हो या क्षमता से अधिक नोट छापना हो।

चतुर्वेदी ने आरोप लगाया है, कि 1991 में जब देश आर्थिक संकट से गुजर रहा था। तब 45 टन सोना बैंक ऑफ़ इंग्लैंड में गिरवी रखा गया था। 2015 में मोदी सरकार ने एक बार फिर देश का सोना विदेश के बैंक आप इंग्लैंड और बैंक आफ इंटरनेशनल सेटलमेंट में रखा है। इस तथ्य को मोदी सरकार ने क्यों छुपाया है। रिजर्व बैंक भी इस बात की जानकारी क्यों नहीं दे रहा है।

नवनीत, यहीं नहीं रुके, उन्होंने कहा एक साजिश के तहत मोदी सरकार ने विदेश में सोना भेजकर बहुत बड़ी गड़बड़ी की है। रिजर्व बैंक के रिकॉर्ड में, 30 जून 2014 तक सोना भारत में ही रखा हुआ था। उसके बाद 200 टन सोना विदेश गया है। वित्त मंत्री और रिजर्व बैंक ने यह बात क्यों छुपाई। किस लिए सोना विदेश भेजा गया। यह कब वापस आएगा। यह जानकारी भी रिजर्व बैंक और वित्त मंत्रालय नहीं दे रहा है।

दिल्ली के खोजी पत्रकार नवनीत चतुर्वेदी का दावा है, कि उन्होंने, गुजरात के जब मोदी मुख्यमंत्री थे। उस समय जीएसपीसी के घोटाले को उजागर किया था। उनका यह भी कहना कहना है, कि राफेल का घोटाला भी उन्होंने उजागर किया था। जिसे कांग्रेस पार्टी ने अपना मुख्य मुद्दा बना लिया है। 

नवनीत चतुर्वेदी का यह भी कहना है, कि भाजपा के आंतरिक फंड में बड़े पैमाने हुए घोटाले को उन्होंने उजागर किया था। इस सारे मामले को मोदी सरकार ने दबाकर रखा है।

पुरानी कहावत है, चुनाव लड़ते हैं, तो 5 पीढ़ियों का इतिहास विपक्षी सामने ले आते हैं। कुछ ऐसी ही स्थिति 2019 के चुनाव में देखने को मिल रही हैं। इतिहास जानने के लिए चुनाव मैदान में उतरना जरूरी है।

पढ़े पूरा प्रकरण है क्या

1991 में पहली बार जब मुल्क गंभीर अर्थसंकट से गुजरा था तब तत्कालीन सरकार ने करीब 47 टन गोल्ड बैंक ऑफ़ इंग्लैंड में गिरवी रख कर जैसे -तैसे स्थिति काबू में किया। नवंबर 2009 में भारत सरकार ने आइएमएफ के जरिए 200 टन गोल्ड ख़रीदा था ,तब यह माना गया कि देश की आर्थिक व्यवस्था मजबूत है।

बैंक ऑफ़ इंटरनेशनल सेटलमेंट्स बीआईएस -जो स्विट्ज़रलैंड में है ,एक केंद्रीय बैंक है जिसके कई देश सदस्य है ,भारत का रिज़र्व बैंक भी इसका एक सदस्य है , नवनीत को पता चला कि रिज़र्व बैंक के नागपुर वॉल्ट से 200 टन सोना गायब है वो भी जुलाई 2014 से तब उन्हें अधिक आश्चर्य नहीं हुआ क्यूंकि वो मानते है कि मोदी है तो मुमकिन है। यहां बताना चाहेंगे कि नवनीत चतुर्वेदी ही वो खोजी पत्रकार है जिन्होंने मोदी के गुजरात सीएम रहते हुए जीएसपीसी घोटाले को बेनकाब किया था और हालिया चर्चित राफेल जहाज घोटाले की परत दर परत खुलासा भी इन्होने किया था उसी आधार पर कांग्रेस पार्टी ने राफेल का मुद्दा खड़ा किया , इसके अलावा नवनीत भाजपा के पार्टी फण्ड के आंतरिक घोटाले को उठा कर भी चर्चा में रहे है।

जानिए क्या है 200 टन गोल्ड का पूरा मामला

आंकड़ों व रिकॉर्ड में हेरा फेरी कैसे की गई है सिर्फ वही समझना है थोड़ा टाइम लग सकता है लेकिन जब आप समझेंगे तो यक़ीनन यही कहेंगे खुदा बचाए ऐसे चौकीदारों से 

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सबसे पहले आप रिज़र्व बैंक से प्राप्त आरटीआई की इस रिप्लाई को पढ़िए –जो पत्रकार नवनीत चतुर्वेदी ने ही पूछा था रिज़र्व बैंक से –

पहला सवाल — रिज़र्व बैंक के नागपुर वॉल्ट में कितना गोल्ड है

जवाब आता है –मांगी गई सुचना डिस्क्लोज नहीं की जा सकती

दूसरा सवाल पूछा है – कितना गोल्ड बाहर के विदेशी बैंक में रखा गया है

जवाब आता है — 268.01 टन गोल्ड बैंक ऑफ़ इंग्लैंड और बैंक ऑफ़ इंटरनेशनल सेटलमेंट्स में रखा गया है ,

यहाँ 68 टन गोल्ड शुरू से मतलब काफी सालो से रखा है बैंक ऑफ़ इंग्लैंड में जिसके सम्बन्ध में जानकारी पहले से ही मीडिया में व विपक्ष सबको है। अब सवाल यह उठता है कि यह 200 टन गोल्ड क्यों विदेशी बैंक बीआईएस में रखा गया ? कब यह गोल्ड गया और इसके बदले में भारत सरकार को क्या मिला ? और यह जानकारी अब तक पब्लिक डोमेन में गायब क्यों रही इसको क्यों छिपाया गया ?

नवनीत ने उपरोक्त सवालो के जवाब खोजने के लिए आरबीआई और बीआईएस के रिपोर्ट्स ऑडिट बैलेंस शीट को पढ़ना शुरू किया —

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रिज़र्व बैंक की जून 2011 की ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक गोल्ड सब कुछ यही भारत में ही था –देखिये बैलेंसशीट कॉपी 2011 30 जून

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रिज़र्व बैंक की जून 2014 की ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक भी गोल्ड यही भारत में ही था –देखिये बैलेंसशीट कॉपी 2014 30 जून

सनद रहे कि मई 2014 में सत्ता परिवर्तन होता है और अब मोदी सरकार केंद्र में आ जाती है , विश्वस्त सूत्रों के हिसाब से जुलाई 2014 में कुछ खेल रचा गया और यह गोल्ड नामालूम तरीके से अचानक बड़े गुप्त पैटर्न पर विदेश स्थित बीआईएस को चला जाता है जिससे सम्बंधित कोई भी खबर पब्लिक डोमेन में नहीं है।

अब आप रिज़र्व बैंक की 2015 वाली ऑडिट रिपोर्ट को यदि गौर से पढ़े तो सब आंकड़ों में हेरा फेरी का खेल उजागर हो जाता है , इस इकोनॉमिकल क्राइम का मोडस ऑपरेंडी बिलकुल वही है जैसा मैंने जीएसपीसी -गुजरात स्टेट पेट्रोलियम कारपोरेशन के एकाउंट्स में 19876 करोड़ की गड़बड़ पकड़ी थी , यहां गुजरात मॉडल सक्रिय हो चुका है –

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2015 की ऑडिट रिपोर्ट के कुछ अंश यहां लगाए है मैंने — इसके अनुसार गोल्ड का एक हिस्सा भारत में है और एक हिस्सा विदेश में है , भारत में जो गोल्ड है वो भारतीय मुद्रा के छपने के एवज में है और विदेश में जो गोल्ड है वो भी रिज़र्व बैंक की संपत्ति है लेकिन रखी गई स्विट्ज़रलैंड बीआईएस में है।

आंकड़ों में हेराफेरी यह हुई है कि 2015 की रिपोर्ट में जहाँ पिछले साल 2014 का हवाला दिया गया है वहां भी इस गोल्ड का आधा हिस्सा भारत और आधा हिस्सा विदेश में होना दिखा दिया है ,जबकि 2014 की ऑडिट रिपोर्ट को देखा जाए तो सब गोल्ड यही पर है भारत में ही।

उपरोक्त डॉक्यूमेंट साफ़ साफ़ बताते है कि यह 200 टन गोल्ड 30 जून 2014 तक तो यही था, उसके बाद वो वअब इन सवालो के जवाब अभी भी अनुत्तरित है कि यह गोल्ड बाहर विदेशी बैंक में क्यों गया ? कब व कैसे गया ? उद्देश्य क्या था ? क्या इसको गिरवी रखा गया ? या इसके बदले में स्वैपिंग करके डॉलर लिए गए ?आखिर बाहर भेजा क्यों ?? और सबसे बड़ा सवाल यह पब्लिक डोमेन में क्यों नहीं है इसको छिपाया क्यों गया ??

जाहिर है जवाब रिज़र्व बैंक को देना है ,वित्त मंत्री को देना है ,पीएम मोदी को देना है –लेकिन मोदी सरकार में भला जवाब किसी ने दिया है कभी ?? 

मुख्य मुद्दा यही है आम जनता को इन भ्रष्ट चौकीदारों से भरी सरकार से बचना चाहिए , जवाबदेही चौकीदार की है वो बताये जवाब दे –हमारे देश का गोल्ड क्यों बाहर गया ? वापस कब कैसे आएगा ? क्या भाजपा नेता माफ़ी मांगेंगे देश से यह जानकारी छिपाने के लिए ??

मैनस्ट्रीम मीडिया शायद न उठाये इस मामले को –लेकिन सोशल मीडिया और इंटरनेट मीडिया इसको जम कर उठाए। 

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