Satya Darshan

BSNL के बाद अब पवन हंस : कर्मचारियों का वेतन रोका

ऋषभ कु. शर्मा | अप्रैल 30, 2019

भारत में विमानन उद्योग पर संकट खत्म होने के आसार नहीं दिख रहे. विमानन क्षेत्र की दो बड़ी सरकारी कंपनियां एयर इंडिया और पवन हंस डूबने की कगार पर हैं.

भारत की खस्ता हाल होती जा रही सरकारी कंपनियों में एक और नाम जुड़ गया है. यह नाम है पवन हंस का. पवन हंस भारत में हेलिकॉप्टर सुविधा प्रदान करने वाली एक कंपनी है. पवन हंस के पास भारत का सबसे बड़ा सिविल हेलिकॉप्टरों का बेड़ा है. फिलहाल पवन हंस ने अपने कर्मचारियों की अप्रैल महीने की तनख्वाह रोक ली है. इससे पहले बीएसएनएल ने घाटे के चलते अपने कर्मचारियों की तनख्वाह रोकी थी.

पिछले दिनों भारतीय डाक ने अपना घाटा बीएसएनएल और एयर इंडिया से ज्यादा बताया था. एयर इंडिया लंबे समय से लगातार घाटे में चल रही है. कुछ दिन पहले प्राइवेट कंपनी जेट एयरवेज के बंद हो जाने से 22,000 कर्मचारी बेरोजगार हो गए. इनमें से एक कर्मचारी ने तनाव में आकर आत्महत्या कर ली.

पवन हंस ने क्यों रोकी तनख्वाह

25 अप्रैल को कंपनी के प्रबंधन ने एक सर्कुलर जारी किया जिसमें लिखा था कि कंपनी कर्मचारियों को असहज वित्तीय परिस्थितियों के चलते अप्रैल महीने का वेतन देने की स्थिति में नहीं है. कंपनी के प्रदर्शन की समीक्षा करने पर यह पाया गया कि कंपनी विषम वित्तीय परिस्थिति में फंसी हुई है. इस उद्योग का भविष्य अनिश्चित है क्योंकि कंपनी के कई सारे उपक्रमों को नुकसान हुआ है. वित्तीय वर्ष 2018-19 में कंपनी का राजस्व तेजी से घटा है और इस वर्ष उसे 89 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है. कंपनी के राजस्व, खर्च और कमाई में भारी अंतर आ गया है. सबसे ज्यादा परेशानी कर्मचारियों के खर्च की है. ग्राहकों पर चल रहा उधार 230 करोड़ रुपये पहुंच गया है. इस स्थिति में सुधार के लिए कंपनी को प्रबंधन के कई स्तरों पर सुधार करने की जरूरत है.

इस विकट वित्तीय परिस्थिति को देखते हुए उत्पादन में सीधे योगदान कर रहे कर्मचारियों के अलावा सभी का वेतन रोका जा रहा है. यह वेतन तब दिया जा सकेगा जब ग्राहकों पर उधारी का 60 प्रतिशत हिस्सा वापस नहीं आ जाता और उधारी 100 करोड़ से कम नहीं हो जाती. कंपनी इसके लिए खर्च में कटौती के दूसरे तरीके भी अपनाएगी. पवन हंस के कर्मचारी यूनियन ने इस पर गहरा आक्रोश जताया है. कर्मचारी यूनियन का कहना है कि इस तरह वेतन रोकना अमानवीय है. प्रबंधन में उच्च पदों पर बैठे लोगों की गलत नीतियों की वजह से ऐसा हो रहा है. कर्मचारी इसके विरोध में काली पट्टी बांधकर काम करेंगे.

पवन हंस के क्यों उड़ गए 'तोते'

पवन हंस भारत का सबसे बड़ा हेलिकॉप्टर ऑपरेटर है. इसके पास करीब 50 हेलिकॉप्टर हैं. पवन हंस की वेबसाइट के मुताबिक कंपनी सिर्फ हेलिकॉप्टर तक सीमित नहीं है. कंपनी अपने हेलिपोर्ट और हेलीपैड बना रही है. इसके अलावा कंपनी सी प्लेन और छोटे हवाई जहाज चलाने का भी इरादा रखती है. कंपनी के पास 10 लाख घंटे से ज्यादा की उड़ानों का अनुभव है. कंपनी में 51 प्रतिशत हिस्सेदारी पवन हंस लिमिटेड यानी सीधे भारत सरकार और 49 प्रतिशत हिस्सेदारी ओएनजीसी की है. ओएनजीसी अपने काम में पवन हंस के हेलिकॉप्टर ही इस्तेमाल करता है. सिविल उड़ानों के अलावा बीएसएफ के छह ध्रुव हेलिकॉप्टर्स को भी एचएएल के लिए पवन हंस ही चलाता है.

साल 2015 में कंपनी ने 11 नए हेलिकॉप्टर और दो सीप्लेन खरीदने का प्रस्ताव सरकार को दिया था. साल 2017 में कंपनी का मुनाफा 38.8 करोड़ रुपये था. साल 2014 से 2016 के बीच पवन हंस ने 38 छोटी-बड़ी दुर्घटनाओं का सामना किया. इसके अलावा कई हेलिकॉप्टर क्रैश भी सामने आए. 2011 में अरुणाचल प्रदेश के सीएम दोरजी खांडू भी पवन हंस के हेलिकॉप्टर में सवार थे जो क्रैश हो गया और उनकी मौत हो गई. साथ ही ओएनजीसी के अधिकारियों को ले जा रहा हेलिकॉप्टर 2015 में क्रैश हो गया था. डीजीसीए के ऑडिट में पवन हंस के कई सारे हेलिकॉप्टरों की हालत सही नहीं पाई गई. वो सुरक्षा मानकों पर खरा नहीं उतर रहे थे.

यूं टूटी उम्मीदें

साल 2017 में शुरू हुई क्षेत्रीय कनेक्विटी योजना उड़ान से पवन हंस को उम्मीदें थीं. पवन हंस ने उड़ान योजना में हिस्सा लेने के लिए छोटे हवाई जहाज खरीदने की योजना बनाई जो धरातल पर नहीं आ सकी. प्राइवेट कंपनियों ने इसका जमकर फायदा उठाया. पवन हंस उड़ान नहीं भर सकी और प्राइवेट कंपनियां बाजी मार ले गईं. 2018 में हुए पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव और 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए सभी पार्टियों ने हेलिकॉप्टर बुक करवाए हैं. लेकिन यहां भी प्रबंधन की नाकामियों के चलते पवन हंस नाकाम रही और प्राइवेट कंपनियां बाजी मार ले गईं.

केंद्र सरकार ने पवन हंस को बेचने की योजना बना ली है. इसके लिए सरकार ने ओएनजीसी को भी अपने शेयर बेचने के लिए राजी कर लिया है. लेकिन चुनाव होने तक पवन हंस की बिक्री रोक ली है. चुनाव होने के बाद इसे बेचने की कोशिशें की जाएंगी. भारत में हेलिकॉप्टर सर्विस में पवन हंस के बाद ग्लोबल वैक्ट्रा कंपनी का नाम आता है जिसकी क्षमता पवन हंस से लगभग आधी है. इसके पास अभी 29 हेलिकॉप्टर हैं. लेकिन यह नुकसान में नहीं है.

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