Satya Darshan

समस्त काशीवासी और कांग्रेसजन हैं इस लोकतांत्रिक धर्मयुद्ध मे हमारी ताकत- अजय राय

वाराणसी (एसडी) | अप्रैल 25, 2019

लोकसभा चुनाव 2019 के लिए वाराणसी की प्रतिष्ठित सीट से नरेंद्र मोदी के खिलाफ कांग्रेस पार्टी ने तमाम कयासों को विराम देते हुए आज अजय राय को अपना अधिकृत प्रत्याशी बनाए जाने की विधिवत घोषणा की। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी की वाराणसी से चुनाव लडने की हार्दिक अभिरुचि के बावजूद शीर्ष नेतृत्व ने काशी से उनके गहरे जुडाव और जनता  के प्रति उनकी सतत् क्रियाशीलता को व्यापक तरजीह देते हुए उन्हें पार्टी का उम्मीदवार बनाने का निर्णय लिया। 

इसपर अजय राय ने केंद्रीय नेतृत्व का आभार व्यक्त करते हुए कहा - यह मेरा सौभाग्य है कि कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने वाराणसी संसदीय क्षेत्र से एक बार फिर मुझ पर विश्वास जताते हुये कांग्रेस प्रत्याशी बनाया है। मैं पिछले चुनाव से निरन्तर वाराणसी के लोगों के हर सुख दुख में साथ रहकर उनके सरोकारों एवं समस्याओं के लिये संघर्षरत रहा हूं और उसके बदले मिले सरकारी दमन एवं उत्पीडन को सहकर भी अन्याय एवं अनीति की सत्ता से टकराता रहा हूं। 

श्री राय ने कहा "पिछले चुनाव में जीत कर भी जनता से वादों एवं प्रधानमंत्री स्तरीय योगदान पाने की जनता की आकांक्षाओं की पूर्ति तथा बनारस के लिये विकास के अपने विजन घोषणापत्र के सभी आठ बिन्दुओं की कसौटी पर श्री नरेन्द्र मोदी जी पूर्णत: विफल रहे हैं।

....अत: एक पूर्ण विफल सांसद के रिपोर्ट कार्ड के साथ माननीय प्रधानमंत्री जी जब एक बार फिर काशी की जनता की लोकतांत्रिक अदालत में खड़े हुये हैं, तो उनकी गंभीर जबाबदेही के सवालों एवं मुद्दों और कांग्रेस घोषणापत्र के सकारात्मक लोककल्याणकारी कार्यक्रमों के साथ हम उन्हें परास्त करने के लिये चुनावी लोकतांत्रिक अखाड़े में हैं। बनारस के लोगों के प्रति  एकनिष्ठा एवं ईमानदारी के साथ अपने संघर्षों तथा प्रलोभन एवं दमन के हर हथकंडों को सामने झुके बिना जन-सरोकारों के लिये जूझने की अपनी साख की साख पर टिका आत्मविश्वास और संघर्ष के साथी कांग्रेसजनों एवं काशीवासियों की ताकत इस लोकतांत्रिक धर्मयुद्ध में हमारी शक्ति होगी"।

अजय राय को प्रत्याशी बनाये जाने की क्या रहीं प्रमुख वजहें

अजय राय उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव में वाराणसी जिले के पहले कोलसला और बाद में पिण्डरा विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र से से पांच बार जीतकर, कुल बीस वर्षों तक विधायक रहे हैं। वह सर्वप्रथम 1996 में 26 साल की आयु में भाजपा प्रत्याशी के रूप में कोलसला में नौ बार विधायक रहे भाकपा के स्व. ऊदल को हराकर विधायक बने थे। 

सन् 2001 और 2007 में वह पुन: चुने गये, लेकिन सन्  2009 के लोकसभा चुनाव में वाराणसी में बाहर से लाकर डा.मुरली मनोहर जोशी को प्रत्याशी बनाने को काशी के स्वाभिमान के विरुद्ध मानते हुये उन्होंने भाजपा से बगावत की और सपा के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ते हुये डा.जोशी और श्री मुख्तार अंसारी के बाद तीसरे स्थान पर रहे। 

उस समय उन्हें विधान सभा सदस्यता से त्यागपत्र देना पड़ा। सपा में वह रम नहीं पाये और प्रदेश में सत्तारूढ़ बसपा के दबाव के बावजूद अपने परिवार की मूल पार्टी कांग्रेस में जाना चाहते थे, लेकिन बात नहीं बनने पर निर्दलीय लड़ कर विधान सभा उपचुनाव जीते। 

जीतने के बाद कांग्रेस नेतृत्व की आंखें खुलीं और उन्हें कांग्रेस विधानमंडल दल का सम्बद्ध सदस्य बनाया गया। बाद में  2012 का विधान सभा चुनाव उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में जीता।

श्री अजय राय को कांग्रेस ने श्री नरेन्द्र मोदी के विरुद्ध 2014 का लोकसभा चुनाव लड़ाया। उस चुनाव के बाद पहली बार 2017 के विधानसभा चुनाव में भी उन्हें पराजय का सामना करना पड़ा।  सन्  2014 के लोकसभा चुनाव के बाद वह कांग्रेस के नेता के रूप में निरन्तर केन्द्र और प्रदेश सरकार के विरुद्ध सक्रिय विरोध आन्दोलनों का क्रम  चलाते रहे और जिस कांग्रेस में कभी उनके शामिल होने का विरोध हुआ था, उसमें वाराणसी के वह एकक्षत्र नेतृत्वकर्ता माने जाने लगे। 

अंतत: कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव में एक बार फिर उन्हें ही प्रत्याशी बनाने का फैसला लिया। बनारस में संतों के उत्पीड़न के विरुद्ध प्रतिकार आन्दोलन में सक्रिय योगदान के चलते उन्हें 2016 में गिरफ्तार सात माह तक फतेहगढ़ सेंट्रल जेल में निरुद्ध रखा गया था, लेकिन उच्च न्यायालय ने अंतत: ससम्मान बरी किया।

श्री अजय राय का परिवार मूल रूप से परंपरागत कांग्रेसी था और उनके बड़े पिता स्व. श्रीनारायण राय वाराणसी जिला कांग्रेस के अध्यक्ष भी रहे। पिता स्व.सुरेन्द्र राय व्यवसाय और कृषि से जुड़े हुये थे। श्री राय की आरम्भिक शिक्षा वसन्त स्कूल, राजघाट से हुई और स्नातक शिक्षा उन्होंने महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से प्राप्त की।

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